रमजान के दूसरे जुमे पर नमाज पढ़ने मस्जिदों में उमड़े नमाजी

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:06 AM IST

Jamtara News - रमजान के दूसरे जुमे की नमाज शुक्रवार को जामताड़ा जिले भर में सभी मस्जिदों में बड़े अकीदत व एहतराम के साथ अदा की गई।...

Jamtara News - namaz reciting mosques on the second jumbo of ramzan
रमजान के दूसरे जुमे की नमाज शुक्रवार को जामताड़ा जिले भर में सभी मस्जिदों में बड़े अकीदत व एहतराम के साथ अदा की गई। कई मस्जिदों में ज्यादा नमाजियों के आने पर मस्जिद कमेटी द्वारा विशेष रूप से व्यवस्था की गई थी ताकि लोगों को नमाज पढ़ने में किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। वैसे तो जुमा की नमाज बड़ी फजीलत है नमाजियों की तादाद काफी रही, लेकिन रमजान महीने के जुमा में आम जुमा की अपेक्षा बहुत बड़ी तादाद में नमाज पढ़ने के लिए लोग मस्जिद पहुंचे। इसी कारण हर मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए अलग से व्यवस्था किया गया था। जुम्मा की अजान से पहले ही रोजेदार अपने कामकाज छोड़कर बेहतरीन लिबास पहन खुशबू लगा मस्जिदों में पहुंच गए। अजान के बाद सुन्नते अदा की इस दौरान पेश ए इमाम व आलिमों नया रमजान की अहमियत व शवाब तथा दिनी बातों पर तकरीर की।

जुम्मा की नमाज अदा करते मुस्लिम समाज के लोग।

रमजान में जुमे की नमाज होती है खास

नूर मोहल्ला मस्जिद के इमाम मौलाना बिलाल ने बताया कि जुमे की नमाज अदा करने से जिस्म, जहान और रूह साफ होकर पवित्र हो जाती है। सभी प्रकार के बुरे विचार व कर्म का सफाया हो जाता है। नमाजी मुल्क में शांति और अमन चैन की दुआ मांगते हैं।

प्रत्येक असरों का अलग-अलग महत्व होता है

सुभाष चौक जामा मस्जिद के इमाम मौलाना नजीरुद्दीन ने बताया कि रमजान माह को तीन अशराओं में बांटा गया है। इसमें 10 दिन का एक अशरा होता है। प्रत्येक अशरा का अपना अलग महत्व होता है। पहला अशरा रहमत का होता है। कुरान के अनुसार रमजान के पहले अशरे में रोजेदारों पर खुदा रहमत की बारिश करता है। दूसरा अशरा मगफिरत यानी माफी का होता है। इसमें रोजेदार खुदा से अपनी सभी गुनाहों की माफी मांगता है। तीसरा अशरा जहन्नुम से आजादी का होता है। जो रोजेदार इस्लाम द्वारा निर्धारित सभी वसूलो का पालन करते हुए पूरे रमजान में तन मन से खुदा की इबादत करता है, उसके लिए अल्लाह जन्नत का रास्ता खोलते हैं।

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