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मनुष्य को उनके कर्मों के अनुरूप ही फल की प्राप्ति होती है : चंपा

भास्कर न्यूज। नाला/बिन्दापाथर नाला प्रखंड क्षेत्र के खैरा गांव में चार दिवसीय बांग्ला कीर्तन का आयोजन किया गया...

Dainik Bhaskar

Mar 30, 2018, 03:20 AM IST
मनुष्य को उनके कर्मों के अनुरूप ही फल की प्राप्ति होती है : चंपा
भास्कर न्यूज। नाला/बिन्दापाथर

नाला प्रखंड क्षेत्र के खैरा गांव में चार दिवसीय बांग्ला कीर्तन का आयोजन किया गया है। हरिनाम संकीर्तन के आयोजन होने से खैरा गांव सहित सालूका, गेडिया, श्रीपुर, पागला, अगैया, निश्चितपुर, घोडादहा, जामदही, सालोईबेडा, कड़ैया, पुनसिया आदि गांव में भक्ति का माहौल बना हुआ है। इस चार दिवसीय हरिनाम संकीर्तन के दूसरे दिन बुधवार की रात को प्रसिद्ध कीर्तनिया कलाकार चम्पा घोष द्वारा बंगला पाला कीर्तन प्रस्तुत किया गया। जिससे पूरा परिसर में भक्ति का रस प्रभावित होने लगी है। मौके पर कीर्तनिया कलाकार चम्पा घोष ने कहा कि हरि नाम से ही सारा पापा मिट जाता है।

उन्हाेंने कहा कि मनुष्यों को उनके कर्मों के अनुसार ही फल मिलता है इसलिए मनुष्य को कभी भी बुरा काम नहीं करना चाहिए। उन्हाेंने प्रभाष यज्ञ पाला कीर्तन का प्रस्तुत करते हुए कहा कि ब्रह्मा के मानस पुत्र प्रजापति दक्ष उनकी पुत्री सती ने अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध भगवान शंकर से विवाह किया था। माता सती और भगवान शंकर के विवाह उपरांत राजा दक्ष ने एक विराट यज्ञ का आयोजन किया। लेकिन उन्होंने अपने दामाद और पुत्री को यज्ञ में निमंत्रण नहीं भेजा। फिर भी सती अपने पिता के यज्ञ में पहुंच गई। लेकिन दक्ष ने पुत्री के आने पर उपेक्षा का भाव प्रकट किया और शिव के विषय में सती के सामने ही अपमानजनक बातें कही। सती के लिए अपने पति के विषय में अपमानजनक बातें सुनना हृदय विदारक और घोर अपमानजनक था। यह सब वह बर्दाश्त नहीं कर पाई और इस अपमान को सहन न कर पाई उन्होंने वहीं यज्ञ कुंड में कूद कर अपने प्राण त्याग दिए। जब भगवान शिव को माता सती के प्राण त्यागने का ज्ञात हुआ तो उन्होंने क्रोधित हो यज्ञ कुंड में आहुति देने पर भगवान शंकर स्वयं विशाल रूप धारण कर माता पार्वती के मृत शरीर को कंधे पर लेकर तांडव मचाने लगे ।उनके क्रोध का सामना करना किसी के वश में नहीं था।

जिससे सारी देवी देवता मे हाहाकार मच गया। तब भगवान विष्णु ने एक उपाय सोचा कि पार्वती के मृत शरीर को सुदर्शन चक्र से काटकर अलग कर दिया जाय। इस तरह भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता पार्वती के कई टुकड़े कर दिए। कहते है कि इस प्रकार माता के शरीर के टुकड़े जहां गिरे उसे शक्ति पीठ के नाम से जाना जाता है। इस चार दिवसीय कीर्तन को सफल संचालन के लिए कमेटी के लोग काफी सक्रिय दिखे। सभी श्रोताओं का बैठने हेतु उक्त परिसर में उत्तम प्रबंध कमेटी द्वारा किया गया है।

कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालु।

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