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बाबा बैद्यनाथ मंदिर में हरि से हर का कराया गया मिलन

एक वर्ष पहले
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सोमवार फाल्गुन पूर्णिमा होली के अवसर पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में हरि और हर का मिलन कराया गया। सोमवार शाम चार बजे भगवान हरि को पालकी में बिठाकर बाबा मंदिर की परिक्रमा कराते हुए आजाद चौक स्थित दोल मंच ले जाया गया। जहां भगवान हरि को झूले पर बैठा कर झुलाया गया। शहर के कोने-कोने से लोग भगवान हरि पर अबीर गुलाल चढ़ाने के लिए दोल मंच पहुंचे। रात आठ बजे दोल मंच के नीचे विधिवत पूजा कर होलिका दहन की गई। होलिका दहन के पश्चात भगवान हरि को बाबा मंदिर लाया गया और बाबा के शिवलिंग से भगवान हरि की प्रतिमा को सटाकर हरिहर मिलन की परंपरा को पूर्ण किया गया। हरिहर मिलन के इस अद्भुत क्षण को देखने के लिए बाबा मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रही। भारतवर्ष के सभी तीर्थ स्थलों में हरिहर मिलन की परंपरा सिर्फ देवघर में ही विद्यमान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रावण के द्वारा भगवान शिव को लंका ले जाने के क्रम में भगवान विष्णु के द्वारा चरवाहा का रूप धरकर रावण के हाथों से शिवलिंग लेकर फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ही यहां पर स्थापित किया गया था।

भगवान हरि की प्रतिमा को सटाकर हरिहर मिलन की परंपरा को पूर्ण किया गया। हरिहर मिलन के इस अद्भुत क्षण को देखने के लिए बाबा मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रही। भारतवर्ष के सभी तीर्थ स्थलों में हरिहर मिलन की परंपरा सिर्फ देवघर में ही विद्यमान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रावण के द्वारा भगवान शिव को लंका ले जाने के क्रम में भगवान विष्णु के द्वारा चरवाहा का रूप धरकर रावण के हाथों से शिवलिंग लेकर फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ही यहां पर स्थापित किया गया था।

हरि से हर को मिलाते।

हरि को नगर भ्रमण कराते श्रद्धालु।
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