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सदर अस्पताल में सुविधाओं का है काफी अभाव, लिफ्ट भी है खराब

सदर अस्पताल की व्यवस्था सुधरने का नाम ही नहीं ले रही है। अव्यवस्था का आलम यह है कि शनिवार को कृष्ण राम नामक व्यक्ति...

Dainik Bhaskar

Jun 26, 2018, 03:15 PM IST
सदर अस्पताल में सुविधाओं का है काफी अभाव, लिफ्ट भी है खराब
सदर अस्पताल की व्यवस्था सुधरने का नाम ही नहीं ले रही है। अव्यवस्था का आलम यह है कि शनिवार को कृष्ण राम नामक व्यक्ति की मौत सही समय पर इलाज की व्यवस्था नहीं होने के कारण हो गई। जानकारी के अनुसार कृष्णा राम का एक्सीडेंट हो गया था, जिसे सदर अस्पताल लाया गया था। सदर अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मी अकेले काफी मेहनत कर रहे थे। परंतु तीसरे तले पर उसे इलाज के लिए पहुंचाने की जरूरत थी।

कृष्णा राम को प्राथमिक उपचार करने के बाद उसके मुंह से काफी ब्लड निकल रहा था, जिसके लिए उसे सुला कर इलाज करने की जरूरत थी तथा उसे ऊपर वाले ताले में ले जाना था। परंतु लिफ्ट खराब रहने के कारण उसे ऊपर ले जाने में काफी देर हुई। काफी देर के बाद जब उसे ऊपर वाले तले में ले जाया गया, तो इलाज करने के 1 घंटे के बाद कृष्णा राम की मौत हो गई। जबकि सदर अस्पताल का लिफ्ट महीनों से खराब है। लिफ्ट चालू कराने में अस्पताल प्रबंधन की कोई चिंता नहीं है। प्रत्यक्षदर्शी कौशल किशोर का कहना है कि अगर सही समय पर इलाज किया जाता तो शायद उसकी जान बच जाती। उल्लेखनीय है कि सदर अस्पताल में प्रतिदिन पर मंडलीय अस्पताल होने के कारण 700 से 800 मरीज प्रतिदिन आते हैं। यहां पर मरीजों के लिए जरूरत के हिसाब से बेड तक उपलब्ध नहीं। मरीज घंटों अपने मरीज को लेकर इधर-उधर दौड़ते रहते हैं।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर उपायुक्त ने कार्यपालक दंडाधिकारी शैलेश कुमार सिंह को पिछले 11 मार्च को हुए मंगर भुईया की मौत की जांच का जिम्मा दिया है। सोमवार को कार्यपालक दंडाधिकारी द्वारा सदर अस्पताल में आकर जांच किया गय। उल्लेखनीय है कि पिछले 11 मार्च को मंगर भुईया की मौत सदर अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई थी। जबकि मंगर भुइयां मरने के 2 महीना पहले किसी आरोप में मेदिनीनगर सेंट्रल जेल में बंद था। परंतु 8 मार्च को जब उसकी तबीयत बिगड़ी तो उसे सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 8 मार्च को डॉक्टरों ने उसे एक्सरे कराने का आदेश दिया था। परंतु सदर अस्पताल की लापरवाही के कारण उसका 2 दिन बाद अर्थात 10 मार्च को एक्स-रे कराया गया। जिसके कारण इलाज करने में लेट हो गई और वह 11 मार्च को उसकी मृत्यु हो गई। इस संबंध में कार्यपालक दंडाधिकारी शैलेश कुमार सिंह ने भी देर से इलाज करने की बात को जांच के दौरान उठाया है।

घायल को इलाज के लिए ले जाते कर्मी व अन्य।

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