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मुस्लिम समाज के इबादत की रात शब-ए-बरात अाज मनायी जाएगी

Jamtara News - मुस्लिम समाज के लिए प्रमुख पर्व में से एक इबादत की रात शब ए बरात मंगलवार को मनाया जाएगा। इस त्याेहार को लेकर...

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:10 AM IST
मुस्लिम समाज के इबादत की रात शब-ए-बरात अाज मनायी जाएगी
मुस्लिम समाज के लिए प्रमुख पर्व में से एक इबादत की रात शब ए बरात मंगलवार को मनाया जाएगा। इस त्याेहार को लेकर मुस्लिम समुदाय के सभी घरों में तैयारी पूरी व्यवस्था कर ली गई है।

इस पर्व को लेकर स्थानीय मस्जिदों व ईदगाहों में रंगाई पुताई का कार्य पूर्व में ही करा ली गई है। पर्व में जहां विशेष पकवान का लोग आनंद उठाएंगे वही अपने पूर्वजों के नाम से कुरान खानी एवं गरीबों, मिस्कीनों के बीच भोजन वितरण किया जाता है। आज की रात मुस्लिम समाज के लिए फजीलत की रात है। सच्चे मन से दुआ करने वाले लोगों की मनोकामना पूर्ण होती है। बड़ों के साथ साथ छोटे-छोटे बच्चे भी रात भर मस्जिदों में पहुंचकर नमाज अदा करते हैं।

पाकडीह जामा मस्जिद के इमाम हाफिज कमरुद्दीन ने बताया कि शब ए बरात की रात इबादत करने की रात होती है। उन्होंने बताया कि इस रात को अल्लाह ने विशेष रात का दर्जा प्राप्त किया है। इसलिए लोग रात भर जागकर कुरान वह नमाज की अदायगी करते है। उन्होंने कहा कि शब-ए-बरात के रात इंसान ही नहीं बल्कि फरिश्ता भी अल्लाह पाक की इबादत करते हैं और अपनी सलामती वह गुनाहों की माफी अल्लाह पाक से मांगते है।

इस पर्व को लेकर जिला प्रशासन ने भी चाक चौबंद व्यवस्था कर रखा है ताकि किसी को भी कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

यहीं किया जाएगा शब-ए-बारात का आयोजन।

कैसे मनाते हैं शब-ए-बारात

शाबान की 14 तारीख को सूर्यास्त के साथ शब-ए-बरात आरंभ हो जाती है इसके साथ ही कुरान खानी का दौर शुरू हो जाता है।

इस रात की अहमियत

इस्लाम में इस रात को बड़ा ही अकीदत और एहतराम प्राप्त है। इस रात के बारे में अल्लाह के नबी हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैही व सल्लम ने फरमाया कि शब ए बरात की रात हजार महीने की रात से बेहतर है इस रात रुहुल अमीन हजरत जिब्राइल दुनिया में तशरीफ लाते हैं और इंसानों को खुदा का पैगाम सुनाते हैं खुदा के प्यारे रसूल ने अपनी दूसरी हदीस में फरमाया कि इस रात की इबादत हजार महीने की इबादत से बेहतर है। इस रात पढ़ी जाने वाली एक रकात नफिल नमाज का 27 गुना अधिक सवाब मिलता है जो बंदा शब ए बरात की पूरी रात इबादत करता है तो कयामत के दिन अल्लाह उसके सिर पर एक ताज पहन आता है। इस रात की इबादत के बाद जो बंदा खुदा के हुजूर में नेक दिल से अपने वह अपने पूर्वजों के गुनाहों की माफी मांगता है। अल्लाह उसे माफ फरमाता है। ऐसी भी मान्यता है कि इस रात अल्लाह तआला बंदों के पूरे वर्ष की रोजी का हिसाब-किताब करता है।

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