किसानों को मिला लाह की खेती का प्रशिक्षण

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Mar 17, 2019, 03:21 AM IST
वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा आईआईएनआरजी रांची के वैज्ञानिकों द्वारा ईको संयुक्त ग्राम वन प्रबंधन समिति के लाह कृषकों का दो दिवसीय प्रमंडल स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन वन विभाग में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डीएफओ सुशील सोरेन उपस्थित थे। डीएफओ सुशील सोरेन ने कहा कि लाह की खेती की खेती के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि लाह की खेती से किसानों को लाखों रूपये का आमदनी होगा। लाह की खेती करने के लिए किसानों को वन विभाग द्वारा पलास का पेड़ दिया जा रहा है। कहा कि लाह की खेती करने में कोई मेहनत नहीं है तथा पूंजी भी कम लगता है। लाह से लिपीस्टीक, आलता, नेलपॉलीस, हेयरडाई, चुड़ी सहित अनेकों समान बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि लाह की खेती कराने के लिए 25 स्वयं सहायता समूह बनाया गया है। लाह की खरीद बिक्री केंद्र फतेहपुर के मुरीडीह में खोला गया है। साथ ही सभी लैम्प में लाह की खरीद की जाएगी। वहीं रांची के वैज्ञानिक पीपार माझी, एसबी आजाद ने किसानों को बताया कि लाह की खेती पलास के पेड़, बैर के पेड़, कुथुम के पेड़ पर की जाती है। कहा कि इन पेड़ों की डालियों काटकर 6 महीने बाद लाह की कीड़े को पेड़ पर बांध दे। लाह के कीड़े दो प्रकार के होते है। एक कुथमी लाह तथा दूसरा रंगीला लाह। उन्होंने की पालन की सामान्य प्रक्रियाएं, कीट संरचना, फुकी उतारना, फसल कटाई, दवा छिड़काव की विधि के बारे विस्तारपुर्वक जानकारी दिया। मौके पर रेंजर प्रतिमा कुमारी, अजय लाल, रमेश ठाकुर, कलावती देवी, सपदा कुमारी, सुर्यवाला कुमारी सहित अन्य मौजूद थे।

112 हेक्टेयर में होगी ओल और अदरक की खेती

जामताड़ा | किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूती के लिए जिले में 112 हेक्टेयर में ओल और अदरक की खेती की जाएगी। जामताड़ा जिला में ओल और अदरक का बीज पहुंच गया है। होली के बाद किसानों के बीच बीज का वितरण किया जाएगा। विभाग द्वारा इसकी सभी तैयारी पूरी कर ली गई है। किसानों का चयन पूरा कर लिया गया है। अनुमंडल उद्यान पदाधिकारी समशुद्दीन अंसारी ने बताया कि जिले के 56 हेक्टेयर में ओल और 56 हेक्टेयर में अदरक की खेती की जाएगी। बताया कि अप्रैल माह से इसकी खेती आरंभ होगी।

किसानों का समूह बनाकर खेती कराया जाएगा। विभाग द्वारा चयनित किसानों को नि:शुल्क बीज उपलब्ध कराएगा। एनएसी द्वारा मार्च में बीज जामताड़ा भेजा जाएगा। इसकी सभी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। उन्होंने बताया कि जेटीडीएस से जुड़े समूह के किसानों को प्राथमिकता के साथ बीज दिया जाएगा। अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिले इस दिशा में विभाग कार्य कर रही है। बताया कि ओल और अदरक की खेती के लिए किसानों को अधिक मेहनत भी नहीं करना पड़ता है। कम मेहनत और कम पूंजी के बावजूद अधिक मुनाफा होता है। अनुमंडल उद्यान पदाधिकारी ने किसानाें को खेत तैयार करने की सलाह दिया है कहा कि बीज का वितरण जल्द कर दिया जाएगा। जागरूक हो कर इस योजना लाभ उठाने के लिए किसानों को प्रेरित किया।

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