जंगल और पहाड़ों के बीच बने दुर्गम रास्ते से स्वास्थ्य केंद्र अाते हैं टेपरा गांव के लाेग

Kodarma News - गांव जाने का दुर्गम रास्ता। अयूब खान | मरकच्चो प्रखंड के डगरनवा पंचायत का सुदूरवर्ती गांव टेपरा मूलभूत...

Dec 04, 2019, 09:25 AM IST
Kodarma News - the health center comes from the inaccessible path between the forest and the mountains
गांव जाने का दुर्गम रास्ता।

अयूब खान | मरकच्चो

प्रखंड के डगरनवा पंचायत का सुदूरवर्ती गांव टेपरा मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। गांव तक आने-जाने के लिए कोई सड़क नहीं है। बरसात के दिनो में नदियों से घिरे उक्त गांव के लोगों को गांव से बाहर आने-जाने के लिए सोचना पड़ता है। आलम यह है कि साइकिल अाैर मोटरसाइकिल तक अभी भी दूसरे गांव में रखकर अपने गांव जाने के लिए लोग मजबूर हैं। टेपरा गांव रेवेन्यू विलेज होने के बावजूद भी यहां के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। इस गांव में आने जाने के लिए लोगों को टेपरा नदी पार करना पड़ता है। इसमें सालों भर पानी रहता है। नदी में पुल नहीं होने के कारण खासकर बरसात के महीने में जब नदी में पानी भर जाता है, तो लोग गांव से बाहर नहीं निकल पाते हैं। इनके समक्ष समस्या तब और गंभीर हो जाता है, जब बीमार लोगो को खटिया पर लादकर नदी पार कराना पड़ता है। वहीं गांव में स्वास्थ्य सुविधा नहीं है। अगर है तो करीब 10 किलोमीटर दूर ग्राम कटियो में है। स्वास्थ्य केंद्र तक आने के लिए जंगल व पहाड़ों के बीच बने दुर्गम रास्ते का सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीण सुगनी देवी, रश्मि देवी, अंजली देवी, रुबिया देवी, बुधनी देवी, मालो देवी, हेमियाना देवी आदि ने बताया कि हर बार चुनाव के समय नेता दूसरे गांव में आते है, लेकिन टेपरा गांव में रास्ता नहीं होने के कारण यहां नहीं पहुंच पाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में आने जाने के लिए रास्ता नहीं रहने के कारण लोग बाइक तक गांव में नहीं ले जा पाते। बरसात के मौसम में यदि किसी के घर में अचानक तबीयत खराब हो जाए, तो उसको इलाज के लिए ले जाना सबसे बड़ा समस्या उत्पन्न हो जाता है।

किसी भी महिला का संस्थागत प्रसव नहीं हो पाया है

सहिया दीदी रश्मि देवी ने बताया कि महीनों बाद कभी-कभी गांव में स्वास्थ्य सुविधा मिलती है। गांव की सहिया दीदी ने बताया कि आज तक टेपरा गांव के किसी भी महिला का संस्थागत प्रसव नहीं हो पाया है। ग्रामीण महिलाओं के सहयोग से गांव में ही प्रसव कराया जाता है या जबकि सरकार का सीधा निर्देश है कि संस्थागत प्रसव कराना है। सहिया दीदी ने बताया कि टेपरा के बच्चों का टीकाकरण भी समय पर नहीं हो पाता है। क्योंकि गांव में आने जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। सरकार के निर्देश के अनुसार हर माह के तीसरे सप्ताह में क्लस्टर आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों का टीकाकरण, पोषाहार का वितरण एवं गर्भवती महिलाओं की जांच सुनिश्चित कराना है।

गांव के बीच से गुजरी नदी।

5 किमी पैदल चलकर वोट देने जाते है ग्रामीण

टेपरा गांव कोडरमा-गिरिडीह सीमा अंतर्गत घने जंगलों के बीच बसा है। इस गांव में अभी तक किसी सांसद व विधायक का अागमन नहीं हुअा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है भी है कि किसी भी दल के जनप्रतिनिधियों ने भी उक्त गांव के जन समस्याओं के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई है। ग्रामीण पथरीली व दुर्गम रास्ते पर करीब 5 किलोमीटर पैदल चलकर वोट देने वन मुरहा गांव पहुंचते हैं।

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