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दावा : शिक्षा में जिला बनेगा मॉडल, 15 अगस्त तक सभी स्कूलों में बिजली, पानी और शौचालय

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव अमरेंद्र प्रताप सिंह बुधवार को रामगढ़ पहुंचे। उनके साथ प्राथमिक...

Danik Bhaskar | Jul 12, 2018, 03:00 AM IST
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव अमरेंद्र प्रताप सिंह बुधवार को रामगढ़ पहुंचे। उनके साथ प्राथमिक शिक्षा निदेशक आकांक्षा रंजन भी थी। अधिकारियों ने समाहरणालय में डीसी सहित शिक्षा विभाग के वरीय पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में प्रधान सचिव ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में रामगढ़ को मॉडल जिला बनाना है। इसके लिए शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करनी होगी ताकि अन्य जिले रामगढ़ से प्रेरणा ले सकें। सभी सरकारी स्कूलों में 15 अगस्त तक हर-हाल में बिजली, पानी और शौचालय बनाने का निर्देश दिया। ऐसा नहीं करने पर संबंधित पदाधिकारी और स्कूल प्रधान पर कार्रवाई की बात कही। इसके अलावा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर दिया।

इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करने की बात कही। ज्ञान सेतु कार्यक्रम से सभी विद्यालय को जोड़ने का निर्देश दिया। मौके पर डीसी राजेश्वरी बी, डीईओ मीना राय, डीएसई अनिल कुमार चौधरी, एडीपीओ कृष्णा सिंह, एपीओ हरि उरांव, बीईईओ विमलकांत झा, राजेंद्र तिवारी, विजय कुमार, जोहानी टोप्पो, सुलोचना कुमारी, जुनास टोप्पो सहित सभी बीईईओ, बीआरपी, सीआरपी, वार्डन आदि मौजूद थे।

गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने में लापरवाह स्कूलों पर होगी कार्रवाई

बैठक में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता प्रधान सचिव, प्राथमिक शिक्षा निदेशक व डीसी।

प्रधान सचिव के रुकने तक अलर्ट रहे सभी स्कूल

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग प्रधान सचिव अमरेंद्र प्रताप सिंह के रामगढ़ आने की खबर अहले सुबह सभी स्कूलों को हो गई थी। प्रधान सचिव के संभावित दौरे को लेकर सभी स्कूल अलर्ट पर थे। खास कर शहर में स्थित स्कूल की सांसें प्रधान सचिव के रांची वापस लौटने तक अटकी रही। न जाने कब प्रधान सचिव कहां आ धमके। इस बीच किसी भी प्रकार की लापरवाही स्कूल प्रधान को सीधे रुप से भारी पड़ सकती थी। इसे देखते हुए स्कूलों के प्रधानाध्यापक सचिव के गतिविधियों की जानकारी अपने परिचितों से ले रहे थे।

स्कूलों में दिखी चकाचक व्यवस्था

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग प्रधान सचिव के संभावित दौरे को लेकर शहर के गांधी स्मारक प्लस-2 उच्च विद्यालय, एसएस बालिका उच्च विद्यालय, कैथा, कोठार, छत्तरमांडू आदि स्कूलों में व्यवस्था दुरुस्त दिखी। आमदिनों की अपेक्षा सभी प्रधानाध्यापक, शिक्षक ससमय स्कूल पहुंचे। साथ ही स्कूल परिसर सहित शौचालय, यूरिनल की सफाई की गई थी। वहीं टंकी में पानी भी लबालब था। शिक्षक भी अपने-अपने कक्षा में देखे गए।

शिक्षा के अधिकार का पालन करें निजी विद्यालय प्रबंधन

निजी विद्यालय के संचालकों संग अलग से बैठक की गई। इस दौरान सभी को शिक्षा के अधिकार अधिनियम का पालन करने की बात कही। कहा कि सभी विद्यालय में 25 फीसदी बीपीएल बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जाए। शिक्षा विभाग को इसकी रिर्पोट सौंपने का भी निर्देश दिया गया। इसके अलावा स्कूलों में जरुरी सुविधा बहाल करने की बात कही। स्कूलों में पानी, बिजली, शौचालय नहीं होने पर सीधी कार्रवाई होगी। मापदंड के अनुरूप कार्य नहीं करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने की बात कही गई।

हकीकत : स्कूल में घुसा पानी, कैसे पढ़ाई करें बच्चे

दुलमी | मॉनसून की शुरूआत में ही दुलमी के राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय उसरा में पानी भर गया। यहां विद्यार्थी किताब-कॉपी बाहर ही रख, मैदान में भरे पानी को पार कर किसी तरह अंदर जाते हैं क्लास रूम में भरे पानी को झाड़ू लगाकर बाहर करने का प्रयास करते हैं। इसके बाद ही पढ़ाई शुरू हो पाती है। वहीं कई बच्चे विद्यालय परिसर में जमा बारिश के पानी में खेलते हुए भी नजर आते हैं। बारिश के कारण दुलमी प्रखंड के उमवि पोटमदगा, उउवि सिकनी, उउवि होन्हे, उउवि कुल्ही, उमवि जमीरा सहित दर्जनों विद्यालयों में ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है।

विभाग को है जानकारी, जर्जर भवन में नहीं चलती है कक्षाएं: प्रधानाध्यापक

राउमवि उसरा के प्रधानाध्यापक ने कहा कि विद्यालय में भवन की कमी है, जिसके कारण कक्षाओं को साफ कराकर बच्चों को बैठाया जाता है। जर्जर भवनों में बच्चों की कक्षाएं बारिश के दिनों में नहीं ली जाती है।