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कटिहार के जुराबगंज और जलपाईगुड़ी के फाटापुकुर से राशि रिकवर, अपराधियों को पकड़ना बड़ी चुनौती

पुलिस ने 15 दिन के भीतर आईसीआईसीआई बैंक से एटीएम ले जाने के दौरान सीएमएस कंपनी के कस्टोडियन रोशन लाल और गार्ड...

Dainik Bhaskar

Jul 01, 2018, 03:30 AM IST
कटिहार के जुराबगंज और जलपाईगुड़ी के फाटापुकुर से राशि रिकवर, अपराधियों को पकड़ना बड़ी चुनौती
पुलिस ने 15 दिन के भीतर आईसीआईसीआई बैंक से एटीएम ले जाने के दौरान सीएमएस कंपनी के कस्टोडियन रोशन लाल और गार्ड जितेंद्र कुमार से लूटा गया 54 लाख रुपए में से 47 लाख 50 हजार रुपया बरामद कर लिया है। डीआईजी विपुल शुक्ला और एसपी इंद्रजीत महथा ने डीआईजी कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर लूट की राशि को दिखाते हुए आश्वस्त किया कि शेष पैसे भी पुलिस रिकवर कर लेगी। डीआईजी शुक्ला ने बताया कि गैंग का भी उद्भेदन हो गया है। फिलहाल लूट में शामिल अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

कोढ़ा गैंग ने घटना को अंजाम दिया

डीआईजी विपुल शुक्ला ने बताया कि इस बैंक लूट को अंतरराज्यीय कोढ़ा गैंग गिरोह ने अंजाम दिया है। यह गैंग बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल व आंध्र प्रदेश में सक्रिय है। गिरोह ने मई 2017 में मुरादाबाद के एक्सिस बैंक से साढ़े 17 लाख रुपए इसी तरह से कंपनी कस्टोडियन से लूट लिए थे। जब कस्टोडियन बैंक से पैसा लेकर एटीएम में डालने के लिए निकले थे। गिरोह ने बिना गोली बंदूक के बैंक कस्टोडियन को पीछे से लात मार कर गिरा दिया। फिर साढ़े 17 लाख रुपए वाली बैग लेकर चलते बने। इसी तरह से इस गिरोह ने आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में बिना गोली बंदूक के बैंक कस्टोडियन से करोड़ों रुपए लूटे। यह गैंग कई राज्यों की पुलिस के लिए चुनौती बन गया है।

पंद्रह दिन से बैंक की कर रहे थे रेकी

एसपी ने बताया कि गैंग के तीन अपराधी गढ़वा में रह कर यहां प्रतिदिन रेकी करते रहे। इस दौरान बैंक की कार्यप्रणाली को समझा फिर इस बैंक को निशाना बनाया। तीनों अपराधी गढ़वा शहर के पीपरा मुहल्ले में किराए के मकान में 1 मई से रह रहे थे। तीनों ने यह कहकर मकान ली थी कि वे लोग फेरी का काम करते हैं।

बैंक लूट के 54 में 47.50 लाख हुए बरामद, कोढ़ा गैंग था शामिल

पैसा बरामद पर अपराधी नहीं पकड़ाए, एसपी बोले- हर हाल में पकड़ेंगे अपराधियों को

पलामू एसपी इंद्रजीत महथा ने बताया कि यह गिरोह कई राज्यों के निशाने पर है। मगर पलामू पुलिस इस गिरोह के अपराधियों को हर हाल में पकड़ेगी। यह पुलिस टीम के लिए चुनौती है जिसके लिए टीम तैयार है। उन्होंने बताया कि जिस तरह से राज्य भर में नक्सलियों के लिए फ्लैक तैयार किया जा रहा है, इसी तरह से पुलिस अपराधियों के गांव काे चिह्नित करेगी।

पूरी तैयारी से गई थी पुलिस

डीएसपी प्रेमनाथ के नेतृत्व में एके 47 समेत कई अत्याधुनिक हथियारों से लैस पुलिस कोढ़ा गिरोह के सदस्यों के घरों पर छापामारी के लिए गई थी। इस टीम में कई जांबाज पुलिस कर्मी जान जोखिम में डालकर उनकी बस्ती में उन्हीं के चाल ढाल में दो से तीन दिन तक रहे। उनकी बस्ती के लोगों को मिलाया। इस काम में पुलिस के दूसरे साथी उनपर नजर रख रहे थे, ताकि कोई ऐसी वैसी घटना न हो जाए।

टीम में सभी को मिला प्रशस्ति पत्र

एसपी को प्रशस्ति पत्र देते डीआईजी।

डीआईजी ने एसपी समेत 21 पुलिस कर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इसमें एसपी, डीएसपी प्रेमनाथ, प्रशिक्षु चंद्रशेखर आजाद, इंस्पेक्टर तरुण कुमार, संजीव तिवारी, थाना प्रभारी राणा जंगबहादुर सिंह, अरविंद कुमार सिंह, व्यास राम, एएसआई सुधीर कुमार व शंकर दंडपाल, सिपाही कामेश्वर ठाकुर, नंदलाल पटेल, संजय कुमार सिंह, विजय कुमार रजक, संजीव साव, सत्येंद्र कुमार यादव, ललन प्रसाद यादव, नंदलाल प्रसाद, राम नारायण विश्वकर्मा, रामजीत बासके शामिल हैं।

प्रेस कांफ्रेंस करते डीआईजी एसपी व अधिकारी।

बैंक कर्मी की लापरवाही से हुई घटना

डीआईजी विपुल शुक्ला व एसपी इंद्रजीत महथा ने बताया कि बैंक कर्मियों की लापरवाही से यह घटना हुई है। इसके लिए बैंक कर्मी से बाद में पूछताछ की जाएगी। अपराधियों के पकड़े जाने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बैंक कर्मियों की भूमिका लापरवाही तक ही सीमित थी या फिर उनकी भी सांठ गांठ इस प्रकरण में रही है। ऐसे कई बिंदुओं पर पुलिस अनुसंधान कर रही है।

अनजान फोन पर पुलिस को मिला सुराग

पंद्रह जून को लूट की घटना के बाद पुलिस पहले तो काफी निराश हुई, फिर अनुसंधान शुरू किया। डीआईजी, एसपी स्वयं घटना स्थल पर तीन बार गए और बैंक कर्मियों से पूछताछ की। मगर कोई सुराग नहीं मिला। फिर पुलिस ने सीसीटीवी कैमरा खंगाला। इसमें तीन संदिग्ध की तस्वीर सामने आयी, जिसे पुलिस ने 16 जून को तस्वीर सार्वजनिक किया। इसके दूसरे दिन पुलिस उपाधीक्षक प्रेमनाथ को एक फोन आया। फोन करने वाला ने डीएसपी को बताया कि वह अपराधियों के बारे में बताएगा तो क्या पुलिस उसे एक लाख रुपया देगी। हां कहने पर उसने जानकारी दी।

तीन टीम ने कई दिनों चलाया अभियान

पुलिस ने गुप्त सूचना से मिली जानकारी पर छापामारी के लिए तीन टीम बनाई। डीएसपी प्रेमनाथ एक का नेतृत्व कर रहे थे। दूसरी टीम में प्रशिक्षु डीएसपी चंद्रशेखर अाजाद व इंस्पेक्टर तरुण कुमार तथा तीसरी टीम में इंस्पेक्टर संजीव तिवारी व सब इंस्पेक्टर राणा जंगबहादुर सिंह शामिल थे। डीएसपी प्रेमनाथ ने कटिहार के एसपी से संपर्क किया। एक टीम पश्चिम बंगाल की जलपाईगुड़ी और राजगंज थाना के फाटापुकुर भेजी गई। एक अन्य टीम कटिहार के कोढ़ा थाना पहुंची। 21 तारीख को प्रेमनाथ के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी, राजगंज के फाटापुकुर बस्ती पहुंच गयी। वहां अपराधी बिरेंद्र ग्वाला व बिजेंद्र ग्वाला के बारे में तीन दिन तक पूछताछ करती रही। 24 काे पुलिस को उसके बारे में जानकारी मिली कि वह घर आने वाला है। पुलिस सादे लिबास में निगरानी का अपराधियों की आने का इंतजार करती रही। लेकिन जब उन दोनों के घर में छापामारी के लिए पहुंची तब अपराधी तो नहीं मिले, हां पुलिस को महिलाओं से जूझना पड़ा। इस दौरान पुलिस ने राजगंज के स्थानीय पुलिस व महिला पुलिस का भी सहयोग ले रखा था, जो काम आया। तलाशी में पुलिस को 25 जून को 18 लाख और 17 लाख रुपए मिल गए। एसपी महथा ने पत्रकारों को बताया कि इस दौरान पुलिस ने महिलाओं का व्यापक विरोध झेला। इसके बाद पुलिस की टीम बिहार के कटिहार जिला के कोढ़ा थाना के नया टोला स्थित जुराबगंज में अपराधी बिरू यादव उर्फ बंजारा के घर कटिहार पुलिस के सहयोग से 28 जून को छापामारी की। छापामारी में पुलिस को कई कागजात व साढ़े 12 लाख रुपए नगद मिले, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया।

मुरादाबाद भी भेजी गई टीम

पुलिस को जब मालूम हुआ कि उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद शहर में मई महीने में एक्सिस बैंक से एटीएम में पैसा ले जाने के क्रम में साढ़े 17 लाख लूटे गए हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से अपराधियों ने बिना हथियार के कई लूट की वारदात को अंजाम दिया है। इसके बाद पुलिस ने प्रशिक्षु डीएसपी चंद्रशेखर आजाद को 19 जून को मुरादाबाद भेजा।

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