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बुढापे में हेल्थ केयर सर्विस का दिया प्रशिक्षण

सदर अस्पताल जामताड़ा में शुक्रवार को नेशनल प्रोग्राम फॉर हेल्थ केयर द इल्डरली विषय पर प्रशिक्षण का आयोजन किया...

Danik Bhaskar

Mar 24, 2018, 02:50 AM IST
सदर अस्पताल जामताड़ा में शुक्रवार को नेशनल प्रोग्राम फॉर हेल्थ केयर द इल्डरली विषय पर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण शिविर का विधिवत उद्घाटन डाॅ. एसके मिश्रा ने दीप जलाकर किया। प्रशिक्षण शिविर में सदर अस्पताल जामताड़ा के चिकित्सक और स्वास्थ्यर्मी के अलावे नाला और कुंडहित प्रखंड के चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे। उपस्थित चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को संबोधित करते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि बुजुर्गो के सेवा के प्रति सभी तत्पर रहना चाहिए। सभी को एक दिन बुजुर्ग की श्रेणी में आना है। कहा कि जीवन शैली में सुधार करके ही हम सुखमय बुढ़ापा पा सकते हैं। कहा कि हर किसी के लिए वृद्धावस्था के बारे में अलग-अलग अवधारणा होती है। लेकिन वृद्धावस्था में होनेवाली समस्याएं सभी के लिए एक समान होती है।

वृद्धावस्था में होनेवाली समस्याओं और बीमारियों के बारे में कई अध्ययन हो चुके हैं। कहा कि जो लोग अपनी यंग ऐज में अच्छी देखभाल करते हैं वह वृद्धावस्था में कम दिक्कतों का सामना करते हैं। वृद्धावस्था में होनेवाली समस्याओं की चर्चा करते हुए डॉ साहा ने कहा कि आूस्टियोपोरोसिस, मस्कुलर डिजेनरेशन, कम सुनाई देना, ग्लूकोमा, अल्जाइमर रोग, कागनेटिव इम्पेयरमेंट, असंयम, आर्थराइटिस, मेटाबोलिक सिंड्रोम, भावनात्मक तकलीफ आदि बीमारी होती है। मौके पर कहा गया कि बुजुर्गो की आबादी बढ रही है। जहां 1951 में महज दो करोड़ वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में आते थे। वहीं आंकड़ा अब बढकर 1991 के जनगणना में 5.7 करोड़ हो गया। एक अनुमान है कि 2050 तक आते आते यह मुल्क वरीय नागरिकों का मुल्क कहलाएगा। वरिष्ठ नागरिकों की कुल आबादी 3.24 अरब हो जाएगी जो देश की कुल आबादी की साढे सात फीसदी होगी। कहा कि भारत में अभी बुजुर्गों के देखभाल के लिए कोई प्रबंधन पश्चिमी मुल्कों की तैयार नहीं हो पाया है। सरकारी अस्पतालों में भी ओल्ड ऐज होम और परामर्श केंद्र खुले हैं, मगर उनके स्वास्थ्य के जरूरतों के लिए अस्पतालों में अलग से ओपीडी नहीं खुली है। कहा कि बुढापे में हेल्थ केयर सर्विस की सबसे ज्यादा जरूरत होती है और बुजुर्गो के देखभाल के लिए अलग से हेल्थ प्रोफेसनल की व्यवस्था को ही जेरीएट्रिक केयर कहते हैं। बताया गया कि वरीय नागरिकों के जीवन के देखभाल के लिए पूरी तरह से समर्पित प्रबंधन प्रणाली को जेरीएट्रिक केयर मैनेजमेंट कहते हैं। किसी तरह की इमरजेंसी में इसके प्रोफेसनल और एक्सपर्ट बुजुर्ग की हेल्थ केयर, होम केयर, हाउसिंग, डे केयर, खाने पीने की व्यवस्था से लेकर उनके आर्थिक और कानूनी जरूरतों को भी पूरा करते हैं। कहा कि घर के सदस्यो के साथ मिलकर हर दिन 3 से 5 घंटे उनके घर में रहकर बुजुर्गों की देखभाल करते हैं। इनके देखभाल करने का तरीका बिल्कुल नियोजित तरीके से होता है और अपने ग्राहक की हर गतिवििध पर लातार मॉनिटर करते हैं। इसके तहत हाउसिंग, होम केयर सर्विस, मेडिकल केयर, संवाद, बुजुर्गो का सामाजिक दायरा बढाना, कानूनी, वित्तीय, सुरक्षा आदि शामिल है। आयोजित प्रशिक्षण में डॉ एसके मिश्रा, डीपीएम दीपक गुप्ता, मनोज कुमार नाला अाैर कुंडहित प्रखंड के चिकित्सक वीनिता मुर्मू, योगेश साहा, रेखा कुमारी, संजीव कुमार सहित अन्य कर्मी उपस्थित थे। शुक्रवार को नाला और कुंडहित प्रखंड के चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कार्यशाला में प्रशिक्षण देते चिकित्सा पदािधकारी।

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