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प्रेमचंद पहले कहानीकार जिन्होंने कहानियों में समाज को दी जगह

जीएलए कॉलेज परिषद में बुधवार को सृजन एवं परिवेश व्याख्यान माला के तहत एनपीयू स्नातकोत्तर, हिंदी विभाग ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 26, 2018, 02:50 PM IST

प्रेमचंद पहले कहानीकार जिन्होंने कहानियों में समाज को दी जगह
जीएलए कॉलेज परिषद में बुधवार को सृजन एवं परिवेश व्याख्यान माला के तहत एनपीयू स्नातकोत्तर, हिंदी विभाग ने प्रेमचंद की 138वीं जयंती मनाई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रांची विवि के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. अरूण कुमार तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में वीसी डॉ एसएन सिंह ने संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। मौके पर डॉ अरूण कुमार ने कहा कि प्रेमचंद प्रारंभ से ही मदरसा में फारसी पढ़ा करते थे। इन्होंने अपने जीवन काल में 1900 से 1915 के बीच पैंसठ कहानी और चार उपन्यास लिखे। वे यथार्थ पर विश्वास करते थे। प्रेमचंद पहले साहित्यकार थे, जिन्होंने समाज में घटित घटनाओं को अपनी रचनाओं में जगह दी। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की भाषा सरल एवं संजीव थी। उन्होंने अपने साहित्य में कई भाषाओं का समावेश किया है।

वीसी एसएन सिंह ने कहा कि प्रेमचंद ने जिस साहित्य की रचना की उसमें कई भाषाओं का मिश्रण है। प्रेमचंद हिन्दी एवं उर्दू के महानतम लेखकों में एक थे। उन्होंने ईदगाह, ठाकुर का कुआं, गोदान, कफन, बड़े घर की बेटी, नमक का दरोगा जैसे न जाने कितने कहानियों को लिखा है। आज इनकी लिखी कहानियों से हमें प्रेरणा लेने की जरूरत है। इस अवसर पर डॉ सुरेश साहू, डॉ अजय कुमार पासवान सहित अन्य शिक्षक उपस्थित थे। कार्यक्रम का अध्यक्षता प्रो रामानुज शर्मा ने किया। जबकि संचालन डॉ विभा शंकर एवं भारती सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ मंजू सिंह ने किया।

जीएलए कॉलेज में कार्यक्रम का उद्घाटन करते अतिथि।

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