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श्रीकृष्ण जन्म कथा सुन हुए भावविभोर

भास्कर न्यूज|नाला/बिन्दापाथर प्रखंड क्षेत्र के बंदरडीहा पंचायत स्थित मोहजोड़ी पहाड़गोड़ा गिरिधारी मंदिर परिसर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 03:10 AM IST

श्रीकृष्ण जन्म कथा सुन हुए भावविभोर
भास्कर न्यूज|नाला/बिन्दापाथर

प्रखंड क्षेत्र के बंदरडीहा पंचायत स्थित मोहजोड़ी पहाड़गोड़ा गिरिधारी मंदिर परिसर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा सह प्रवचन का आयोजन किया जा रहा है। मौके पर प्रभुपाद श्रीमद् राधा विनोद ठाकुर गोस्वामी जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के पांचवें दिन व्याख्यान करते हुए द्वितीय स्कन्ध से दशम स्कन्ध भगवान श्रीकृष्ण की जन्म लीला का वर्णन किया। श्रीमद्भागवत कथा ब्रह्मांड की उत्पत्ति एवं उसमें विराट पुरुषों की स्थिति का स्वरूप एवं ब्रह्मा जी के जन्म का रहस्य बताया। कहा कि ब्रह्माजी ने नारद जी से कहा कि हे पुत्र मैं अपने पिता श्री नारायण जी का ध्यान करता हूं, जो सर्वोपरि, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान और सृष्टि के रचयिता हैं। ब्रह्माजी ने बताया कि जब मैने स्वयं को नाभि-कमल पर बैठे हुआ पाया तो मैंने अपने जन्म के बारे में जानना चाहा। इसलिए कमल-नाल के सहारे मैं कई योजन नीचे गया। मुझे उस कमल नाल का कोई ओर-छोर, अंत या किनारा नहीं मिला। तब मुझे दो अक्षर “त” और “प” ही सुनाई दिए और मैंने सौ वर्ष तक तप किया। ब्रह्मा जी की निष्कपट तपश्चर्या से “आदिनारायण” भगवान प्रकट हुए और उन्होंने मुझे सृष्टि की रचना करने की आज्ञा दी। तत्पश्चात मैंने आदिनारायण भगवान की बहुत प्रकार से स्तुति और प्रार्थना करते हुए कहा कि हे प्रभु मुझे ऐसा आशीर्वाद दीजिए जिससे कि सृष्टि-रचना करते हुए मुझे सृष्टि का रचयिता होने का कभी अहंकार या अभिमान न हो। “ब्रह्मा जी की स्तुति से प्रसन्न होकर भगवान ने ब्रह्मा जी को चार श्लोकों की भागवत सुनाई ब्रह्मा जी देवता, दानव तथा सभी जीवों के पितामह हैं, फिर भी वे विशेष रूप से धर्म के पक्षपाती हैं। देवासुरादि संग्रामों में पराजित होकर देव गण ब्रह्मा के पास जाते हैं तो ब्रह्मा जी धर्म की स्थापना के लिये भगवान विष्णु को अवतार लेने के लिए प्रेरित करते हैं। भगवान विष्णु के प्राय: चौबीस अवतारों में ये ही निमित्त बनते हैं। श्रीश्री राधाविनोद जी महाराज जी ने श्री कृष्ण का जन्मोत्सव के बारे में विस्तारपूर्वक बताया कहा कि द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करता था। कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वसुदेव नामक यदुवंशी सरदार से हुआ। एक समय कंस अपनी बहन देवकी को उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था। रास्ते में आकाशवाणी हुई- ‘हे कंस, जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी में तेरा काल बसता है। इसी के गर्भ से उत्पन्न आठवां बालक तेरा वध करेगा।’ यह सुनकर कंस वसुदेव को मारने के लिए उद्यत हुआ। तब देवकी ने उससे विनयपूर्वक कहा- ‘मेरे गर्भ से जो संतान होगी, उसे मैं तुम्हारे सामने ला दूंगी। बहनोई को मारने से क्या लाभ है?’ कंस ने देवकी की बात मान ली और मथुरा वापस चला आया। उसने वसुदेव और देवकी को कारागृह में डाल दिया। वसुदेव-देवकी के एक-एक करके सात बच्चे हुए और सातों को जन्म लेते ही कंस ने मार डाला। अब आठवां बच्चा होने वाला था। कारागार में उन पर कड़े पहरे बैठा दिए गए। उसी समय नंद की प|ी यशोदा को भी बच्चा होने वाला था। उन्होंने वासुदेव-देवकी के दुखी जीवन को देख आठवें बच्चे की रक्षा का उपाय रचा। जिस समय वसुदेव-देवकी को पुत्र पैदा हुआ, उसी समय संयोग से यशोदा के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ, जो और कुछ नहीं सिर्फ ‘माया’ थी तथा भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वासुदेव की प|ी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया । भागवत कथा के आयोजन होने से पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल बना हुआ है। मौके पर सात दिवसीय भागवत कथा को संचालन के लिए मंदिर कमेटी के लोग काफी सक्रिय है।

भक्तिमय हुआ दुर्गा मंदिर न्यू टाउन

सिटी रिपोर्टर|जामताड़ा

दुर्गा मंदिर न्यू टाउन में पांच दिवसीय हरि संकीर्तन का संचालन हो रहा है। कीर्तन का आयोजन न्यू टाउन संकीर्तन कमेटी द्वारा किया जा रहा है। कीर्तन के दूसरे दिन शुक्रवार की शाम कीर्तन कलाकार ने उत्तानपाद राजा के संबंध में व्याख्यान दिया। धार्मिक कार्यक्रम से शहर का माहौल भक्तिमय बन गया है। कीर्तन कलाकार पश्चिम बंगाल के नवतद्वीप और कोलकाता से आए हुए हैं। आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में न्यू टाउन के अलावा शहर के विभिन्न भाग से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। टूटन भट्टाचार्य द्वारा आकर्षक कीर्तन प्रस्तुत किया गया। कीर्तन सुन उपस्थित श्रोता भाव विभोर हो गए। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के आविर्भाव का वर्णन करते हुए कहा कि अज्ञान घोर अंधकार में देव प्रकाश है।

जब भी भारत में भक्ति की महिमा का वर्णन किया जाएगा तब प्रभु के नाम के साथ-साथ गौरांग महाप्रभु का नाम लिया जाएगा। मौके पर मोहन लाल बर्मन, अनिल कुमार महतो, बल्लाल सेन, सुभाष दत्ता, नरेश बर्मन, महेश दुबे, सजल दत्ता, मिहिर साधु, नेपाल मंडल, किशाेर सेन, हिरणमय तिवारी, तोतन, निताई, मिहिर सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद थे।

कथा कहते कलाकार।

कथा सुनने जुटे श्रद्धालु।

24 पहर हरिनाम संकीर्तन शुरू

कुंडहित|थाना परिसर स्थित बजरंगबली मंदिर में 24 पहर हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया गया। मौके पर मुख्य गायक रंजीत उपाध्याय ने लोगों को अपनी सुरीली आवाज से भजन प्रस्तुत कर लोगों का मन मोह लिया। मौके पर श्रद्धालुओं के बीच खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया गया। कीर्तन सुनने दूर-दूर से ग्रामीण क्षेत्र से लोग पहुंचे।

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