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लीज से अधिक क्षेत्र में पत्थर उत्खनन करने पर केसीपीएल पर Rs.49.8 लाख का जुर्माना

सड़क निर्माण कार्य कर रही कंपनी केसीपीएल बड़े पैमाने पर टैक्स की चाेरी कर रही है। इसका खुलासा होने पर विभाग ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:45 PM IST

सड़क निर्माण कार्य कर रही कंपनी केसीपीएल बड़े पैमाने पर टैक्स की चाेरी कर रही है। इसका खुलासा होने पर विभाग ने कंपनी को नोटिस किया है। कंपनी पर कुल 49 लाख 8 हजार 750 रुपए बतौर जुर्माना जमा करने को कहा गया है। जानकारी के अनुसार कंपनी द्वारा एक ओर जहां लीज एरिया से बाहर से पत्थर का खनन किया जा रहा था वहीं दूसरी ओर पत्थरों के ट्रांसपोर्ट के लिए चालान भी नहीं लिया जा रहा था। विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए कंपनी के विरुद्ध नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि कंपनी लीज एरिया से अधिक एरिया में पत्थर का उत्खनन कर रही है। खनन विभाग के अनुसार संबंधित कंपनी ने 2200 घन मीटर पत्थर का अवैध उत्खनन किया है। साथ हीं कंपनी द्वारा पत्थर के परिवहन हेतु विभाग से चालान कार्यालय से प्राप्त नहीं किया है। जिससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि कंपनी ने अवैध रूप से पत्थर का उत्खनन किया है। विभाग द्वारा जारी नोटिस के अनुसार कुल पट्‌टा क्षेत्र से कंपनी ने 41 हजार 200 घनमीटर पत्थर का अग्रिम स्वामित्व नहीं किया गया है जो कुल 43 लाख 26 हजार रुपए है। इसके अलावे कंपनी ने लगभाग 2200 घनमीटर पत्थर खनन पट्टा क्षेत्र से बाहर किया है। जिसका खनीज मूल्य 5 लाख 82 हजार 750 रुपए है। कुल 49 लाख 8 हजार 750 रुपए भुगतान करने की बात नोटिस में किया गया है। उक्त रुपए जमा करने के लिए खनन विभाग को सात दिनों का समय दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि जिला के नारायणपुर प्रखंड के बंसपाहड़ी पत्थर खदान को गत 12 जनवरी को प्रशासन द्वारा सील कर दिया गया था। अनुमंडल पदाधिकारी जामताड़ा तथा जिला खनन पदाधिकारी भोला हरिजन ने अवैध उत्खनन में संचालित किए जा रहे केसीपीएल कंपनी के पोकलेन और ड्रील मशीन को भी जब्त कर सील किया था।

इसी जगह से किया जा रहा था पत्थर उत्खनन।

शिकायत मिलने के बाद जांच में सही पाया गया आरोप

जानकारी के अनुसार यहां से केसीपीएल द्वारा अवैध उत्खनन किया जा रहा था। पत्थर के अवैध उत्खनन के विरूद्ध जिला प्रशासन को काफी शिकायत मिली थी। जिसके बाद यह कार्रवाई किया गया था। निरीक्षण के दौरान दो एकड़ से ज्यादा एरिया पर पत्थर का उत्खनन करते हुए पाया गया। वहीं जानकार की मानें तो यहां पहाड़ को तोड़ने के लिए संबंधित कंपनी द्वारा पत्थर के इस अवैध उत्खनन में पत्थर को तोडऩे में उपयोग डायनामाइट का प्रयोग किया जाता है। परंतु डायनामाइट कहां से आता है, यह बड़ा सवाल है। लेकिन, इस सवाल का लोगों को जवाब नहीं मिल रहा है। इस मामले में संबंधित विभाग अब तक महज तमाशा देख रहा है।

पत्थर उत्खनन में नियम विरुद्ध विस्फोटक का भी किया था प्रयोग

देखा जाए तो इन दिनों पत्थर माफियाओं के द्वारा खुलेआम पत्थर को तोड़ने के लिए विस्फोटक सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। विस्फोट की आवाज इतनी भयावह होती है कि पूरा इलाका थर्रा जाता है। एक जगह की लीज के नाम पर दूसरी कई जगहों पर पत्थर के अवैध उत्खनन हो रहे हैं। जबकि उक्त कंपनी के पास विस्फोट के लिए लाइसेंस भी नहीं था।

कंपनी द्वारा लीज एरिया के बाहर भी उत्खन न किया जा रहा था। साथ ही चालान भी कार्यालय से प्राप्त नहीं किया गया था। बात संज्ञान में आने के बाद नोटिस किया गया है। सात दिनों में 49 लाख 8 हजार 750 रुपए भुगतान करने को कहा गया है।'' भोला हरिजन, जिला खनन पदाधिकारी, जामताड़ा।

केपीसीएल कंपनी दूसरे राज्यों में भी खपा रही थी यहां का पत्थर

उल्लेखनीय है कि केसीपीएल जामताड़ा जिला में विभिन्न महत्वपूर्ण सड़कों का निर्माण कार्य कर रही है। इन निर्माण कार्य में अवैध रूप से उत्खनित पत्थरों को खपाया जा रहा था। इसके अलावे यहां से दूसरे प्रांत भी पत्थरों को भेजा जाता था। कंपनी को यह लीज जामताड़ा जिला में बन रहे सड़क निर्माण कार्य में पत्थर के उपयोग के लिए लीज दिया गया था।

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