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65 वर्षों बाद 27 जुलाई को 3 घंटे 55 मिनट तक रहेगा चंद्रग्रहण, इससे पहले 1953 में लगा था इतना लंबा ग्रहण

27 जुलाई को खग्रास चंद्रग्रहण लगेगा। इसकी कुल अवधि 3 घंटे 55 मिनट होगी। इसमें 103 मिनट तक पूर्णचंद्र ग्रहण की स्थिति...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 22, 2018, 03:35 AM IST

65 वर्षों बाद 27 जुलाई को 3 घंटे 55 मिनट तक रहेगा चंद्रग्रहण, इससे पहले 1953 में लगा था इतना लंबा ग्रहण
27 जुलाई को खग्रास चंद्रग्रहण लगेगा। इसकी कुल अवधि 3 घंटे 55 मिनट होगी। इसमें 103 मिनट तक पूर्णचंद्र ग्रहण की स्थिति रहेगी। भारत में यह 27 जुलाई की रात 11.54 बजे से 3.49 बजे तक लगेगा। पृथ्वी के मध्य क्षेत्र की छाया चंद्रमा पर पड़ने की वजह से यह चंद्रग्रहण लगेगा।

पंडित उमेश चौबे के अनुसार, गुरु पूर्णिमा के दिन लगनेवाले इस ग्रहण का सूतक 27 जुलाई को दोपहर 2.54 बजे से ही शुरू होगा। यह चंद्रग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले 26 जुलाई 1953 को 20वीं सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण लगा था, वह चंद्रग्रहण रात 11.54 बजे से 3.49 बजे तक लगा था। उस दौरान पूर्ण चंद्रग्रहण 101 मिनट तक था।

गुरु पूर्णिमा भी इसी दिन

पलामू समेत भारत के अधिकांश हिस्से में चंद्रग्रहण का समय रात 11.54 बजे से 3.49 बजे तक

103 मिनट तक पूर्णचंद्र ग्रहण की स्थिति रहेगी

ग्रहण के दौरान कब, क्या करें, क्या नहीं करें

ग्रहण स्पर्श के समय स्नान, मध्य समय में होम और देव पूजन तथा ग्रहण मोक्ष के समय अन्न, वस्त्र, धन आदि का दान करें। सर्वमुक्त होने पर स्नान करें। दान करनेवाली वस्तुओं को ग्रहण से पहले ही संकल्प करके रख लेना चाहिए।

ग्रहण के दौरान पूजा में पकवान भोग नहीं लगाएं।

ग्रहण का यह पड़ेगा असर

जन-धन की हानि हो सकती है।

राजनैतिक वर्ग में संघर्ष।

चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों, सैनिकों और औषधि निर्माताओं को कष्ट का सामना करना पड़ेगा।

कर्मकांडी ब्राह्मणों को शारीरिक पीड़ा हो सकती है।

यह हो सकता है प्रभाव

पंडित भारद्वाज के अनुसार, यह चंद्रग्रहण जप, तप और दान के लिए विशेष महत्व वाला है। पूर्णिमा और गुरु पूजन के कार्य ग्रहण के सूतक से पहले ही करने होंगे। सिद्धपीठ में मंदिरों के कपाट 2.54 बजे से पहले ही बंद कर दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि 11 अगस्त 2018 को दो खंडग्रास सूर्यग्रहण पड़ेंगे। लगातार तीन ग्रहणों में खग्रास चंद्रग्रहण का ज्योतिषीय और खगोलीय दुष्प्रभाव तय है। विशेषकर कर्क रेखा क्षेत्र में विनाशकारी भूकंप, सुनामी, चक्रवात व आगजनी की घटनाएं हो सकती हैं। भारत में कर्क रेखा गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और मिजोरम से होकर गुजरती है।

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