जमीन रिकॉर्ड की गलत इंट्री हर 5 में 3 परिवार परेशान

Jamtara News - अपने पास सिर्फ खेती की जमीन थी...वह भी दूसरे के नाम पर दर्ज कर दी गई है...दौड़-दौड़ कर थक गया...क्या करूं...कुछ समझ में नहीं...

Dec 04, 2019, 09:20 AM IST
Karamatand News - wrong entry of land records 3 families upset every 5
अपने पास सिर्फ खेती की जमीन थी...वह भी दूसरे के नाम पर दर्ज कर दी गई है...दौड़-दौड़ कर थक गया...क्या करूं...कुछ समझ में नहीं आता। यह दर्द है बलियापुर के करमाटांड़ में रहने वाले सालखन महतो का। सिंदरी विधानसभा क्षेत्र में ऐसे 15 हजार से अधिक प्रभावित परिवार हैं। सिंदरी विस क्षेत्र के दो प्रखंंड बलियापुर व गोविंदपुर में हर पांच में तीन परिवार जमीन को लेकर परेशान हैं। 1984-85 में जमीन सर्वे के बाद 1987 में सर्वे सेटलमेंट में कुछ संशोधन हुए। बाद में राज्य सरकार ने डाटाबेस अॉनलाइन किया तो अधिकतर आंकड़ों की गलत इंट्री हो गई। सीओ अॉफिस जाने पर जवाब मिलता-सर्वे कोर्ट जाइए। गलत प्लॉट, मौजा व रकबा के इस कारण रसीद भी नहीं कट रही। यह मसला सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है। मौजूदा विधायक फूलचंद मंडल का भाजपा ने टिकट काटकर जिला 20 सूत्री उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह को मैदान में उतारा है। नाराज फूलचंद अब झामुमो प्रत्याशी हैं। मासस से पूर्व विधायक आनंद महतो फिर मैदान में हैं। इन तीनों के बीच मुख्य टक्कर बताई जा रही है।

और 4 दलों का भी जोर

भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद आजसू ने मंटू महतो काे प्रत्याशी बनाया है। वहीं झाविमो के रमेश राही, बसपा के राम प्रसाद सिंह, आप के डीएन सिंह, सपा के हफीजुद्दीन अंसारी भी मुकाबले में शामिल होने के लिए जोर लगा रहे हैं।

बदइंतजामी... झोलाछाप डॉक्टरों के भराेसे जिंदगी

बलियापुर में 4 करोड़ से बन रहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अब तक अधूरा है।

1 जमीन : डाटाबेस अॉनलाइन होने और उसमें गलत इंट्री हो गई है। इस कारण रसीद कट नहीं रही। जमीन के बदले कर्ज लेने का ऋण भी दूसरों पर दिख रहा है।

3 पलायन: खाद कारखाना के 2001 में बंद हो जाने से उससे जुड़े अप्रत्यक्ष धंधे भी बंद हो गए। इससे पलायन बढ़ गया। हालांकि, कारखाना फिर खुलने वाला है।

2014 : फूलचंद मंडल (भाजपा) 58528, आनंद महतो (मासस) 51958, मन्नू आलम (झामुमो) 43990, 2009 : फूलचंद मंडल (झाविमो) 40048, आनंद महतो (मासस) 36288, राजकिशोर महतो (भाजपा) 18793, 2005 : राजकिशोर महतो (भाजपा)41361, आनंद महतो (मासस) 34358

3 चुनावों का सक्सेस रेट

वोटर्स बोले...रोजगार के लिए युवा कर रहे पलायन


2 स्वास्थ्य: बलियापुर, गोविंदपुर में एक-एक स्वास्थ्य केंद्र हैं, पर नाकाफी हैं। डॉक्टरों नियमित बैठते नहीं। दवा भी नहीं मिलती। झोलाछाप डॉक्टरों की चांदी है।

4 सिंचाई : कृषिबहुल इस क्षेत्र में सिंचाई के साधन नहीं हैं। मानसून पर निर्भरता है। कुछ चैकडैम बनाए गए, जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए।


-जीतू डोम, बलियापुर

भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट

सपने से वोट खरीदते हैं नेता अनुमंडल इस बार भी मुद्दा

पाकुड़ सेे संतोष कुमार

महेशपुर अनुमंडल बनेगा...। यह वह सपना है, जिसे दिखा कर नेता हर चुनाव में वोट की फसल काट रहे हैं। जब चुनाव अाता है, महेशपुर को अनुमंडल बनाने की बात नेता करते हैं। लोग विश्वास कर वोट देते हैं, नेता विधायक बन उस विश्वास को तोड़ देते हैं। इसबार के चुनाव में भी हर दल के प्रत्याशी महेशपुर को अनुमंडल बनाने की घोषणा कर रहे हैं। महेशपुर विधानसभा क्षेत्र के खेतों तक पानी की सुविधा 20 साल पहले भी नहीं था अौर अाज भी नहीं। शिक्षा के लिए कॉलेज का अभाव है। बांसलोई नदी से बेतहाशा बालू उठाव से नदी के अस्तित्व पर खतरा बन गया है। चुनाव की बात करें तो यहां की जनता का मूड बदलता रहता है। बात दलों की करें तो हर बार मुकाबला का केंद्र भाजपा ही होती है। पिछले तीन चुवानों पर नजर डालें तो इस सीट को दो बार झामुमो और एक बार झाविमो ने फतह किया है। वैसे झामुमो ने स्टीफन मरांडी पर फिर विश्वास किया है। वहीं भाजपा ने मिस्त्री सोरेन और झाविमो ने शिवधन हेंब्रम पर दांव खेला है। झामुमो छोड़ आजसू में गए सुफल मरांडी इस बार सेंधमारी कर बाजी इधर-उधर कर सकते हैं।

विधानसभा क्षेत्र में महेशपुर व पाकुड़िया दो प्रखंड हैं, जो बंगाल सीमा से सटे हैं। कुल वोटर 2 लाख, 16 हजार 18 हैं। 1 लाख 7 हजार 766 पुरुष व 1 लाख 8 हजार 252 महिला वोटर हैं। इस सीट पर आदिवासी वोटर निर्णायक होते हैं।

महेशपुर
आदिवासी वोटर हैं निर्णायक

खिलवाड़... बेतहाशा बालू उठाव पर नियंत्रण नहीं

ये है बांसलोई नदी... अवैध बालू उत्खनन से पुल कमजोर होता जा रहा है।

1 अनुमंडल: अनुमंडल का दर्जा दिलाना सबसे प्रमुख मुद्दा है। पाकुड़िया से पाकुड़ की अत्यधिक दूरी होने से यहां के लोगों को कुछ भी काम कराने में काफी परेशानी होती है।

3शिक्षा : महिला काॅलेज नहीं होने से छात्राओं को पढ़ाई के लिए दुमका या पाकुड़ जाना पड़ता है। ज्यादातर लड़कियां तो मैट्रिक-इंटर के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं।

2014 : स्टीफन मरांडी, जेएमएम-51886, देवीधन टूडू, भाजपा-45710, मिस्त्री सोरेन, जेवीएम-31276, 2009 : मिस्त्री सोरेन, जेवीएम-50746, देवीधन टूडू, भाजपा-28772, दुर्गा मरांडी, टीएमसी-15840, 2005 : सुफल मरांडी, जेएमएम-45520, देवीधन टूडू, भाजपा-32704

3 चुनावों का सक्सेस रेट

वोटर्स बोले...इस बार मुकाबला अच्छा होगा


2सिंचाई : कृषि प्रधान बहुल इलाका होने के बावजूद यहां सिंचाई की व्यवस्था नहीं है। अधिकतर किसान केवल धान की खेती पर ही निर्भर हैं।

4स्वास्थ्य : महेशपुर, पाकुड़िया में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं होने से लोग बंगाल जाकर इलाज कराते हंै। पाकुड़िया में 50 बेड का अस्पताल 10 साल में भी नहीं बन सका।


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