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श्रीमद्भागवत कथा सुनकर धन्य हुए श्रद्धालु

भास्कर न्यूज|नाला/बिन्दापाथर नाला विधानसभा क्षेत्र के बिन्दापाथर थाना क्षेत्र स्थित बड़वा गांव के राधा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 04, 2018, 03:15 AM IST

श्रीमद्भागवत कथा सुनकर धन्य हुए श्रद्धालु
भास्कर न्यूज|नाला/बिन्दापाथर

नाला विधानसभा क्षेत्र के बिन्दापाथर थाना क्षेत्र स्थित बड़वा गांव के राधा गिरिधारी मंदिर परिसर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा सह प्रवचन का अायोजन किया जा रहा है। धार्मिक अनुष्ठान आयाेजित होने से क्षेत्र के लोग काफी उत्साहित हैं। कथा के प्रथन दिन के मौके पर वृन्दावनधाम के कथावाचक सह प्रवचक आचार्य श्री गिरिधारी भैयाजी महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा में भागवत महात्म्य महिमा के बारे में व्याख्यान दिया। जिसमें कहा कि एक मार्ग दमन है तो दूसरा उदारीकरण का, दोनों ही मार्गों में अधोगामी वृतियां निषेध है। भागवत को सुनने से पाप कट जाएंगे, जैसे कि गोकर्ण ने कथा कही, किन्तु उसके दुराचारी भाई धुंधकारी ने मनोयोग से उसे सुना और उसको मोक्ष प्राप्त हो गया। भागवत कथा का केन्द्र है आनंद है। आनंद की तल्लीनता में पाप का स्पर्श भी नहीं हो पाता। कहा कि नियम बनाया गया है कि कथा सुनते समय काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, मान, ईष्या तथा द्वेष से सदा दूर रहें, देखें आपका जीवन भी सदाचार वृत को धारण करके समाज में सद्व्यवहार तथा सत्यता का पालन करने पर धुंधकारी की तरह मोक्ष को प्राप्त होता है, अथवा नहीं। हम कथा सुनते समय सर्वदा -दूसरे -दूसरे ध्यान में तथा व्यर्थ के वार्तालाप में लगे रहते हैं और कथा समाप्त होते ही अपना पल्ला झाड़कर अपने नित्यकर्मों में जो कैसे ही हो, लग जाते हैं। कथा में आपने क्या सुना, क्या समझा, इसका आपको पता ही नहीं होता। भागवत कथा एक ऐसा अमृत है कि इसका जितना भी पान किया जाए तब भी तृप्ति नहीं होती। भक्ति के दो पुत्र हैं-ज्ञान, दूसरा वैराग्य, भक्ति बड़ी दुखी थी, उसके दोनों पुत्र वृद्धावस्था में आकर भी सोये पड़े हैं। वेद वेदान्त का घोल किया गया, किन्तु वे नहीं जागे, यह बड़ा विचित्र और विचार का विषय है, भक्ति बड़ी दुखी थी कि यदि वे नहीं जागे तो यह संसार गर्त में चला जायेगा। भागवतकार के समक्ष यह चुनौती रही होगी कि वेद पाठ करने पर भी आत्मज्ञान नहीं और वेदांत के पाठ करने पर वैराग्य नहीं जगा। इसे ही गीता में भगवान कृष्ण ने मिथ्याचार कहा है, भागवत कथा सुनते ही ज्ञान और वैराग्य जाग जाये। अतः जो कथा ज्ञान और वैराग्य जगाये वह पाप में कैसे ढकेल सकती है भागवत कथा पौराणिक होती है। नारद जी ने भक्ति सूत्र की व्याख्या करते हुए भी भक्ति को प्रेमारूपा बताया है। अतः भक्ति की व्याख्या अद्भुत् है। इस सबका शोध श्रीभगवत कथा का महात्म्य है। कथा के साथ साथ भजन संगीत भी प्रस्तुत किये गये जिससे उपस्थित श्रोता भावविभोर हो कर भक्ति से झुम उठे। इस सात दिवसीय भागवत कथा का आयोजन आयोजक मंडली तारीणी दास बाबाजी एवं उनके सहयोगियों ने किया है। मौके पर मंझलाडीह, जलांई, लाकड़ाकुन्दा, मोहनवांक, बाबुडीह, चड़कमारा, नामुजलांई, जलांई, पिपला, बाघमारा, डाढ़, सुन्दरपुर आदि गांवो से श्रद्धालु पहुंच कर कथा को श्रवण किया।

भागवत कथा सुनती महिलाएं।

श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करते श्रद्धालु।

कीर्तन भजन में कोलकाता की कीर्तन मंडलियों ने श्रद्धालुओं को खूब झुमाया

दलाबड़ में 24 प्रहर कीर्तन अनुष्ठान में शामिल होने पहुंचे श्रद्धालु

भास्कर न्यूज|नाला

प्रखंड मुख्यालय के दलाबड़ गांव में बीते सोमवार से जारी 24 प्रहर कीर्तन अनुष्ठान को लेकर भक्त वैष्णवों में अपार उत्साह है। कोलकाता के प्रख्यात कीर्तन शिल्पी दीनकृष्ण पुरकायस्त द्वारा प्रस्तुत भगवान श्रीकृष्ण के लीला प्रसंग सुनने के लिए कुमीरदाहा, नीचेपाड़ा, सुडियापानी, सियारकेटिया, गोपालपुर, घुटबोना, धवाटांड़, डाड़र आदि गांवों से महिला-पुरुष श्रोता शाम ढलते ही कीर्तन मंच के पास पहुंचने लगे हैं। बीती रात मुरूली वर्षण का प्रसंग सुनकर सैकड़ों श्रोता भाव विभोर हो उठे। शिल्पी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के लीला भूमि श्रीबृंदावन में राधारानी कृष्ण के रूप में सजे हुए हैं। हाथों में मुरूली धारण किए हुए देख हर कोई आश्चर्यचकित हो रहे हैं। ललिता सखी ने कमल के डंटल से मुरूली का निर्माण किया है, माथे में सिंदुर के बदले इंदुरेखा ने तिलक लगवाया है और चंपक ललिता ने मुकूट पहनाने के उपरांत राधिका सजधज कर अष्टसखी के साथ जटीला भवन से बाहर निकल रही हैं। श्रीकृष्ण ने उनके वेशभूषा में दूसरा कृष्ण देख आश्चर्य प्रकट करने के साथ साथ कृष्ण होने संबंधी कई सवाल भी किया। राधा महारानी ने भी जबाव देते हुए कहा कि हे कान्हा भक्तिरस से सिंचित होकर भक्त भी तो भगवान हो सकता है। श्रीकृष्ण ने राधिका के पैर में कृष्ण नाम अंकित देखा जो भगवान ने ही अपने हाथों से लिखा था।

सूर्य मंदिर में नौ दिवसीय अनुष्ठान का आयोजन

जामताड़ा। सूर्य मंदिर जामताड़ा के परिसर में नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। अनुष्ठान सूर्य मंदिर के पंडित हृदय नारायण झा के नेतृत्व में किया जा रहा है। इस दौरान हनुमान चालीसा पाठ मुख्य रूप से किया जा रहा है। इसमें देवघर के पंडित भी शामिल है।

चंचला मंदिर कमेटी की बैठक में विकास पर चर्चा

जामताड़ा|चंचला मंदिर कमेटी के सदस्यों की बैठक मंगलवार को मंदिर परिसर में हुई। बैठक की अध्यक्षता राजा नित्य गोपाल सिंह ने किया। मौके पर मंदिर के दान पत्र को सदस्यों की उपस्थिति में खोला गया। कुल 16100 रुपए दान पत्र में जमा हुए थे। रुपयों को गिनती के बाद कमेटी के कोषाध्यक्ष को सुपुर्द कर दिया गया। मौके पर सदस्यों ने मंदिर के विकास और रख रखाव पर विस्तृत चर्चा किया। मौके पर प्रयागराज अग्रवाल, महेंद्र चाैधरी, अाेम सरावगी, ध्रुव मिश्रा, सुरेश प्रसाद सिंह, रामानंद सिंह, विक्रम बजाज सहित अन्य उपस्थित थे।

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