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नवजात बच्चों के इलाज के लिए सदर अस्पताल में एससीएनयू हुआ शुरू

नवजात बच्चों का इलाज अब सदर अस्पताल में करना आसान हो गया है। सदर अस्पताल में नवजात बच्चों के इलाज के लिए आईसीयू की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 19, 2018, 03:15 AM IST

नवजात बच्चों के इलाज के लिए सदर अस्पताल में एससीएनयू हुआ शुरू
नवजात बच्चों का इलाज अब सदर अस्पताल में करना आसान हो गया है। सदर अस्पताल में नवजात बच्चों के इलाज के लिए आईसीयू की तर्ज पर एससीएनयू यानी स्टरलाइज नियोनेटर केयर यूनिट सोमवार को शुरू की गई है। इस यूनिट का लाभ गढ़वा और लातेहार के लोगों को भी होगा।

इससे पहले नवजात बच्चे जब बीमार पड़ते थे, तो उन्हें बाहर भेजना पड़ता था। बहुत बच्चे ऐसे होते थे जिनकी मौत बाहर ले जाने के क्रम में हो जाती थी। पिछले साल जुलाई और अगस्त महीने मे पूरे जिले में करीब 35 बच्चों की मौत हुई थी। इसके बाद से लगातार यूनिट के निर्माण की मांग उठाई गई।

सदर अस्पताल में नवजात बच्चों के लिए बना एससीएनयू।

यूनिट में 12 बेड की है व्यवस्था

बच्चों के लिए बनाया गया स्टरलाइज नियोनेटर केयर यूनिट लगभग 50 लाख की लागत से बनाई गई है। इसमें 12 बेड है, परंतु कभी संख्या बढ़ने पर ज्यादा बच्चों को भी रखने की व्यवस्था है।

चार डॉक्टरों की होगी ड्यूटी

इस यूनिट के लिए सदर अस्पताल में चार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। इसमें डॉ. अनिल श्रीवास्तव, डॉ. अभय कुमार, डाॅ. गौरव विशाल व डॉ. सत्यरंजन गिरि शामिल हैं।

खास बच्चों को रखा जाता है यहां

सदर अस्पताल के डॉ गौरव विशाल का कहना है कि इसमें वैसे बच्चों को रखा जाता है जो जन्म लेने के साथ रोते नहीं हैं या बीमार पड़ जाते हैं। ऐसे बच्चों को इस में भर्ती कर इलाज किया जाता है।

लातेहार और गढ़वा के लोगों को भी मिलेगा इस यूनिट का लाभ

यूनिट के बनने से लातेहार और गढ़वा के लोगों को भी राहत मिली है। प्रमंडल के दूरदराज में रहने वाले और गरीबों के बच्चे जो इलाज के अभाव में मर जाते थे उन्हें मुफ्त में इलाज कराने में सुविधा मिलेगी। इस तरह की सुविधा से लैस निजी अस्पताल में एक बच्चे को रखने के लिए प्रतिदिन ₹750 लिया जाता है। उल्लेखनीय है कि पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी द्वारा भी पिछले साल इसी अस्पताल के लिए धरना का आयोजन किया था जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रमंडलीय अस्पताल होने के बावजूद भी बच्चों के लिए आईसीयू नहीं रहने के कारण नवजात बच्चों की मौत हो रही है। गौरतलब है कि 6 साल पहले इस अस्पताल के लिए यूनिसेफ द्वारा पैसा दिया गया था परंतु निर्माण नहीं हो पा रहा था। इस संबंध में दैनिक भास्कर में भी खबर छपी थी। उसके बाद से ही यहां पर बच्चों के लिए आइसीयू बनाने का कार्य शुरू हो पाया।

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