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एक दमकल पर है जिले की आपदा प्रबंधन जिम्मेदारी

गर्मी का मौसम आते ही जिले में अगलगी की घटनाओं में इजाफा होने लगती है। वहीं अगलगी जैसे आपदा पर नियंत्रण को लेकर लेकर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 31, 2018, 03:05 AM IST

गर्मी का मौसम आते ही जिले में अगलगी की घटनाओं में इजाफा होने लगती है। वहीं अगलगी जैसे आपदा पर नियंत्रण को लेकर लेकर मात्र एक दमकल वाहन उपलब्ध है। जिसके ऊपर जिले के कुल छह प्रखंडों में अगलगी और अन्य आपदा पर काबू पाने का दारोमदार निर्भर है। बताते चलें कि विभाग के पास पूर्व में उपलब्ध कराए गए दो दमकल वाहन में एक वाहन महीनों से दुर्घटना ग्रस्त होकर खराब हालत में कैंपस में पड़ा है। इसके अलावा जिला स्तर पर बागीटांड़ के पास संचालित अग्निशामक केंद्र में कर्मियों की घोर कमी है। कुल 16 कर्मियों के पदों के विरुद्ध वर्तमान में मात्र 4 कर्मी ही कार्यरत है। उल्लेखनीय है कि जिले में 2005 में अग्निशामक केंद्र की स्थापना के बाद जिले को एक दमकल वाहन उपलब्ध कराया गया था। इसके बाद रासायनिक व गैस से लगी आग पर काबू पाने के लिए एक छोटी वाहन उपलब्ध कराई गई थी। इसके बाद 2013 में जिले को एक और दमकल वाहन उपलब्ध कराए गये थे। इसके अलावा केंद्र पर कई साल बाद भी अबतक वाहनों में पानी भरने के लिए बाेरिंग की अधिष्ठापित नहीं किया गया है।जिसके कारण वाहनों में पानी भरने के लिए जिले के चाराडीह सहित अन्य तालाबों पर ले जाना पड़ता है।

जिले में औसतन प्रति साल एक सौ अधिक अगलगी की घटनाएं होती रही है। इसके अलावा प्रखंड स्तर पर वाहनों की उपलब्धता नहीं रहने के कारण जिले से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी सतगांवा प्रखंड के अलावा मरकच्चो, जयनगर सहित दूरदराज के प्रखंडों में वाहन को पहुंचने में दो से डेढ़ घंटे लगते है।

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