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भक्तों ने की हवन कुंड की परिक्रमा

सालानपुर प्रखंड क्षेत्र के जेमारी ग्राम पंचायत स्थित जेमारी गेट में 9 दिवसीय भागवत कथा के आठवें दिन सुबह यज्ञ एवं...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 04, 2018, 02:45 AM IST

सालानपुर प्रखंड क्षेत्र के जेमारी ग्राम पंचायत स्थित जेमारी गेट में 9 दिवसीय भागवत कथा के आठवें दिन सुबह यज्ञ एवं हवन का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया। मिहिजाम, रूपनारायणपुर, जेमारी, देंदुआ, वासुदेवपुर, अल्लाडी, सामडी, पर्वतपुर, बाथानबाड़ी आदि इलाके से भक्त मौके पर पहुंचकर हवनकुंड का परिक्रमा किया एवं कथावाचक सच्चिदानंद महाराज जी से आशिर्वाद लिया। मौके पर महाराज ने भक्तों को कहा कि आगामी 4 फरवरी को विशेष पूजा का आयोजन किया जाएगा। इस पूजा में वैसे लोग भाग ले सकते हैं जिन्हें नौकरी लगने में परेशानी, संतान का न होना, शादी में विलंब होना, घरेलू परेशानी आदि की समस्याओं से जूझ रहे है। वैसे लोग इस पूजा में भाग लेने से उन्हें ईश्वर का आशिर्वाद प्राप्त होगा और उनका जीवन सुखमय बनेगा। कहा कि रविवार अर्थात आज भागवत कथा का अंतिम दिन होगा। जिसमें भागवत कथा श्रवण करने वालों की भीड़ देखने लायक होगी। इस मौके पर विशेष प्रसाद लेने के लिए अग्रिम बुकिंग चल रही है।

हवन कुंड का परिक्रमा करते श्रद्धालु।

बांग्ला कीर्तन से देवली-कुलडंगाल गांव का माहौल हुआ भक्तिमय

नाला|देवली-कुलडंगाल गांव में आयोजित चार दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम में चारों ओर भक्तिरस प्रवाहित होने लगा है। कोलकाता के प्रसिद्ध बांग्ला कीर्तन शिल्पी कृष्णपद हालदार द्वारा प्रस्तुत भगवान कथा सुनने के लिए क्षेत्र के सैकड़ों श्रोता शुक्रवार देर रात तक एक ही स्थान पर बैठे रहे। अपने बखान में शिल्पी ने कहा कि जीवात्मा का देहांत नहीं होता है। शरीर से आत्मा निकलकर अन्य शरीर धारण करता है और ये सिलसिला निरंतर चलता रहता है। उन्होंने कहा कि शरीर से आत्मा निकल जाने के साथ ही उस शरीर का अस्तित्व भी समाप्त हो जाता है लेकिन अपने सत्कर्म के बदौलत मानव की जीवन शैली और सुकृति अमर रहता है। उन्होंने जीव जगत को अच्छे कर्म करने और अच्छे मार्ग पर चलने का उपदेश भी दिया। कीर्तन शिल्पी द्वारा भगवान की लीला प्रसंग के साथ साथ जीने के लिए ज्ञानवर्द्धक उपदेश और नृत्य गीत प्रस्तुत करने से श्रोता घंटों तक भक्ति सागर में गोता लगाते रहे। कार्यक्रम का संचालन में दीनबंधु दास, अजीत कुमार पाल, जियाराम ठाकुर, विजयानंद झा, निर्मल पाल, दानीनाथ कर आदि सक्रिय रहे।

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