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विवि में रिसर्च स्कॉलर के कोर्स वर्क की हुई शुरुआत

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय रिसर्च स्कॉलर की कोर्स वर्क की शुरुआत बुधवार से जीएलए कॉलेज में शुरू हो गई। मौके...

Bhaskar News Network| Last Modified - Aug 09, 2018, 03:31 AM IST

विवि में रिसर्च स्कॉलर के कोर्स वर्क की हुई शुरुआत
विवि में रिसर्च स्कॉलर के कोर्स वर्क की हुई शुरुआत
नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय रिसर्च स्कॉलर की कोर्स वर्क की शुरुआत बुधवार से जीएलए कॉलेज में शुरू हो गई। मौके पर कॉलेज के रूम नंबर 16 में कार्यक्रम का आयोजन कर शोधार्थी व संकाय अध्यक्ष की उपस्थिति में नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के डीन सोशल साइंस व ह्युमिनिटी सह कार्यक्रम के अध्यक्षता कर रहे डॉ आरआर किशोर ने इसकी विधिवत घोषणा की। मौके पर उन्होंने कहा कि नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के वीसी डॉ एसएन सिंह के निर्देशानुसार कोर्स वर्क का शुभारंभ किया जा रहा है। विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शोध विषय को अग्रिम पंक्ति में रखा गया है। इस पर विश्वविद्यालय का विशेष ध्यान है। उन्होंने शोधार्थियों के मन के शंका समाधान भी किए। उन्होंने कहा कि शोध वर्क 6 माह का होगा। 6 माह के दौरान शोधार्थी को कई चीजों को को गाइड बतलाएंगे जो शोध वर्क लिए काफी महत्वपूर्ण है इसलिए कोर्स वर्क को काफी गंभीरता के साथ लिया जाना चाहिए। कोर्स वर्क के बाद 2 पेपर का परीक्षा होगा। परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद भी सिनोप्सिस जमा कर सकेंगे । उसके बाद सिनोप्सिस को डीआरसी के समक्ष रखा जाएगा। डिपार्टमेंट रिसर्च कमेटी उसे अप्रूव करेगी। इसके बाद उसे यूनिवर्सिटी रिसर्च कमेटी के पास एप्रूवल के लिए भेजा जाएगा। जिसके बाद उसका रिसर्च वर्क शुरू होगा। और फिर वही रिसर्च स्कॉलर कहा जाएगा। इसमें गाइड की भूमिका महत्वपूर्ण है। मौके पर कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रामानुज शर्मा ने अपने सहज अंदाज में शोध का अर्थ संबंधित शोधार्थियों को बताया। उन्होंने कहा कि किस तरह से शोध विश्वविद्यालय के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के सकारात्मक पहल का नतीजा है कि यहां शोध वर्क शुरू हुआ। आज एक साथ बैठे हुए हैं। अगले 6 माह तक कोर्स वर्क करने के बाद वह अपना सिनोप्सिस डीआरसी के समक्ष रख सकेंगे। इसके बाद जो प्रक्रिया होगा उसमें विश्वविद्यालय स्तर से अप्रूवल मिलेगा ।

रसायन विज्ञान विभाग के प्राध्यापक सह कंप्यूटर साइंस के प्रभारी एस के दीपक ने शोध विषय की महत्ता व शोध विषय में जरूरी पहलुओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जो भी शोधार्थी हैं। वह अपने अपने संस्थान से एनओसी विभाग को सौंपेंगे ।अगर भविष्य में कभी शोधार्थी को कोई परेशानी होगा तब वह स्वयं जिम्मेवार माने जाएंगे। इसलिए विश्वविद्यालय सभी शोधार्थियों से एनओसी लेगा । एनओसी के बाद यह रिस्पांसिबिलिटी उस शोधार्थी की होगी कि उसने सही-सही एनओसी जमा की है अथवा नहीं। उन्होंने परीक्षा के पैटर्न शोध विषय में सिनॉप्सिस का महत्व को विस्तार से बताया। अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ आरके सिन्हा ने मौके पर शोधार्थियों को ईमानदारी पूर्वक कार्य करते हुए कोर्स वर्क को पूरा करने की बात कही। छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष डॉ एन के तिवारी ने शोधार्थियों को बताया कि बिना परीक्षा दिए बिना मेहनत का कुछ भी होने वाला नहीं है। और कोर्स वर्क में भी मेहनत करने की जरूरत है। बिना परीक्षा पास किए पीएचडी में रजिस्ट्रेशन मुश्किल है। मौके पर जीएलए कॉलेज के प्राचार्य प्राचार्य डॉक्टर आई जे खलको ने बड़े ही सादगी पूर्वक अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि पीएचडी करना काफी मेहनत का काम है। जब वे पढ़ते थे उस दौरान पीएचडी और भी कठिन कार्य था। बदलते परिवेश में पीएचडी करना भी काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि यह काम बड़ी ही गंभीर अंदाज में किया जाना जरूरी है ।क्योंकि जो शोध हो रहे हैं उस पर आगे एक आधार बने ।वह शोध राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मानदंड को स्थापित करें। वाणिज्य संकाय के डॉक्टर एस के पांडे ने भी अपने अनुभव शेयर किए। उन्होंने कहा कि उनके निर्देशन में एक शोध हुई है। वह आगे भी इस दिशा में काम कर रहे हैं । मौके पर विश्वविद्यालय के सभी विभाग अध्यक्ष व संकायाध्यक्ष के साथ-साथ 70 से अधिक शोधार्थी मौजूद थे।

कार्यक्रम में शामिल प्रोफेसर, कॉलेज कर्मी व अन्य लोग।

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