गिद्धौर : झरना गांव जाने के लिए नहीं है रास्ता, बरसात में बन जाता है टापू

Kodarma News - प्रखंड स्थित बारियातु पंचायत के बाय गांव के झरना टोला के लोग आज भी कई समस्याओं से जूझ रहे है। यहां के लोगों को गांव...

Dec 04, 2019, 08:51 AM IST
Gidhaur News - gidhaur waterfall is not the way to go to the village it becomes an island in the rainy season
प्रखंड स्थित बारियातु पंचायत के बाय गांव के झरना टोला के लोग आज भी कई समस्याओं से जूझ रहे है। यहां के लोगों को गांव तक जाने के लिए सड़क तक नही है। बरसात के दिनों में यह टोला पूरी तरह से टापू बन जाती है।सड़क होने से झरना टोला चतरा-हजारीबाग पक्की सड़क तथा राजस्व बाय गांव तक सीधे जुड़ जाती। ग्रामीणों के मुताबिक झरना टोला को जोड़ने के लिये मनरेगा योजना से सड़क तो बनाई गई है। परंतु टोला के समीप से गुजरने वाली खोटाही नाला पर पुल नहीं होने के कारण सड़क का कोई महत्व नही है। ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से पंचायत के मुखिया के साथ-साथ अन्य लोगों को नदी में पुल बनाने की मांग की गई है। लेकिन किसी ने अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया है। यहां रहने वाले लोगों की जीविका का मुख्य साधन खेती-बारी है। परंतु सिचाई के अभाव में लोग बेबस है। ऐसे में ग्रामीण पास से गुजरने वाली मुहाने नदी से पाइप के सहारे अपने खेतों तक पानी लाकर सिंचाई का काम करते है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां बैसाख तथा जेठ के महीने में नदी पूरी तरह से सूख जाती है। जिस कारण दो महीने यहां खेती बारी भी नहीं हो पाती है। यहां नकुल दांगी तथा जागेश्वर महतो को सरकारी कूप दिये गये थे।उसमें भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नही है।लोगो को पीने के लिये गांव में अब तक एक भी सरकारी चापानल नही लगाये गये है। ऐसे में कई लोग निजी खर्च से बोरिंग करा कर पेयजल की समस्या से निजात पा रहे है। ग्रामीणों ने बताया कि झरना टोला में अब तक विद्युतीकरण का कार्य भी नही किया गया है। जबकि यहां 15 से 20 घर के लोग रहते है। शिक्षा के नाम पर यहां सर्व शिक्षा अभियान के तहत पांचवीं कक्षा तक विद्यालय खुले थे, उसे भी मर्ज कर दिया गया। अब यहां के बच्चों को पांचवीं तक कि शिक्षा के लिये बाय जाना पड़ता है। स्वास्थ्य का भी वही हाल है। ग्रामीणों ने बताया कि झरना टोला में कोई नेता,अफसर तथा सरकारी कर्मी नही पहुंचते है। जिससे यहां के लोगो की समस्या वर्षों से यथावत बनी है।बताया गया कि उक्त टोले के लोग यहां 32 वर्ष से रहते आ रहे है।1987 में रूपलाल दांगी, तालो महतो, लाटो महतो, विशेश्वर महतो, शुकर उरांव, रामचंद्र महतो, दुलार महतो तथा दिलीप उरांव आदि ने गिद्धौर के इन्द्रा, बाय, कटकमसांडी के दूधमटिया,चौपारण के नीमा, दादपुर तथा इटखोरी के शहरजाम से आकर लोग बसे है।

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