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19 साल बाद बना संयोग, 30 दिन का होगा सावन

भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय माह सावन इस साल कई संयोग लेकर आ रहा है। करीब 19 साल बाद सावन पूरे 30 दिनों का होगा।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 24, 2018, 03:40 AM IST

19 साल बाद बना संयोग, 30 दिन का होगा सावन
भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय माह सावन इस साल कई संयोग लेकर आ रहा है। करीब 19 साल बाद सावन पूरे 30 दिनों का होगा। आचार्यों के अनुसार, 30 दिनों का सावन अधिमास के कारण हो रहा है। जबकि कई बार सावन माह 28 या 29 दिनों का ही होता है। 28 जुलाई से शुरू वाला सावन का महीना 26 अगस्त को रक्षा बंधन के साथ संपन्न होगा। इस वर्ष सावन के पावन महीने में भगवान भोलेनाथ का सच्चे मन से आराधना करने से सभी मनोकामना पूर्ण होगा।

सावन का शुभारंभ 28 जुलाई से हो रहा है। पहला सोमवार 30 जुलाई को पड़ेगा। इस दिन सौभाग्य योग है। धनिष्ठा नक्षत्र है और द्विपुष्कर योग का भी संयोग है। यह संयोग 19 वर्षों बाद बना है। इसमें दूध, दही, मधु, चावल, पुष्प और गंगाजल से पूजा करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होंगे। ज्योतिषाचार्य डॉ. पंडित आरके उपाध्याय ने बताया कि द्विपुष्कर योग वार, तिथि व नक्षत्र तीनों के संयोग से बनने वाला विशिष्ट योग है, जिसमें किए गए काम की पुनरावृति (दोहराना) नहीं होती है। सावन में ऐसा संयोग बना रहा है जिससे हर किसी को उपासना का पूर्ण लाभ मिलेगा।

इस बार सावन में पड़ेंगे चार सोमवार, 26 को मनेगा रक्षाबंधन

तीन योग बना रहे सावन को खास

सौभाग्य योग

इसे मंगलदायक योग भी कहते हैं। इस योग में की गई शादी से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है। अक्सर विवाह आदि मुहूर्त में यह योग देखा जाता है।

पहले दिन घर लाएं सुख-समृद्धि

धनिष्ठा योग

इसका अर्थ होता है ‘सबसे धनवान’। वैदिक ज्योतिष की गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले 27 नक्षत्रों में से धनिष्ठा को 23वां नक्षत्र माना जाता है। इस योग में जन्मे लोग बहुमुखी प्रतिभा और बुद्धि के धनी होते हैं।

रुद्राक्ष : सुख, सौभाग्य और समृद्धि बढ़ाने के लिए यह अत्यंत शुभ और सौभाग्य बढ़ाने वाला होगा।

चांदी का चंद्र या मोती : सावन में चांदी का कड़ा खरीदना शुभ होता है।

द्विपुष्कर योग

यह योग वार, तिथि व नक्षत्र तीनों के संयोग से बनने वाला विशिष्ट योग है। इसमें धन लाभ होता है। इसके अलावा धार्मिक यात्राएं करने से पुण्य कई गुणा बढ़ता है।

चांदी का बिल्वपत्र : चांदी का बिल्वपत्र रखना शुभ होता है। इससे साथ जलाभिषेक करें।

30 को पहली सोमवारी

30 जुलाई : सावन का पहला सोमवार

06 अगस्त : सावन का दूसरा सोमवार

13 अगस्त : सावन का तीसरा सोमवार और हरियाली अमावस्या मनाई जाएगी।

20 अगस्त : सावन का चौथा व अंतिम सोमवारी व्रत

26 अगस्त : सावन माह का अंतिम दिन न पूर्णिमा व रक्षा बधन

जल पात्र : चांदी, तांबा या पीतल का जलपात्र खरीदकर लाएं तो अत्यंत शुभ होगा। इससे शिव को जलाभिषेक करें।

चांदी का चांद : भगवान शिव के मस्तक पर चांद सुशोभित है, इसलिए जांच खरीदना शुभ होता है।

भद्रा से मुक्त रहेगी राखी

सूर्योदय के पहले भद्रा खत्म

इस वर्ष रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं पड़ेगा। सूर्योदय से पहले भद्रा समाप्त हो जाएगी। ज्योतिषाचार्य पंडित संतोष त्रिपाठी ने बताया कि भद्रा के समय राखी नहीं बांधनी चाहिए। रक्षाबंधन पर भाई को राखी हमेशा अपराह्न के समय बांधने की परंपरा है।

रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त

सुबह 9.27 बजे 11.43 बजे तक

दोपहर मुहूर्त : 12.38 से 4.12 तक

सावन मास : पूर्णिमा तिथि 25 अगस्त, दोपहर 2.15 बजे से शुरू हो जाती है, जिसका समापन 26 अगस्त की शाम 4.16 बजे होगा।

रक्षाबंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पूर्व होगी समाप्त

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