80% टीनएजर इंस्टाग्राम के यूज़र, उनमें से आधे धमकियां, शर्मिंदगी, अपमान झेलते हैं

Jamtara News - जिस तरह फेसबुक पर फेक न्यूज और टि्वटर पर ट्रोलिंग की बीमारी आम है। कुछ वैसा ही हाल इंस्टाग्राम का है। सोशल मीडिया...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:35 AM IST
Nala News - users of 80 teenager instagram half of them face threats embarrassment insults
जिस तरह फेसबुक पर फेक न्यूज और टि्वटर पर ट्रोलिंग की बीमारी आम है। कुछ वैसा ही हाल इंस्टाग्राम का है। सोशल मीडिया के इस प्लेटफार्म पर लोगों को सताना या बुलीइंग करना बहुत ज्यादा प्रचलित है। अनुमान है, लगभग 80% किशोर इंस्टाग्राम पर हैं और उनमें से आधे यूज़रों को प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। यूज़रों को अपमान और हिंसा की धमकियों का सामना करना पड़ता है।

कई समस्याओं के लिए दोषी माने जा रहे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर खुद सुधार करने का दबाव बढ़ा है। इंस्टाग्राम ने स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाने की पहल की है। आधुुनिक रिपोर्टिंग टूल और मॉडरेटर की मदद से आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले अकाउंट जल्द बंद किए जाएंगे। अपमान, असम्मान और शर्मिंदा करने जैसे व्यवहार पर अंकुश लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करने की योजना है। कंपनी के प्रमुख एडम मोसेरी का कहना है, ‘हम इस लड़ाई में इंडस्ट्री का नेतृत्व करना चाहते हैं। हमारे लिए यह महत्वपूर्ण समय है’।

कई वर्ष से बुलीइंग के कारणों और प्रभावों का अध्ययन कर रहे एरिजोना यूनिवर्सिटी में काउंसलिंग प्रोफेसर शेरी बाउमन ‘इंस्टाग्राम को बुली के लिए एकमात्र जगह मानते हैं। वहां बुलीइंग करने वालों के लिए ऑडिएंस, गुमनामी और यूज़र फीड से लेकर ग्रुप चैट तक सब कुछ है’। इंस्टाग्राम की पब्लिक पॉलिसी प्रमुख करीना न्यूटन मानती हैं,‘हम प्लेटफार्म पर अधिक यूज़रों को आकर्षित करने के लिए नए फीचर लाते हैं। और हर फीचर के साथ बदसलूकी करने के नए अवसर जुड़ते हैं’।

बुलीइंग रोकने के लिए इंस्टाग्राम पर नए फीचर लाए जा रहे हैं। लेकिन, बुलीइंग के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाने से यूज़र्स के कम होने का जोखिम है। इंस्टाग्राम पर लोगों द्वारा बिताए गए हर घंटे से फेसबुक को मुनाफा होता है। कई टेक्निकल मसले भी हैं। एआई िसस्टम के लिए मशीनों को समस्याएं हल करने का तरीका सिखाना होगा।

केविन सिस्ट्राम और माइक क्रीगर (दोनों 20 वर्ष) ने 2010 में इंस्टाग्राम लॉन्च की थी। जल्द ही फोटो शेयरिंग एप पर भद्दे कॉमेंट आने लगे। शुरुआती दिनों में दोनों ने स्वयं खराब कॉमेंट डिलीट किए और ट्रोल्स पर बंदिश लगाई। जिस समय उन्होंने कंपनी छोड़ी थी, उसके एक अरब से अधिक यूज़र हो चुके थे। इंस्टाग्राम को बेहतर जगह बनाने के लिए संस्थापकों ने फेसबुक से 2016 में डीप टेक्स्ट एआई टूल लिया। यह यूज़रों की भाषा समझने के लिए डिजाइन किया गया था। उसे घृणास्पद टिप्पणियां ब्लॉक करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। 2018 में इसका उपयोग बुलीइंग खोजने के लिए होने लगा था।

आज साइट पर तीन बुलीइंग क्लासीफायर कंटेंट की स्कैनिंग करते हैं- एक क्लासीफायर को टेक्स्ट , दूसरे को फोटो और एक अन्य को वीडियो विश्लेषण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ये हर घंटे कंटेंट पहचानते हैं। कंपनी की प्रमुख इंजीनियर योएव शापिरा बताती हैं, ‘हर सप्ताह इंजीनियरों को बुलीइंग का नया तरीका देखने मिलता है जिसके बारे में इंजीनियरों ने पहले नहीं सोचा था। असरकारक एआई बनाने के लिए इंस्टाग्राम सभी तरह की बुलीइंग को समझने के लिए हजारों यूज़रों का सर्वे कर रहा है’।

महिला फुटबॉल टीम की कप्तान ने ट्रम्प के ट्वीट को पागलपन कहा

अमेरिकी राष्ट्रपति ने मेगन रेपिनो पर देश और राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया

सीन ग्रेगरी

अभी हाल में विश्व कप फुटबॉल जीतने वाली अमेरिकी महिला टीम की कप्तान मेगन रेपिनो कई कारणों से सुर्खियों में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आलोचना, राष्ट्रगान को सम्मान न देने और महिलाओं को समान अधिकार जैसे मुद्दों को लेकर उन्होंने लोगों का ध्यान खींचा है। पेश है, रेपिनो से टाइम संवाददाता की बातचीत के अंश।

विश्व कप में राष्ट्रगान के दौरान उसे गाने या अपने दिल पर हाथ रखने की परंपरा न निभाने का क्या कारण है?

- मैंने कोलिन केपरनिक के प्रति समर्थन जताने के लिए ऐसा किया है। अमेरिका में अब भी रंग, नस्ल के आधार पर तनाव है। हर कोई पहले की तरह आजाद नहीं है। (केपरनिक अमेरिका के पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी हैं। रंगभेद का विरोध करने के लिए कई मैचों में राष्ट्रगान के दौरान मैदान पर घुटनों के बल बैठते थे।)

फिर भी आप स्वयं को दिल से बहुत अधिक अमेरिकन क्यों मानती हैं?

- अमेरिका अवसरों का देश है। लेकिन, ये सबके लिए होने चाहिए। बहुत लोग इस सपने से अलग हैं। यदि आप अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठाते हैं तो आप भी उसमें शामिल हैं।

टूर्नामेंट के बीच राष्ट्रपति ट्रम्प के ट्वीट किया कि आपने देश का असम्मान किया है। क्या प्रतिक्रिया है?

- यह पागलपन है। आपने अपने चार हजार काम छोड़कर ट्वीट किया।

लेकिन, फ्रांस के खिलाफ अगले मैच में क्या ट्रम्प के ट्वीट ने आपको प्रेरित किया था?

- शायद थोड़ा बहुत। अगर ऐसे समय मुझे प्रेरणा के लिए राष्ट्रपति के ट्वीट की जरूरत पड़ती तो यह हमारे लिए बड़ी समस्या रहती। लेकिन, मैं निश्चित रूप से उसके कारण हतोत्साहित नहीं हुई थी।

अमेरिकी टीम महिला सशक्तीकरण का प्रतीक बन गई है। वर्ल्ड कप की जीत का क्या अर्थ है?

- यह वर्ल्ड कप फुटबाॅल और खेल से बढ़कर है। कई मामलों में निर्णायक मोड़ साबित होगा। इसका संबंध समान वेतन या महिलाओं के समर्थन तक सीमित नहीं है। इसका असर आने वाले वर्षों में हर जगह महसूस किया जाएगा।

एक अरब से ज्यादा यूज़र हैं इस सोशल मीडिया प्लेटफार्म के

इंस्टाग्राम के प्रमुख मोसेरी एक ब्वाय बैंड के साथ।

केटी स्टीनमेट्ज

जिस तरह फेसबुक पर फेक न्यूज और टि्वटर पर ट्रोलिंग की बीमारी आम है। कुछ वैसा ही हाल इंस्टाग्राम का है। सोशल मीडिया के इस प्लेटफार्म पर लोगों को सताना या बुलीइंग करना बहुत ज्यादा प्रचलित है। अनुमान है, लगभग 80% किशोर इंस्टाग्राम पर हैं और उनमें से आधे यूज़रों को प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। यूज़रों को अपमान और हिंसा की धमकियों का सामना करना पड़ता है।

कई समस्याओं के लिए दोषी माने जा रहे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर खुद सुधार करने का दबाव बढ़ा है। इंस्टाग्राम ने स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाने की पहल की है। आधुुनिक रिपोर्टिंग टूल और मॉडरेटर की मदद से आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले अकाउंट जल्द बंद किए जाएंगे। अपमान, असम्मान और शर्मिंदा करने जैसे व्यवहार पर अंकुश लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करने की योजना है। कंपनी के प्रमुख एडम मोसेरी का कहना है, ‘हम इस लड़ाई में इंडस्ट्री का नेतृत्व करना चाहते हैं। हमारे लिए यह महत्वपूर्ण समय है’।

कई वर्ष से बुलीइंग के कारणों और प्रभावों का अध्ययन कर रहे एरिजोना यूनिवर्सिटी में काउंसलिंग प्रोफेसर शेरी बाउमन ‘इंस्टाग्राम को बुली के लिए एकमात्र जगह मानते हैं। वहां बुलीइंग करने वालों के लिए ऑडिएंस, गुमनामी और यूज़र फीड से लेकर ग्रुप चैट तक सब कुछ है’। इंस्टाग्राम की पब्लिक पॉलिसी प्रमुख करीना न्यूटन मानती हैं,‘हम प्लेटफार्म पर अधिक यूज़रों को आकर्षित करने के लिए नए फीचर लाते हैं। और हर फीचर के साथ बदसलूकी करने के नए अवसर जुड़ते हैं’।

बुलीइंग रोकने के लिए इंस्टाग्राम पर नए फीचर लाए जा रहे हैं। लेकिन, बुलीइंग के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाने से यूज़र्स के कम होने का जोखिम है। इंस्टाग्राम पर लोगों द्वारा बिताए गए हर घंटे से फेसबुक को मुनाफा होता है। कई टेक्निकल मसले भी हैं। एआई िसस्टम के लिए मशीनों को समस्याएं हल करने का तरीका सिखाना होगा।

केविन सिस्ट्राम और माइक क्रीगर (दोनों 20 वर्ष) ने 2010 में इंस्टाग्राम लॉन्च की थी। जल्द ही फोटो शेयरिंग एप पर भद्दे कॉमेंट आने लगे। शुरुआती दिनों में दोनों ने स्वयं खराब कॉमेंट डिलीट किए और ट्रोल्स पर बंदिश लगाई। जिस समय उन्होंने कंपनी छोड़ी थी, उसके एक अरब से अधिक यूज़र हो चुके थे। इंस्टाग्राम को बेहतर जगह बनाने के लिए संस्थापकों ने फेसबुक से 2016 में डीप टेक्स्ट एआई टूल लिया। यह यूज़रों की भाषा समझने के लिए डिजाइन किया गया था। उसे घृणास्पद टिप्पणियां ब्लॉक करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। 2018 में इसका उपयोग बुलीइंग खोजने के लिए होने लगा था।

आज साइट पर तीन बुलीइंग क्लासीफायर कंटेंट की स्कैनिंग करते हैं- एक क्लासीफायर को टेक्स्ट , दूसरे को फोटो और एक अन्य को वीडियो विश्लेषण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ये हर घंटे कंटेंट पहचानते हैं। कंपनी की प्रमुख इंजीनियर योएव शापिरा बताती हैं, ‘हर सप्ताह इंजीनियरों को बुलीइंग का नया तरीका देखने मिलता है जिसके बारे में इंजीनियरों ने पहले नहीं सोचा था। असरकारक एआई बनाने के लिए इंस्टाग्राम सभी तरह की बुलीइंग को समझने के लिए हजारों यूज़रों का सर्वे कर रहा है’।

सीन ग्रेगरी

अभी हाल में विश्व कप फुटबॉल जीतने वाली अमेरिकी महिला टीम की कप्तान मेगन रेपिनो कई कारणों से सुर्खियों में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आलोचना, राष्ट्रगान को सम्मान न देने और महिलाओं को समान अधिकार जैसे मुद्दों को लेकर उन्होंने लोगों का ध्यान खींचा है। पेश है, रेपिनो से टाइम संवाददाता की बातचीत के अंश।

विश्व कप में राष्ट्रगान के दौरान उसे गाने या अपने दिल पर हाथ रखने की परंपरा न निभाने का क्या कारण है?

- मैंने कोलिन केपरनिक के प्रति समर्थन जताने के लिए ऐसा किया है। अमेरिका में अब भी रंग, नस्ल के आधार पर तनाव है। हर कोई पहले की तरह आजाद नहीं है। (केपरनिक अमेरिका के पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी हैं। रंगभेद का विरोध करने के लिए कई मैचों में राष्ट्रगान के दौरान मैदान पर घुटनों के बल बैठते थे।)

फिर भी आप स्वयं को दिल से बहुत अधिक अमेरिकन क्यों मानती हैं?

- अमेरिका अवसरों का देश है। लेकिन, ये सबके लिए होने चाहिए। बहुत लोग इस सपने से अलग हैं। यदि आप अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठाते हैं तो आप भी उसमें शामिल हैं।

टूर्नामेंट के बीच राष्ट्रपति ट्रम्प के ट्वीट किया कि आपने देश का असम्मान किया है। क्या प्रतिक्रिया है?

- यह पागलपन है। आपने अपने चार हजार काम छोड़कर ट्वीट किया।

लेकिन, फ्रांस के खिलाफ अगले मैच में क्या ट्रम्प के ट्वीट ने आपको प्रेरित किया था?

- शायद थोड़ा बहुत। अगर ऐसे समय मुझे प्रेरणा के लिए राष्ट्रपति के ट्वीट की जरूरत पड़ती तो यह हमारे लिए बड़ी समस्या रहती। लेकिन, मैं निश्चित रूप से उसके कारण हतोत्साहित नहीं हुई थी।

अमेरिकी टीम महिला सशक्तीकरण का प्रतीक बन गई है। वर्ल्ड कप की जीत का क्या अर्थ है?

- यह वर्ल्ड कप फुटबाॅल और खेल से बढ़कर है। कई मामलों में निर्णायक मोड़ साबित होगा। इसका संबंध समान वेतन या महिलाओं के समर्थन तक सीमित नहीं है। इसका असर आने वाले वर्षों में हर जगह महसूस किया जाएगा।

सीन ग्रेगरी

अभी हाल में विश्व कप फुटबॉल जीतने वाली अमेरिकी महिला टीम की कप्तान मेगन रेपिनो कई कारणों से सुर्खियों में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आलोचना, राष्ट्रगान को सम्मान न देने और महिलाओं को समान अधिकार जैसे मुद्दों को लेकर उन्होंने लोगों का ध्यान खींचा है। पेश है, रेपिनो से टाइम संवाददाता की बातचीत के अंश।

विश्व कप में राष्ट्रगान के दौरान उसे गाने या अपने दिल पर हाथ रखने की परंपरा न निभाने का क्या कारण है?

- मैंने कोलिन केपरनिक के प्रति समर्थन जताने के लिए ऐसा किया है। अमेरिका में अब भी रंग, नस्ल के आधार पर तनाव है। हर कोई पहले की तरह आजाद नहीं है। (केपरनिक अमेरिका के पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी हैं। रंगभेद का विरोध करने के लिए कई मैचों में राष्ट्रगान के दौरान मैदान पर घुटनों के बल बैठते थे।)

फिर भी आप स्वयं को दिल से बहुत अधिक अमेरिकन क्यों मानती हैं?

- अमेरिका अवसरों का देश है। लेकिन, ये सबके लिए होने चाहिए। बहुत लोग इस सपने से अलग हैं। यदि आप अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठाते हैं तो आप भी उसमें शामिल हैं।

टूर्नामेंट के बीच राष्ट्रपति ट्रम्प के ट्वीट किया कि आपने देश का असम्मान किया है। क्या प्रतिक्रिया है?

- यह पागलपन है। आपने अपने चार हजार काम छोड़कर ट्वीट किया।

लेकिन, फ्रांस के खिलाफ अगले मैच में क्या ट्रम्प के ट्वीट ने आपको प्रेरित किया था?

- शायद थोड़ा बहुत। अगर ऐसे समय मुझे प्रेरणा के लिए राष्ट्रपति के ट्वीट की जरूरत पड़ती तो यह हमारे लिए बड़ी समस्या रहती। लेकिन, मैं निश्चित रूप से उसके कारण हतोत्साहित नहीं हुई थी।

अमेरिकी टीम महिला सशक्तीकरण का प्रतीक बन गई है। वर्ल्ड कप की जीत का क्या अर्थ है?

- यह वर्ल्ड कप फुटबाॅल और खेल से बढ़कर है। कई मामलों में निर्णायक मोड़ साबित होगा। इसका संबंध समान वेतन या महिलाओं के समर्थन तक सीमित नहीं है। इसका असर आने वाले वर्षों में हर जगह महसूस किया जाएगा।

à करीब 80% टीनएजर्स इंस्टाग्राम पर हैं। आधे यूज़र्स सताए गए हैं।

à 2018 में इंस्टाग्राम ने एक अरब से अधिक यूज़र्स होने पर जश्न मनाया था।

à एडम मोसेरी मूल कंपनी फेसबुक में 10 वर्ष रहने के बाद इंस्टाग्राम के प्रमुख बने हैं।

à वर्तमान में बुलीइंग करने वालों की तीन कैटेगरी हैं-टेक्स्ट स्कैनिंग, फोटो और वीडियो।

à इंस्टाग्राम बुलीइंग की सात उप श्रेणियों को पहचानने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस बनाने पर काम कर रही है।

à हालंाकि कुछ युवा नियम तोड़ते हैं लेकिन इंस्टाग्राम ने यूज़रों की आयु 13 वर्ष और उससे ज्यादा रखी है।

केटी स्टीनमेट्ज

जिस तरह फेसबुक पर फेक न्यूज और टि्वटर पर ट्रोलिंग की बीमारी आम है। कुछ वैसा ही हाल इंस्टाग्राम का है। सोशल मीडिया के इस प्लेटफार्म पर लोगों को सताना या बुलीइंग करना बहुत ज्यादा प्रचलित है। अनुमान है, लगभग 80% किशोर इंस्टाग्राम पर हैं और उनमें से आधे यूज़रों को प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। यूज़रों को अपमान और हिंसा की धमकियों का सामना करना पड़ता है।

कई समस्याओं के लिए दोषी माने जा रहे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर खुद सुधार करने का दबाव बढ़ा है। इंस्टाग्राम ने स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाने की पहल की है। आधुुनिक रिपोर्टिंग टूल और मॉडरेटर की मदद से आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले अकाउंट जल्द बंद किए जाएंगे। अपमान, असम्मान और शर्मिंदा करने जैसे व्यवहार पर अंकुश लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करने की योजना है। कंपनी के प्रमुख एडम मोसेरी का कहना है, ‘हम इस लड़ाई में इंडस्ट्री का नेतृत्व करना चाहते हैं। हमारे लिए यह महत्वपूर्ण समय है’।

कई वर्ष से बुलीइंग के कारणों और प्रभावों का अध्ययन कर रहे एरिजोना यूनिवर्सिटी में काउंसलिंग प्रोफेसर शेरी बाउमन ‘इंस्टाग्राम को बुली के लिए एकमात्र जगह मानते हैं। वहां बुलीइंग करने वालों के लिए ऑडिएंस, गुमनामी और यूज़र फीड से लेकर ग्रुप चैट तक सब कुछ है’। इंस्टाग्राम की पब्लिक पॉलिसी प्रमुख करीना न्यूटन मानती हैं,‘हम प्लेटफार्म पर अधिक यूज़रों को आकर्षित करने के लिए नए फीचर लाते हैं। और हर फीचर के साथ बदसलूकी करने के नए अवसर जुड़ते हैं’।

बुलीइंग रोकने के लिए इंस्टाग्राम पर नए फीचर लाए जा रहे हैं। लेकिन, बुलीइंग के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाने से यूज़र्स के कम होने का जोखिम है। इंस्टाग्राम पर लोगों द्वारा बिताए गए हर घंटे से फेसबुक को मुनाफा होता है। कई टेक्निकल मसले भी हैं। एआई िसस्टम के लिए मशीनों को समस्याएं हल करने का तरीका सिखाना होगा।

केविन सिस्ट्राम और माइक क्रीगर (दोनों 20 वर्ष) ने 2010 में इंस्टाग्राम लॉन्च की थी। जल्द ही फोटो शेयरिंग एप पर भद्दे कॉमेंट आने लगे। शुरुआती दिनों में दोनों ने स्वयं खराब कॉमेंट डिलीट किए और ट्रोल्स पर बंदिश लगाई। जिस समय उन्होंने कंपनी छोड़ी थी, उसके एक अरब से अधिक यूज़र हो चुके थे। इंस्टाग्राम को बेहतर जगह बनाने के लिए संस्थापकों ने फेसबुक से 2016 में डीप टेक्स्ट एआई टूल लिया। यह यूज़रों की भाषा समझने के लिए डिजाइन किया गया था। उसे घृणास्पद टिप्पणियां ब्लॉक करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। 2018 में इसका उपयोग बुलीइंग खोजने के लिए होने लगा था।

आज साइट पर तीन बुलीइंग क्लासीफायर कंटेंट की स्कैनिंग करते हैं- एक क्लासीफायर को टेक्स्ट , दूसरे को फोटो और एक अन्य को वीडियो विश्लेषण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ये हर घंटे कंटेंट पहचानते हैं। कंपनी की प्रमुख इंजीनियर योएव शापिरा बताती हैं, ‘हर सप्ताह इंजीनियरों को बुलीइंग का नया तरीका देखने मिलता है जिसके बारे में इंजीनियरों ने पहले नहीं सोचा था। असरकारक एआई बनाने के लिए इंस्टाग्राम सभी तरह की बुलीइंग को समझने के लिए हजारों यूज़रों का सर्वे कर रहा है’।

सीन ग्रेगरी

अभी हाल में विश्व कप फुटबॉल जीतने वाली अमेरिकी महिला टीम की कप्तान मेगन रेपिनो कई कारणों से सुर्खियों में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आलोचना, राष्ट्रगान को सम्मान न देने और महिलाओं को समान अधिकार जैसे मुद्दों को लेकर उन्होंने लोगों का ध्यान खींचा है। पेश है, रेपिनो से टाइम संवाददाता की बातचीत के अंश।

विश्व कप में राष्ट्रगान के दौरान उसे गाने या अपने दिल पर हाथ रखने की परंपरा न निभाने का क्या कारण है?

- मैंने कोलिन केपरनिक के प्रति समर्थन जताने के लिए ऐसा किया है। अमेरिका में अब भी रंग, नस्ल के आधार पर तनाव है। हर कोई पहले की तरह आजाद नहीं है। (केपरनिक अमेरिका के पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी हैं। रंगभेद का विरोध करने के लिए कई मैचों में राष्ट्रगान के दौरान मैदान पर घुटनों के बल बैठते थे।)

फिर भी आप स्वयं को दिल से बहुत अधिक अमेरिकन क्यों मानती हैं?

- अमेरिका अवसरों का देश है। लेकिन, ये सबके लिए होने चाहिए। बहुत लोग इस सपने से अलग हैं। यदि आप अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठाते हैं तो आप भी उसमें शामिल हैं।

टूर्नामेंट के बीच राष्ट्रपति ट्रम्प के ट्वीट किया कि आपने देश का असम्मान किया है। क्या प्रतिक्रिया है?

- यह पागलपन है। आपने अपने चार हजार काम छोड़कर ट्वीट किया।

लेकिन, फ्रांस के खिलाफ अगले मैच में क्या ट्रम्प के ट्वीट ने आपको प्रेरित किया था?

- शायद थोड़ा बहुत। अगर ऐसे समय मुझे प्रेरणा के लिए राष्ट्रपति के ट्वीट की जरूरत पड़ती तो यह हमारे लिए बड़ी समस्या रहती। लेकिन, मैं निश्चित रूप से उसके कारण हतोत्साहित नहीं हुई थी।

अमेरिकी टीम महिला सशक्तीकरण का प्रतीक बन गई है। वर्ल्ड कप की जीत का क्या अर्थ है?

- यह वर्ल्ड कप फुटबाॅल और खेल से बढ़कर है। कई मामलों में निर्णायक मोड़ साबित होगा। इसका संबंध समान वेतन या महिलाओं के समर्थन तक सीमित नहीं है। इसका असर आने वाले वर्षों में हर जगह महसूस किया जाएगा।

केटी स्टीनमेट्ज

जिस तरह फेसबुक पर फेक न्यूज और टि्वटर पर ट्रोलिंग की बीमारी आम है। कुछ वैसा ही हाल इंस्टाग्राम का है। सोशल मीडिया के इस प्लेटफार्म पर लोगों को सताना या बुलीइंग करना बहुत ज्यादा प्रचलित है। अनुमान है, लगभग 80% किशोर इंस्टाग्राम पर हैं और उनमें से आधे यूज़रों को प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। यूज़रों को अपमान और हिंसा की धमकियों का सामना करना पड़ता है।

कई समस्याओं के लिए दोषी माने जा रहे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर खुद सुधार करने का दबाव बढ़ा है। इंस्टाग्राम ने स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाने की पहल की है। आधुुनिक रिपोर्टिंग टूल और मॉडरेटर की मदद से आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले अकाउंट जल्द बंद किए जाएंगे। अपमान, असम्मान और शर्मिंदा करने जैसे व्यवहार पर अंकुश लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करने की योजना है। कंपनी के प्रमुख एडम मोसेरी का कहना है, ‘हम इस लड़ाई में इंडस्ट्री का नेतृत्व करना चाहते हैं। हमारे लिए यह महत्वपूर्ण समय है’।

कई वर्ष से बुलीइंग के कारणों और प्रभावों का अध्ययन कर रहे एरिजोना यूनिवर्सिटी में काउंसलिंग प्रोफेसर शेरी बाउमन ‘इंस्टाग्राम को बुली के लिए एकमात्र जगह मानते हैं। वहां बुलीइंग करने वालों के लिए ऑडिएंस, गुमनामी और यूज़र फीड से लेकर ग्रुप चैट तक सब कुछ है’। इंस्टाग्राम की पब्लिक पॉलिसी प्रमुख करीना न्यूटन मानती हैं,‘हम प्लेटफार्म पर अधिक यूज़रों को आकर्षित करने के लिए नए फीचर लाते हैं। और हर फीचर के साथ बदसलूकी करने के नए अवसर जुड़ते हैं’।

बुलीइंग रोकने के लिए इंस्टाग्राम पर नए फीचर लाए जा रहे हैं। लेकिन, बुलीइंग के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाने से यूज़र्स के कम होने का जोखिम है। इंस्टाग्राम पर लोगों द्वारा बिताए गए हर घंटे से फेसबुक को मुनाफा होता है। कई टेक्निकल मसले भी हैं। एआई िसस्टम के लिए मशीनों को समस्याएं हल करने का तरीका सिखाना होगा।

केविन सिस्ट्राम और माइक क्रीगर (दोनों 20 वर्ष) ने 2010 में इंस्टाग्राम लॉन्च की थी। जल्द ही फोटो शेयरिंग एप पर भद्दे कॉमेंट आने लगे। शुरुआती दिनों में दोनों ने स्वयं खराब कॉमेंट डिलीट किए और ट्रोल्स पर बंदिश लगाई। जिस समय उन्होंने कंपनी छोड़ी थी, उसके एक अरब से अधिक यूज़र हो चुके थे। इंस्टाग्राम को बेहतर जगह बनाने के लिए संस्थापकों ने फेसबुक से 2016 में डीप टेक्स्ट एआई टूल लिया। यह यूज़रों की भाषा समझने के लिए डिजाइन किया गया था। उसे घृणास्पद टिप्पणियां ब्लॉक करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। 2018 में इसका उपयोग बुलीइंग खोजने के लिए होने लगा था।

आज साइट पर तीन बुलीइंग क्लासीफायर कंटेंट की स्कैनिंग करते हैं- एक क्लासीफायर को टेक्स्ट , दूसरे को फोटो और एक अन्य को वीडियो विश्लेषण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ये हर घंटे कंटेंट पहचानते हैं। कंपनी की प्रमुख इंजीनियर योएव शापिरा बताती हैं, ‘हर सप्ताह इंजीनियरों को बुलीइंग का नया तरीका देखने मिलता है जिसके बारे में इंजीनियरों ने पहले नहीं सोचा था। असरकारक एआई बनाने के लिए इंस्टाग्राम सभी तरह की बुलीइंग को समझने के लिए हजारों यूज़रों का सर्वे कर रहा है’।

रिसर्च: पेट के बैक्टीरिया पर सब कुछ निर्भर

एक जैसी डाइट हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं

जुड़वां लोगों तक के लिए समान आहार अनुकूल नहीं

जेमी दुचार्मे

जरूरी नहीं है कि किसी खास किस्म का आहार हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद होगा। वर्षों की रिसर्च से पता लगा है, एक जैसी डाइट लेने वाले व्यक्तियों के लिए नतीजे अलग-अलग हो सकते हैं। एक नई रिसर्च ने दर्शाया है कि दो व्यक्तियों में एक जैसे भोजन को पचाने की प्रक्रिया (मेटाबॉलिज्म) पूरी तरह भिन्न रहती है। यहां तक कि एक समान डीएनए के जुड़वां लोगों में भी ऐसा होता है। जेनेटिक ‌विशेषज्ञ टिम स्पेक्टर कहते हैं, जहां तक डाइट का मामला है, हर आहार सभी लोगों के लिए फिट नहीं है। स्पेक्टर की न्यूट्रिशन कंपनी जेडओई ने इस रिसर्च में पैसा लगाया है।

पेन स्टेट यूनिवर्सिटी में न्यूट्रिशन पर रिसर्च कर रहे प्रोफेसर जैक ह्यूवेल का कहना है, ‘एकदम सही पर्सनालाइज्ड डाइट हासिल करना बहुत कठिन है’। पर्सनालाइज्ड न्यूट्रिशन एकदम नया मामला नहीं है। इसे कंपनियों ने भुनाना शुरू कर दिया है। जीन्स, बॉयोमार्कर के आधार पर आहार की सलाह देने के लिए कंज्यूमर के टेस्ट होते हैं। पिछले दशक से फूड और जीन्स के अंतरसंबंधों की स्टडी की साइंस-न्यूट्रिजीनोमिक्स के माध्यम से उपयुक्त डाइट की तलाश हो रही है। शोधकर्ता खाने के जेनेटिक संबंधों से जुड़ी परिस्थितियों जैसे लेक्टोस से नुकसान, पाचन से जुड़ी बीमारी सीलिएक और मेटाबोलिक दोषों से आगे जाकर काम कर रहे हैं। उन्होंने मोटापे और वजन बढ़ाने, घटाने वाले खास फूड के प्रभाव के जेनेटिक संबंधों की खोज की है।

वैसे, कुछ अध्ययन न्यूट्रिजीनोमिक के निष्कर्षों पर सवाल उठाते हैं। जुड़वां बच्चों पर जेडओई की ताजा स्टडी से पता लगा है कि जीन्स से तय नहीं होता है कि किसी आहार के प्रति किसी व्यक्ति की क्या प्रतिक्रिया रहती है। इससे पहले 2018 में एक प्रमुख स्टडी में पाया गया कि जेनेटिक मार्कर नहीं बता सकते कि कौन सी डाइट किस व्यक्ति के लिए फिट है। दरअसल, जीन्स अकेले काम नहीं करते हैं। वे वातावरण से लेकर क्या आप स्मोकिंग करते हैं और आप क्या खाते हैं जैसे पहलुओं पर निर्भर करते हैं। वर्जीनिया टेक्नोलॉजी में न्यूट्रिशन के एसोसिएट प्रोफेसर डेबोराह गुड कहते हैं, दूसरे व्यक्ति की तुलना में आपके वातावरण और हालात पर निर्भर करता है कि फूड के प्रति आपकी क्या प्रतिक्रिया है। ये हालात फूड के प्रभाव में अंतर करते है। इसके अलावा पेट के बैक्टीरिया हमारे स्वास्थ्य के हर पहलू को प्रभावित करते हैं। यह प्रक्रिया मेटाबोलोमिक्स और माइक्रोबॉयोम है।

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में न्यूट्रिशन की असिस्टेंट प्रोफेसर अंगेला जिकोविक कहती हैं, चूंकि न्यूट्रिशन और अच्छे आहार की जरूरत आपके स्वास्थ्य, आयु, सक्रियता और मौसम पर निर्भर करती है इसलिए स्थायी परफेक्ट डाइट का आइडिया दूर की बात है। लोगों को स्वयं अपनी डाइट तय करनी चाहिए। इसके लिए शरीर पर अलग-अलग फूड की प्रतिक्रिया के हिसाब से निर्णय लिया जा सकता है।

सही फूड से बीमारियों का खतरा कम होता है

माइक्रोबॉयोम की रिसर्च बताती है, पेट के बैक्टीरिया को सही फूड देने से कुछ लाइलाज बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। आपका वजन कम हो सकता है। यह भी पता लगता है कि जो डाइट आपके पड़ोसी के लिए फायदेमंद है। वह आपको सुस्त और ढीला महसूस कराता है। यदि आपके पेट में अलग किस्म के बैक्टीरिया हैं तो वे उसी फूड को भिन्न तरीके से प्रोसेस करेंगे। उसकी शारीरिक प्रतिक्रिया अलग होगी। मोटे लोगों के माइक्रोबॉयोम पतले लोगों से अलग होते हैं।

जेमी दुचार्मे

जरूरी नहीं है कि किसी खास किस्म का आहार हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद होगा। वर्षों की रिसर्च से पता लगा है, एक जैसी डाइट लेने वाले व्यक्तियों के लिए नतीजे अलग-अलग हो सकते हैं। एक नई रिसर्च ने दर्शाया है कि दो व्यक्तियों में एक जैसे भोजन को पचाने की प्रक्रिया (मेटाबॉलिज्म) पूरी तरह भिन्न रहती है। यहां तक कि एक समान डीएनए के जुड़वां लोगों में भी ऐसा होता है। जेनेटिक ‌विशेषज्ञ टिम स्पेक्टर कहते हैं, जहां तक डाइट का मामला है, हर आहार सभी लोगों के लिए फिट नहीं है। स्पेक्टर की न्यूट्रिशन कंपनी जेडओई ने इस रिसर्च में पैसा लगाया है।

पेन स्टेट यूनिवर्सिटी में न्यूट्रिशन पर रिसर्च कर रहे प्रोफेसर जैक ह्यूवेल का कहना है, ‘एकदम सही पर्सनालाइज्ड डाइट हासिल करना बहुत कठिन है’। पर्सनालाइज्ड न्यूट्रिशन एकदम नया मामला नहीं है। इसे कंपनियों ने भुनाना शुरू कर दिया है। जीन्स, बॉयोमार्कर के आधार पर आहार की सलाह देने के लिए कंज्यूमर के टेस्ट होते हैं। पिछले दशक से फूड और जीन्स के अंतरसंबंधों की स्टडी की साइंस-न्यूट्रिजीनोमिक्स के माध्यम से उपयुक्त डाइट की तलाश हो रही है। शोधकर्ता खाने के जेनेटिक संबंधों से जुड़ी परिस्थितियों जैसे लेक्टोस से नुकसान, पाचन से जुड़ी बीमारी सीलिएक और मेटाबोलिक दोषों से आगे जाकर काम कर रहे हैं। उन्होंने मोटापे और वजन बढ़ाने, घटाने वाले खास फूड के प्रभाव के जेनेटिक संबंधों की खोज की है।

वैसे, कुछ अध्ययन न्यूट्रिजीनोमिक के निष्कर्षों पर सवाल उठाते हैं। जुड़वां बच्चों पर जेडओई की ताजा स्टडी से पता लगा है कि जीन्स से तय नहीं होता है कि किसी आहार के प्रति किसी व्यक्ति की क्या प्रतिक्रिया रहती है। इससे पहले 2018 में एक प्रमुख स्टडी में पाया गया कि जेनेटिक मार्कर नहीं बता सकते कि कौन सी डाइट किस व्यक्ति के लिए फिट है। दरअसल, जीन्स अकेले काम नहीं करते हैं। वे वातावरण से लेकर क्या आप स्मोकिंग करते हैं और आप क्या खाते हैं जैसे पहलुओं पर निर्भर करते हैं। वर्जीनिया टेक्नोलॉजी में न्यूट्रिशन के एसोसिएट प्रोफेसर डेबोराह गुड कहते हैं, दूसरे व्यक्ति की तुलना में आपके वातावरण और हालात पर निर्भर करता है कि फूड के प्रति आपकी क्या प्रतिक्रिया है। ये हालात फूड के प्रभाव में अंतर करते है। इसके अलावा पेट के बैक्टीरिया हमारे स्वास्थ्य के हर पहलू को प्रभावित करते हैं। यह प्रक्रिया मेटाबोलोमिक्स और माइक्रोबॉयोम है।

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में न्यूट्रिशन की असिस्टेंट प्रोफेसर अंगेला जिकोविक कहती हैं, चूंकि न्यूट्रिशन और अच्छे आहार की जरूरत आपके स्वास्थ्य, आयु, सक्रियता और मौसम पर निर्भर करती है इसलिए स्थायी परफेक्ट डाइट का आइडिया दूर की बात है। लोगों को स्वयं अपनी डाइट तय करनी चाहिए। इसके लिए शरीर पर अलग-अलग फूड की प्रतिक्रिया के हिसाब से निर्णय लिया जा सकता है।

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