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मुंशी प्रेमचंद की 138 वीं जयंती पर विचार गोष्ठी हुई

साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 138वीं जयंती पर इप्टा कार्यालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रेमचंद की...

Dainik Bhaskar

Aug 02, 2018, 03:56 AM IST
मुंशी प्रेमचंद की 138 वीं जयंती पर विचार गोष्ठी हुई
साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 138वीं जयंती पर इप्टा कार्यालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रेमचंद की चेतना और वर्तमान समय विषय पर आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता इप्टा के नगर अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार सिंह ने की। इस मौके पर अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रगतिशील चिंतक व भाकपा नेता केडी सिंह ने कहा कि मानव समाज को उच्चतर बनाने की चेतना प्रेमचंद के साहित्य में मिलती है।

उन्होंने इस बात पर चिंता जाहिर की कि वर्तमान समय में न तो प्रेमचंद का गांव बचा है और न ही गांव के लोग। उन्होंने कहा कि सभ्यता का विकास के साथ विज्ञान और तकनीक ने तेजी से तरक्की की है, लेकिन मानवीय मूल्य समाज से गायब होते जा रहे हैं। प्रेमचंद ने इन मूल्यों को बखूबी समझा था और अपने साहित्य में उसे जगा दी थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आम आवाम को चिंतनशील होना पड़ेगा। समाज में मानवीय मूल्य को स्थापित करने के लिए सभी संघर्ष करने वाले और बेहतर सोच रखने वाले लोगों को आगे आना होगा। सुबह की धूप पत्रिका के संपादक शिवशंकर प्रसाद ने कहा कि वर्तमान समय कठिन दौर से गुजर रहा है। इस कठिन दौर में साहित्य की भूमिका और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि सिर्फ पढ़ने से नहीं बल्कि प्रेमचंद के साहित्य को जीवन में आत्मसात करने की जरूरत है। इप्टा के रंगकर्मी प्रेम प्रकाश ने कहा कि प्रेमचंद की चेतना को समाप्त करने की साजिश की जा रही है। इससे पलामू भी अछूता नहीं है। उन्होंने कहा कि साहित्य और चिंतन की परंपरा वैज्ञानिक रूप से जुड़ी होती है। प्रेमचंद ने भी अपने साहित्य में वैज्ञानिक चिंतन को शामिल किया था। आज जरूरत है प्रेमचंद की चेतना से जनता को जागृत करने और चिंतनशील बनाने की।

सुरेश सिंह ने कहा कि वर्तमान समय भयावह दौर से गुजर रहा है। इसलिए वर्तमान समय में प्रेमचंद की चेतना को और बेहतर व जोरदार ढंग से जनता को बताने की जरूरत है। माध्यम चाहे जो भी हो। गौतम कुमार ने प्रेमचंद को याद करते हुए कहा कि कारपोरेट और सामंती ढांचे की साजिश के तहत वर्तमान समाज जी रहा है। ऐसे दौर में प्रेमचंद का साहित्य ही हमें इससे उबरने की प्रेरणा दे सकता है। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे शैलेंद्र सिंह ने कहा कि लोगों की चेतना को खत्म करने की साजिश पूंजीवाद का पहला काम है। दुर्भाग्य से हम उसी दौर में जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से चाहे अनचाहे रूप से आम अवाम को भीड़ में शामिल कर उसे मुद्दों से भटकाया जा रहा है। ऐसे में प्रेमचंद की सामूहिकता की बात के रास्ते हमें आगे बढ़ने की जरूरत है। इसके अलावा विचार गोष्ठी में आलोक श्रीवास्तव, गणेश रवि, अश्विनी घई, अमन चक्र, रविशंकर आदि ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर शशि पांडे, दिनेश शर्मा, समरेश सिंह, अभय मिश्रा, जयकिशोर मिश्रा, संजय कुमार अकेला, महेश कुशवाहा, अजीत ठाकुर समेत अन्य लोग उपस्थित थे।

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