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निमोनिया व पैर टूटने वाले मरीज भी कर रहे रेफर

सदर अस्पताल में पिछले 10 दिनों में दो दर्जन से ज्यादा लोगों को रांची रेफर किया गया है। इनमें से कई साधारण तौर पर...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 02:30 AM IST
सदर अस्पताल में पिछले 10 दिनों में दो दर्जन से ज्यादा लोगों को रांची रेफर किया गया है। इनमें से कई साधारण तौर पर बीमार थे। दरअसल ऐसा यहां सुविधाओं की कमी के कारण हो रहा है। पिछले दिनों लोइंगा की घटना को ही देखा जाए तो उसमें एक 18 महीने के बच्चे प्रभात कुमार को भी रांची रेफर कर दिया गया था। उसी घटना में 5 माह की बच्ची मुन्नी कुमारी को साधारण सी निमोनिया की बीमारी से ग्रसित होने पर रांची रेफर कर दिया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रमंडलीय अस्पताल निमोनिया का इलाज करने में सक्षम नहीं है तो आखिर सदर अस्पताल किस बीमारी का इलाज कर सकता है।

पैर टूटने पर भी रांची रेफर

तरहसी के मानिकचंद प्रसाद ने पिछले दिनों जहर खा लिया था, उसे भी सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परंतु चंद घंटों के बाद भी उसे रांची रेफर कर दिया गया। वहीं पिछले दिनों 23 वर्षीय कमलेश कुमार मेहता का एक्सीडेंट हो गया था और उसका दाहिना पैर टूट गया था उसे भी रांची रेफर कर दिया गया है। एक अन्य मामले में 30 वर्षीय खुशबू देवी जो तरहसी प्रखंड के ओझा पथरा गांव की रहने वाली है को आग से जलने पर रांची रेफर कर दिया गया। इसी तरह पिछले दिनों टेंपो पलटने के कारण लेस्लीगंज के विनोद भुइयां का पैर टूट गया था उसे भी रांची रेफर कर दिया गया था।

इन मामलों को देखने से लगता है कि आखिर यह अस्पताल सिर्फ प्राथमिक उपचार के लिए खोला गया है। जबकि इसी जिले के झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री भी है। परंतु यहां पर सुविधाओं का घोर अभाव है।

हाल सदर अस्पताल का

पिछले दस दिनों में दो दर्जन से ज्यादा मरीज रेफर, इनमें लाेइंगा का प्रभात कुमार और मुन्नी कुमारी भी

मेदिनीनगर में सदर अस्पताल भवन।

हाल आईसीयू का

सदर अस्पताल के आईसीयू की स्थिति अत्यंत ही दयनीय है। आईसीयू में किसी भी तरह की सुविधा नहीं है। यहां का एसी कभी कभार ही चलता है। मरीज बेहाल रहते हैं आईसीयू के नाम पर सिर्फ एक रूम है। जिसमें दरवाजा सिर्फ शीशे का लगा हुआ है। परंतु आईसीयू में जिस तरह की सुविधा रहनी चाहिए। वैसी सुविधा यहां के लोगों को नहीं मिलती है यह सिर्फ नाम मात्र का ही आईसीयू है।