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जर्जर रसोई घर में एमडीएम का खाना बना रही है रसोईया, स्कूल भवन की दीवार भी हुई क्रेक

रसोई घर में छत पर खंभा लगाकर खाना बनाती रसोइया। विपिन मुखर्जी

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 08, 2018, 02:50 AM IST

रसोई घर में छत पर खंभा लगाकर खाना बनाती रसोइया।

विपिन मुखर्जी जैनामोड़

एक तरफ सरकार स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, वहीं कसमार प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय पुरनी बगियारी के सरकारी स्कूल में छत पर खंभा लगाकर रसोइया मध्याह्न भोजन बनाती है। स्कूल भवन में भी दरार आ गई है। स्कूल परिसर का चापानल पिछले एक महीने से बंद होने से बच्चे पीने के पानी के लिए भी परेशान रहते हैं। रसोइया स्कूल से एक किलोमीटर दूर के चापाकल से पानी लाकर एमडीएम बनाती है। बच्चों को हर दिन भोजन मिले, इसलिए अपना जान भी जोखिम में डालकर काम करती है।

रसोई घर की हालत ऐसी है कि देखते ही किसी को भी डर लगने लगेगा। खंभा लगाकर छत को टिकाया गया है। लेकिन स्कूल प्रबंधन इसे दुरुस्त नहीं करवा रहा है। स्कूल के बच्चे पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। लेकिन चापानल की मरम्मत नहीं कराई जा रही है। इसके कारण बच्चों की संख्या दिनों दिन घट रही है। अिधकारी ध्यान नहीं दे रहे है।

इस तरह दीवारों में आ रही है दरार

स्कूल के दीवार में आई दरार लाल घेरे में।

2009 में बना स्कूल भवन एवं रसोईघर 5 साल में ही हो गया जर्जर

2009 में पांच लाख की लागत से स्कूल का भवन बना। उसी समय लगभग 86,000 रुपए की लागत से स्कूल परिसर पर एमडीएम बनाने के लिए रसोईघर भी बनाया गया। रसोईघर जैसे-तैसे बनाया गया। चारों तरफ दीवार बनाकर उसके ऊपर एसबेस्टस डालकर छोड़ दिया गया, जिसके कारण अब यह रसोईघर जानलेवा बना हुआ है। उस समय स्कूल के बच्चों के हित का ख्याल न रखकर जैसे-तैसे भवन बनवा दिया। नतीजतन चार-पांच साल बाद ही स्कूल के भवन में दरारे आने लगीं। दीवारों में आधा दर्जन से ज्यादा जगहों पर दरार आ चुकी है। रसोइया नियोति बाला झा ने कहा कि पिछले 3 वर्षों से जर्जर भवन में खाना बना रही हूं। स्कूल के एक शिक्षक ने नाम नहीं छापने के आग्रह पर कहा कि जब स्कूल का भवन बन रहा था, उस वक्त ढलाई के समय तेज बारिश हुई थी, इसके कारण भवन की ढलाई ही कमजोर हो गई।

10 वर्षों में आधी रह गई बच्चों की संख्या

स्कूल के प्रधानाध्यापक के अनुसार 2005 में इस स्कूल में लगभग 50 छात्र-छात्राएं पढ़ते थे, इन दिनों घटकर आधा से भी कम हो गए। अभिभावकों के मुताबिक हर दिन 10 से 15 बच्चे ही आते हैं, जबकि स्कूल में कुल 27 बच्चे नामांकित हैं। अभिभावक कह रहे हैं कि स्कूल में मौजूद अव्यवस्था एवं लापरवाही के चलते इस स्कूल से अभिभावकों एवं बच्चों का विश्वास उठता जा रहा है। गांव के लोगों की मानें तो स्कूल में शिक्षा देने के नाम पर खानापूर्ति हो रही है।

जांच के बाद प्रधानाध्यापक को शोकॉज करूंगी

स्कूल को विद्यालय विकास अनुदान राशि 5 हजार रुपए सालाना दी जाती है। इसके बावजूद अगर स्कूल भवन या रसोईघर की मरम्मत नहीं करवाई जाती है, तो यह जांच का विषय है। जांचोपरांत कार्रवाई की जाएगी। स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक एवं स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष को शोकॉज करूंगी। 

पुष्पा कुमारी, प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, कसमार

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