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पत्थलगड़ा में भीषण बारिश, पक्षी मरे, ईंट व्यवसाय चौपट
बीती रात से हो रही मूसलाधार बारिश कहर बन कर आई है। किसानों की फसल चौपट हो गई और खेत खलिहान डूब गये है। पत्थलगडा के सीमावर्ती गांवों व सिमरिया के पूर्वी इलाके में ओले पढ़ने से गरमा फसल नष्ट हो गये। पत्थर की मार टमाटर, लौकी, तरबूज, प्याज, सरसों, चना, खीरा, अरहर व अन्य फसल झेल नहीं पाये। खेतों में लगे अधिकांश फसल नष्ट हो गये। गेहूं का फसल भी प्रभावित हुआ है। नावाडीह में ओले गिरने से प्याज व हरे साग सब्जियों की खेती नष्ट हुई है। पत्थर से प्याज के पत्ते टूट कर गिर गए हैं। कई गांवों में काटकर खलिहान में रखे सरसों, चना, मूंग व राहर पानी में डूब गये हैं। रात्रि से लगातार हो रही बारिश से ग्रामीण तैयार फसल को नहीं बचा पाए।
निरीह पक्षियों पर टूटा कहर : बेमौसम झमाझम बारिश, तेज हवा व बड़े बड़े ओले निरीह पक्षियों पर कहर बन कर टूटा। तलसा, पीरी, अमगांवा, बिरहू, चोपे, मेराल व अन्य गांवों में सैकड़ों पक्षियों की मौत हो गई। ओले की चपेट में आने से वे पेड़ में ही दम तोड़ दिए। सुबह ग्रामीणों को पेड़ों के नीचे भारी संख्या में मृत पक्षी मिले। उनके घोसले हवा में उड़ गए।
मौसम का कहर महुआ, आम, कटहल और मुनगा पर भी दिखा। ओला, तेज हवाओं व भारी बारिश से इनके फल व फूल को व्यापक नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों में कटहल के मोची टूटकर गिर गये तो अधिकांश स्थानों में आम के बौर व मंजर उड़ गये। मुनगा से फूल भी गिर गये हैं। बेमौसम बारिश से ग्रामीण आजीविका के सबसे बड़े स्रोत महुआ को खोंचों को भी नुकसान हुआ है। होली के बाद महुआ के फूल गिरने का समय था। ऐसे में पत्थर व पानी से इसके उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है।
एक पखवारे से खराब मौसम और बीती रात से हो रहे भीषण बारिश से ईंट व्यवसाय लगभग चौपट हो गया है। कच्चे ईंट धुल गये हैं। भट्ठों में भी पानी घुस गया है। दुंबी, बरवाडीह, सिंघानी, लेंबोईया, नोनगांव, खैरा, नावाडीह व अन्य गांवों में दर्जनों युवा ईंट का व्यवसाय करते हैं। खराब मौसम व बारिश से उन्हें 30 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।बारिश का पानी उत्क्रमित उच्च विद्यालय नावाडीह में घुस गया। समूचा मैदान व पार्क में पानी घुसने के बाद नाली काटकर पानी निकासी की गई। दोपहर तक लगातार पानी गिरने से की विद्यालय समय पर नहीं खुले। वहीं कई विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति नगण्य रही। चौक चौराहों में भी दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। कई सवारी गाड़ियां स्टैंड तक नहीं पहुंची।
कई कच्चे मकान गिरे : बारिश से पत्थलगडा में कई कच्चे मकान गिर गये। ग्राम दुंबी में सुरजी देवी का खपरैल भी क्षतिग्रस्त हो गया व बारिश का पानी घर में घुस गया। चैत माह में पत्थलगड़ा में सावन भादो सा नजारा दिखा। सुखी नदियों में जान आ गई। बाढ़ आने से की गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से कट गया। भुराही नदी में पुल नहीं रहने से उग्रवाद प्रभावित तपसा, गेंडवा, उरूब हांडे, टेटुआतरी व अन्य गांवों का संपर्क पत्थलगडा प्रखंड मुख्यालय से कट गया।
बकुलिया नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है।