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7 साल बाद भी नहीं मिला दुग्ध शीतल केंद्र का लाभ

नाला प्रखंड के पातुलिया गांव में स्थापित दुग्ध शीतल केंद्र सात साल बाद भी जनोपयोगी नहीं हुआ है। झारखंड सरकार के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 22, 2018, 03:20 AM IST


नाला प्रखंड के पातुलिया गांव में स्थापित दुग्ध शीतल केंद्र सात साल बाद भी जनोपयोगी नहीं हुआ है। झारखंड सरकार के तत्कालीन कृषि एवं पशुपालन मंत्री सत्यानंद झा बाटुल द्वारा वर्ष 2011 में इस महत्वपूर्ण योजना की आधारशीला रखी गई थी। विभागीय अधिकारियों ने कहा था कि अब क्षेत्र के पशुपालकों को दूध बेचने के लिए अन्यत्र नहीं जाना होगा। इतना ही नहीं यहां पांच हजार लीटर क्षमता वाले स्थापित दुग्ध शीतल केंद्र से संग्रह किए गए दूध से पेड़ा, मक्खन एवं दूध से तरह तरह के मीठा तैयार होगा। इस योजना को चालू करने के लिए जब लाखों रुपए का उपकरण लगाया गया तो क्षेत्र के किसान एवं पशुपालकों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। लेकिन यह सिर्फ एक दिखावा बन कर रह गया। न तो यहां स्थापित उपकरण को विभाग के द्वारा चालू किया गया और न ही पशुपालकों का दुख दर्द दूर हुआ है। सात साल के बाद अब क्षेत्र के पातुलिया, बारघरिया, नयापाड़ा, डुमरिया, सीतामुढ़ी, सालुका, जीवनपुर, यदुनंदनपुर आदि दर्जनाधिक गांव के लोग सरकार की इस कार्यशैली से काफी नाराज हैं। मालूम हो कि इस स्थल में निर्मित भवन की खिड़की दरवाजा जहां मरम्मत होने के लिए तैयार है वहीं भवन के अंदर स्थापित मशीन उपकरण में अब जंग लगने लगा है। यहां तैनात रात्रि प्रहरी राजू राय ने बताया कि वर्षों से सेवा देते आ रहे हैं लेकिन अब न तो मेहनताना ही मिलता है और न ही कोई अधिकारी आते हैं। अब ऐसी चर्चा है कि भाजपा नीत सरकार में संक्रमण की बीमारी रहती है। योजना के शुरू करते समय भी भाजपा की सरकार थी और आज भी उसी दल की सरकार है लेकिन कोई काम नहीं हुआ।
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