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मर्ज के बाद खाली पड़े भवन हो रहे हैं जर्जर, अन्य काम में उपयोग की मांग
सरकारी स्कूलों की मर्जर होने के बाद देखरेख एवं व्यवहार नहीं होने के कारण कई मर्जर विद्यालय की स्थिति जर्जर होती जा रही है। चाहे सरकारी स्कूल हो, अस्पताल हो, या अन्य सरकारी भवन। निर्माण के बाद व्यवहार नहीं होने से भवन जर्जर होती जा रही है। जिले के कई ऐसे स्कूल है जो बच्चों की कम संख्या होने के कारण नजदीकी स्कूल में मर्ज कर दिया गया था। नारायणपुर प्रखंड के अंतर्गत उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय गांगुडीह का है। गांव के नजदीक में ही बांका गांव के बच्चे इसी स्कूल में पढ़ाई करते थे। बाकुंडीह पंचायत के अंतर्गत बांका भी नजदीक पर है। जिसे पिछली भाजपा सरकार एवं शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार मर्ज कर उत्क्रमित मध्य विद्यालय बांका में सम्मिलित कर दिया गया है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय बांका के शिक्षक योगेंद्र मरांडी से जानकारी के अनुसार लगभग 35 की संख्या में गांगुडीह विद्यालय के बच्चे उत्क्रमित मध्य विद्यालय बांका में नामांकित किए गए थे। फिलहाल मर्ज होने के बाद विद्यालय की स्थिति जर्जर हो रही है। देखरेख के अभाव में विद्यालय भवन का हाल भूत बंगला में तब्दील हे रही है। वहीं आंगनबाड़ी केंद्र बांका अपने निजी घर में संचालित होता है। जिला प्रशासन के निर्देश अनुसार ऐसे मर्ज खाली पड़े स्कूल भवन में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित करने का निर्देश दिया गया था । बाल विकास पदाधिकारी ने भी निजी घर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र को मर्ज के बाद खाली पड़े भवनों में चलाने का निर्देश दिया था। जिला प्रशासन के निर्देश के बावजूद भी आंगनवाड़ी केंद्र निजी घर पर ही संचालित किया जाता है।
बंद पड़ा स्कूल भवन।