कोरोना का झूठा इलाज बताने वाले यूट्यूब चैनल के सब्सक्राइबर 30 दिन में 10 लाख तक बढ़े **

Jamshedpur News - फोटो लेबनान की है। यहां 21 मार्च को मदर्स डे सेलिब्रेट किया गया। इसी दौरान एक मां को अपने बेटे से ड्रोन के जरिए फूल...

Mar 27, 2020, 07:00 AM IST

फोटो लेबनान की है। यहां 21 मार्च को मदर्स डे सेलिब्रेट किया गया। इसी दौरान एक मां को अपने बेटे से ड्रोन के जरिए फूल मिले। लेबनान में भी अभी तक 350 से ज्यादा संक्रमित मिल चुके हैं।

 बालकनी में लेबनान का मदर्स डे**

सोशल मीडिया और वाट्सएप पर तेजी से अफवाहों वाले मैसेज फैल रहे हैं। इनमें कोरोना की दवाओं और लॉकडाउन को लेकर अफवाहें हैं। यूट्यूब पर भी ऐसे वीडियोज की भरमार है जो कोरोना का इलाज बताने का दावा कर रहे हैं। इनके ‘मिल गई कोरोना की दवा’, ‘गर्मी से खत्म होगा कोरोना’ जैसे भ्रमित करने वाले टाइटल हैं। येे वीडियो बनाने वाले चैनल्स के लाखों सब्सक्राइबर हैं। ऐसे कुछ चैनल्स का सोशलब्लेड पर किया गया अध्ययन बताता है कि इन चैनल्स के पिछले एक महीने में 5 लाख से 10 लाख तक सब्सक्राइबर बढ़ गए हैं।


दक्षिण कोरिया में शुरुआती चार हफ्तों में कुल 30 मामले सामने आए थे। इन्हीं 30 संक्रमितों की वजह से फरवरी के अंत कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों को आंकड़ा 1000 तक पहुंचा था। फिर आई ‘पेशेंट 31’। इस 61 वर्षीय महिला के संक्रमित होने की जानकारी मिलने से पहले वह देगू शहर और राजधानी सिओल के कई इलाकों में घूमती रही। उसका 6 फरवरी को एक छोटा-सा एक्सीडेंट हुआ, तो वह अस्पताल गई। इस दौरान वह दो बार शिनचियोंजी चर्च के समारोहों में गई। डॉक्टरों ने 15 फरवरी को उससे कहा भी कि उसे तेज बुखार है और कोरोना का टेस्ट करवा लेना चाहिए। लेकिन सलाह को नजरअंदाज कर महिला अपने दोस्त के साथ एक होटल में बुफे लंच के लिए चली गई। उसके लक्षण बढ़े तो डॉक्टरों ने फिर टेस्ट की सलाह दी। आखिरकार 17 फरवरी को टेस्ट हुआ। अगले दिन स्वास्थ्य अधिकारियों ने घोषणा की कि वह दक्षिण कोरिया की 31वीं कंफर्म्ड मरीज है।

इसके बाद ही कुछ ही दिनों में देश में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ गई, जिसमें शिनचियोंजी चर्च और उसके आस-पास के इलाकों के सैकड़ों लोग कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव आने लगे। कोरिया सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (केसीडीसी) ने ऐसे 9300 लोगों की लिस्ट निकाली जो शिनचियोंजी चर्च के उन दो समारोहों में गए थे। इसमें हजारों के टेस्ट पॉजिटिव आए। उधर एक नजदीकी अस्पताल में कोरोना मरीजों का एक और समूह सामने आने लगा। आधिकारियों ने जांच की तो इन मामलों में और चर्च से आए मामलों में संबंध नजर आया। उन्हें पता चला कि दोनों जगहों के मरीजों का संबंध पेशेंट 31 से रहा है। केसीडीसी के मुताबिक यह महिला 1,160 लोगों के संपर्क में आई, जिन्होंने और लोगों को संक्रमित किया। मार्च 18 तक के मरीजों के अध्ययन से पता चला है कि दक्षिण कोरिया में कुल मरीजों में 60% मरीज शिनचियोंजी चर्च समूह से हैं। इनकी संख्या 5,016 से भी ज्यादा है। जबकि कुल मरीज 8900 से ज्यादा हैं।



डब्ल्यूएचओ ने बताया है, कब पहनें, कैसे पहनें?

मास्क बीमार व्यक्ति से बाकी लोगों में संक्रमण फैलने से रोकने में मदद कर रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक संक्रमित व्यक्ति, खांसी या छींक से पीड़ित या संक्रमण की आशंका वाले व्यक्ति और कोरोना के मरीज का इलाज कर रहे या साथ रह रहे व्यक्ति मास्क जरूर पहने। साथ ही स्वस्थ व्यक्ति को मास्क की जरूरत नहीं है। केवल मास्क पहनने से बचाव नहीं होगा। बार-बार हाथ धोना या सैनेटाइजर इस्तेमाल करना भी जरूरी है।

मास्क कैसे पहनें और उतारें: मास्क पहनने से पहले साबुन या सैनेटाइजर से हाथ साफ करें। मास्क से मुंह और नाक को अच्छे से ढंके। कहीं कोई गैप न रहे। जब मास्क पहने हों, तो इसे छूने से बचें। सिंगल-यूज मास्क को दोबारा इस्तेमाल न करें। मास्क हटाने के लिए इसे पीछे से खोलें। कभी भी आगे का हिस्सा न छुएं।



47 करोड़ स्मार्टफोन पर इलाज बताने से लेकर लाॅकडाउन से जुड़ी अफवाहों तक की आशंका



दक्षिण कोरिया में कोरोना के 60 फीसदी से ज्यादा मामले एक ही महिला की वजह से



सैनेटाइजर में कम से कम 60 फीसदी एल्कोहल होना जरूरी

एक अध्ययन के मुताबिक हैंड सैनेटाइजर बीमारियों को 26% तक कम कर सकता है। यह सभी तरह के कीटाणु नहीं मार सकता, लेकिन कोरोना में कारगर है। सीडीसी के मुताबिक यह तभी प्रभावी है, जब इसमें कम से कम 60% एल्कोहल हो। डबल्यूएचओ ने भी एल्कोहल-बेस्ड हैंड सैनेटाइजर की सलाह दी है। हालांकि सीडीसी सैनेटाइजर की तुलना में साबुन को ज्यादा कारगर मानता है।

कैसे काम करता है: साबुन की ही तरह, सैनेटाइजर कोरोना वायरस की अंदरूनी सतह पर असर करते हैं। लेकिन अगर हाथ गंदे हों, उनमें पहले ही चिकनाई या कोई अन्य गंदगी चिपकी हो तो पहले पानी से ही हाथ धोएं।

घर में नहीं बनता सैनेटाइजर: कई लोग घर में ही हैंड सैनेटाइजर बनाने के तरीके बता रहे हैं। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडीसिन की प्रोफेसर सैली ब्लूमफील्ड कहती हैं कि घर पर सैनटाइजर बना ही नहीं सकते। इसमें अन्य केमिकल्स के साथ 60-70% एल्कोहल की जरूरत होती है, जो घर पर नहीं हो सकती।



साबुन में 50 नैनोमीटर तक

छोटे वायरस मारने की क्षमता

कोरोना वायरस से बचाव में जिस उपाय का सबसे ज्यादा जिक्र हो रहा है, वह है साबुन से बार-बार हाथ धोना। डब्ल्यूएचओ से लेकर डॉक्टर और स्वास्थ्य मंत्रालय तक, सभी की यही सलाह है कि साबुन से दिन में 6-8 बार तक हाथ धोएं। जो वायरस एल्कोहल और क्लोरीन छिड़कने से भी नहीं मरते, वह साबुन से खत्म हो जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक साबुन 50 से 200 नैनोमीटर तक छोटे आकार के वायरस मार सकता है। ज्यादातर लोग दिन में 2 से 5 मिनट तक अपने चेहरे को हाथ लगाते हैं। अगर वायरस हाथ पर रह जाता है और आप चेहरे पर हाथ लगाते हैं तो कोरोना वायरस के आपके श्वसन तंत्र में जाने की आशंका रहती है।

साबुन कैसे काम करता है: वायरस को हटाने के लिए सिर्फ पानी से हाथ धोना काफी नहीं है क्योंकि वायरस की संरचना ऐसी होती है कि वह हाथ से चिपक जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग मेडिकल सेंटर के डॉक्टर जॉन विलियम्स बताते हैं कि अगर कोरोना वायरस को माइक्रोस्कोप में देखेंगे तो पाएंगे कि इसकी सतह पर क्राउन (मुकुट) होते हैं। कोरोना का अर्थ भी क्राउन ही होता है, इसलिए इसे यह नाम मिला। इन क्राउन के नीचे वायरस के लिपिड्स (फैट) होते हैं। कल्पना कीजिए कि आप घी वाला एक बर्तन धो रहे हैं। बिना साबुन के इसे धोने पर घी तो हट जाता है लेकिन चिकनाई महसूस होती है। इसी तरह पानी से कोरोना की अंदरूनी परत नहीं धुल पाती। लेकिन साबुन के माल्यूक्यूल्स पानी के साथ मिलकर वायरस के फैट वाले हिस्से को भी हटा देते हैं।

20 सेकेंड ही क्यों: इसके बारे में कोई वैज्ञानिक शोध नहीं है, लेकिन डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हाथ के सर्फेस एरिया को देखते हुए हाथों को अच्छे से धोने की पूरी प्रक्रिया में 20 से 30 सेकंड का समय लगता है। लेकिन हाथ धोते समय हमेशा घड़ी पर नजर तो नहीं रखी जा सकती। इसके लिए अमेरिका का सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) संस्थान सलाह देता है कि मन में दो बार ‘हैप्पी बर्थडे’ गाना शुरू से अंत तक गुनगुनाएं। हाथ धोने में इतना ही समय लगता है।

कोरोना वायरस के खिलाफ देश में चल रहे 21 दिन के महायुद्ध में हमारे हथियार कोई दवाएं या भारी-भरकम तकनीक नही है। ये बहुत साधारण चीजें हैं, जो इन दिनों हमारे जीवन में किसी हीरो का दर्जा रखती हैं और हर जगह नजर आ रही हैं। ये हैं - साबुन, हैंड सैनेटाइजर और काफी हद तक मास्क। जहां विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साबुन से बार-बार हाथ धोने और हैंड सैनेटाइजर के इस्तेमाल पर बहुत ज्यादा जोर दिया है, वहीं लोग खुद को संक्रमण से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि डब्ल्यूएचओ स्वस्थ लोगों को मास्क पहनने की सलाह नहीं दे रहा है, फिर भी लोग एहतियातन इन्हें पहन रहे हैं। वहीं इस महायुद्ध में लोगों की लापरवाही और सोशल मीडिया, वाट्सएप, यूट्यूब पर फैल रही अफवाहें विलेन का काम कर रही हैं। जहां एक व्यक्ति की लापरवाही हजारों को संक्रमित कर रही है। वहीं अफवाहें लोगों को भटका रही हैं। पढ़िए कोरोना के खिलाफ इस जंग में हमारे हीरो और विलेन्स के बारे में सब कुछ।**

अगर हम झूठी जानकारियों से बचे रहेंगे तभी सुरक्षित रह पाएंगे**

 सिर्फ सही जानकारी से ही हम कोरोना से जीत सकते हैं...

40 करोड़ से भी ज्यादा वाट्सएप यूजर्स हैंं

47 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास स्मार्टफोन हैं

26 करोड़ से ज्यादा एक्टिव यूजर्स है यूट्यूब पर

अफवाहें यहां ज्यादा फैल सकती हैं क्योंकि देश में...**

गैर जिम्मेदार व्यवहार, झूठे यू-ट्यूब चैनल आपको संक्रमण की ओर ले जा सकते हैं

विलेन

क्योंकि सोशल डिस्टैंसिंग के अलावा कोरोना के संक्रमण से ये 3 उपाय ही आपको बचा सकते हैं...

हीरो

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