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कसमार प्रखंड के सभी मुखिया ने ग्राम विकास समिति के विरोध में लगे प्रशिक्षण शिविर का किया बहिष्कार

राज्य सरकार के निर्देश पर प्रत्येक गांव में आदिवासी ग्राम विकास समिति एवं ग्राम विकास समिति गठन को लेकर शनिवार को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 08, 2018, 02:45 AM IST

कसमार प्रखंड के सभी मुखिया ने ग्राम विकास समिति के विरोध में लगे प्रशिक्षण शिविर का किया बहिष्कार
राज्य सरकार के निर्देश पर प्रत्येक गांव में आदिवासी ग्राम विकास समिति एवं ग्राम विकास समिति गठन को लेकर शनिवार को कसमार प्रखंड मुख्यालय में प्रशिक्षण शिविर लगाया गया था। इसमें प्रखंड की सभी पंचायतों के मुखिया को भी बुलाया गया था। लेकिन, मुखियाओं ने शिविर का बहिष्कार करते हुए प्रखंड कार्यालय के गेट पर प्रदर्शन किया। सरकार के विरोध में नारेबाजी भी की। बगदा मुखिया विष्णु चरण महतो, कसमार मुखिया अनुराधा चौबे एवं खैराचातर मुखिया प्रतिमा देवी जायसवाल ने कहा कि ग्राम पंचायतों में पंचायत प्रतिनिधियों की शक्ति व अधिकारों का हनन व कमजोर करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा ग्राम पंचायत कार्यकारिणी समिति के समानांतर प्रत्येक गांवों में ग्राम विकास समिति का गठन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास के लिए त्रिस्तरीय पंचायत समिति के तहत गठित ग्राम पंचायत समक्ष है बावजूद इसके सरकार द्वारा पांच लाख राशि से कम की योजनाओं का कार्यान्वयन करने हेतु ग्राम विकास समिति का गठन करना पंचायत प्रतिनिधियों के साथ सौतेला व्यवहार हैं। इसे पंचायत प्रतिनिधि कभी सफल होने नहीं देंगे। विरोध प्रदर्शन करने वालों में मुखिया पटेल राम महतो, दुलाल मुंडा, मालती देवी, मंजूबाला देवी, वीणा देवी, बबीता देवी, सरिता देवी, जब्बार अंसारी, हारू रजवार, कपिल कुमार चौबे, उपेंद्र नाथ करमाली आदि शामिल हैं।

कसमार प्रखंड मुख्यालय में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में बीडीओ व अन्य।

हर गांव में गठित होगी ग्राम विकास समिति : बीडीओ

इधर, शिविर में बीडीओ कीकू महतो ने कहा कि गांवों के सर्वांगीण विकास में जन सहभागिता को सुनिश्चित करने के प्रखंड के प्रत्येक गांव में ग्राम विकास समिति का गठन किया जाएगा। 50 प्रतिशत से अधिक आदिवासी आबादी वाले गांवों आदिवासी ग्राम विकास समिति व 50 प्रतिशत से कम संख्या वाले गांवों में ग्राम विकास समिति का गठन किया जाना है। अध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित है। संबंधित मुखिया समिति के विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे। उन्होंने कहा कि समिति गठन करने वाले स्वयं सेवकों को प्रोत्साहन के रूप में 1000 हजार रुपए मानदेय दिए जाएंगे। एेसे गांवों में छोटी-छोटी कच्ची योजनाएं जैसी चेकडैम, नाली, तालाब, डोभा, सड़क आदि पांच लाख से कम लागत की योजनाओं का कार्यान्वयन बीडीओ की देखरेख में समिति के माध्यम से किया जाएगा। मौके पर प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी जितेंद्र भगत, प्रखंड पंचायती राज समन्वयक अनुज कुमार, सभी पंचायत सेवक, जन सेवक, पर्यवेक्षक, स्वयंसेवक समेत अन्य कर्मी मौजूद थे।

लोगों की सहभागिता से बनेगी आदिवासी विकास व ग्राम विकास समिति

ग्रामीण खुद करेंगे गांव का विकास, पांच लाख तक की योजनाओं पर होगा काम

सिटी रिपोर्टर,बोकारो।

अब गांव की जनता अपने क्षेत्र का विकास खुद करेगी। इसके लिए सरकार मॉडल इस्टीमेट के तहत गांव की समिति के माध्यम से योजना तैयार कर काम कराएगी। समिति कच्ची सड़क, डोभा निर्माण जैसी पांच लाख रुपए तक की लागत वाली योजनाओं का काम कराएगी। बोकाराे जिले में इसकी शुरुआत हो गई है। जिला प्रशासन ने प्रखंड स्तर पर समिति गठन का निर्देश दिया है। ग्रामीण विकास विभाग में सभी लोगों की सहभागिता के लिए प्रत्येक गांव में आदिवासी विकास समिति और ग्राम विकास समिति का गठन किया जाएगा। समिति का गठन की प्रक्रिया नौ से 30 अप्रैल तक चलेगी। इसमें 18 से 35 वर्ष के युवाओं को सचिव के रूप में चयनित किया जाएगा। चास प्रखंड में समिति चयन के लिए पर्यवेक्षक की नियुक्ति कर दी गई है। पर्यवेक्षक 100 परिवार वाले गांवों में नौ सदस्यीय समिति का गठन करेंगे। 100 से अधिक परिवार रहने पर वैसे गांवों में 11 सदस्यीय समिति का गठन होगा। समिति का कार्यकाल दो साल का होगा। प्रखंड स्तर पर बीडीओ इसके नियंत्री पदाधिकारी होंगे।

आबादी 50% से अधिक हाेने पर आदिवासी विकास समिति का गठन

एक राजस्व गांव में 50% से अधिक आदिवासी परिवार होने पर आदिवासी विकास समिति का गठन किया जाएगा। 100 से अधिक परिवार रहने पर एसटी से अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष होंगे।

50% से कम आदिवासी के लिए ग्राम विकास समिति

एक राजस्व गांव में 50% से कम आदिवासी परिवार के लिए ग्राम विकास समिति का गठन किया जाएगा। इसमें भी 100 से अधिक परिवार रहने पर महिला तीन, एसटी दो, एससी दो, अन्य चार सदस्य होंगे। जबकि महिला अध्यक्ष होंगी। 100 से कम परिवार रहने पर महिला दो, एसटी दो, एससी दो, अन्य तीन सदस्य होंगे। इसमें अध्यक्ष पद महिला का होगा। इन राजस्व गांवों में एसटी नहीं होने पर एससी को प्राथमिकता दी जाएगी। एससी और एसटी नहीं रहने पर अन्य समुदाय के लोगों को मौका दिया जाएगा।

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