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कोर्ट के आदेश पर गेस्ट लेक्चरर को काम से रोकने पर विभावि में प्रदर्शन

Dainik Bhaskar

Apr 10, 2018, 02:35 AM IST

Kodarma News - विनोबा भावे विश्वविद्यालय के अंगीभूत कॉलेजों में कार्यरत गेस्ट लेक्चरर ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय मुख्यालय...

कोर्ट के आदेश पर गेस्ट लेक्चरर को काम से रोकने पर विभावि में प्रदर्शन
विनोबा भावे विश्वविद्यालय के अंगीभूत कॉलेजों में कार्यरत गेस्ट लेक्चरर ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय मुख्यालय में धरना प्रदर्शन किया। विभावि ने 141 गेस्ट लेक्चरर को 24 फरवरी से कार्य करने से रोक दिया था। हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए विभावि के कॉलेजों में कार्यरत गेस्ट लेक्चरर के कार्य करने पर रोक लगा दिया था। इसी को लेकर विश्वविद्यालय ने सभी को कार्य से रोक दिया।

मामला कोर्ट में चल रहा है। प्रदर्शन करने हजारीबाग, चतरा, बोकारो गिरिडीह, रामगढ़, कोडरमा से आए लेक्चरर का कहना था कि कोर्ट ने पूर्व से कार्यरत व्याख्याताओं के कार्य करने पर रोक लगाते हुए छ: सप्ताह के भीतर अपना पक्ष दाखिल करने के लिए कहा था।

लेक्चरर का आरोप है कि विश्वविद्यालय इस मामले में अपने अधिवक्ता के जरिये काउंटर एफिडेविट दायर करने में जानबूझकर विलंब कर रहा है। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि रोक लगने के बाद हमलोगों ने वीसी और रजिस्ट्रार से मिलकर मामले का हल निकालने की मांग किया था। हर बार हमें आश्वस्त किया गया कि काउंटर एफिडेविट दायर करने के लिए अधिवक्ता को कहा गया है।

गिरिडीह कॉलेज गिरिडीह के दर्शनशास्त्र विभाग में कुमार मधुसूदन पूर्व कुलपति गुरदीप सिंह के समय से बतौर गेस्ट लेक्चरर कार्यरत थे। डॉ. रमेश शरण के आने के बाद कॉलेजों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए अनुबंध पर शिक्षकों की नियुक्ति का विज्ञापन निकला। मैट्रिक से पीजी, पीएचडी में प्राप्त अंक और इंटरव्यू के आधार पर अनुबंधित व्याख्याताओं की नियुक्ति की गई। इसी के बाद गिरिडीह कॉलेज के प्राचार्य ने पूर्व से कार्यरत गेस्ट लेक्चरर कुमार मधुसूदन को पढ़ाने से रोक दिया। मधुसूदन ने इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मधुसूदन को पूर्व की तरह कार्य करने और अन्य की नियुक्ति, कार्य करने पर रोक लगा दिया।

इसी मामले में विभावि को इस आशय का एफिडेविट दायर करना था कि प्राचार्य को पूर्व से कार्यरत किसी लेक्चरर को निकालने का निर्देश नहीं दिया गया था। उल्लेखनीय है पूर्व वीसी डाॅ. गुरदीप सिंह के कार्यकाल में प्राचार्य से फॉरवर्ड कराकर आवेदन लानेवाले पीएचडी योग्यताधारी युवाओं को पढ़ाने की अनुमति वीसी ने बिना किसी परीक्षा, इंटरव्यू के दी थी। अब इस मामले विश्वविद्यालय यह बता पाने की स्थिति में नहीं है कि पूर्व से कार्यरत गेस्ट लेक्चरर की नियुक्ति के लिए कोई विहित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी। इधर इस मामले में प्रदर्शनकारियों की ओर से भी कोर्ट में मामला दर्ज कराया गया है।

प्रदर्शन कर रहे लेक्चरर के प्रतिनिधिमंडल को वीसी डॉ. रमेश शरण ने आश्वस्त किया कि इस मामले में विश्वविद्यालय ने अपने अधिवक्ता को अधिकृत किया है। अधिवक्ता को सभी तथ्यों से अवगत करा दिया गया है। प्रदर्शनकारियों में मुख्य रूप से डॉ प्रभाकर कुमार, रोशन कुमार, रविंद्र मिश्रा, डॉ. सौरभ, ममता कुमारी, विनीता सहित अन्य शामिल थे।

विभावि पर मामले को टालने का आरोप

प्रदर्शन करते विनोबा भावे विश्वविद्यालय के अंगीभूत कॉलेजों में कार्यरत गेस्ट लेक्चरर।

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