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चिरेका के लोगो में तीन-धनुष फिर से शामिल करने की मांग

रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से तीन-धनुष को चिरेका के लोगो में शामिल करने की मांग करते एससी-एसटी के सदस्य। भास्कर...

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2018, 03:25 AM IST
रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से तीन-धनुष को चिरेका के लोगो में शामिल करने की मांग करते एससी-एसटी के सदस्य।

भास्कर न्यूज|मिहिजाम/चित्तरंजन

आजादी के बाद जब चित्तरंजन रेलइंजन कारखाना के लिए जगह चयनित किया गया तो यह जगह तत्कालीन बिहार का आदिवासी बहुल क्षेत्र मिहिजाम था। बंगाल के मुख्यमंत्री विधानचंद्र राय ने यह जमीन अधिग्रहित कराया और बंगाल में शामिल कर लिया। इसके बाद यहां बसे आदिवासियों को विस्थापित कर कारखाने की रूपरेखा की नींव डाली गई। कई आदिवासियों ने इसका विरोध किया। प्रशासन ने कार्रवाई की जिसमें कई लोग मारे भी गए। इसके बाद आदिवासियों और रेलवे के बीच समझौता हुआ था कि चिरेका के लोगो पर आदिवासियों का प्रतिक चिन्ह तीर और धनुष का निशान रहेगा। जमीन के बदले परिवार के सदस्य को नौकरी और जमीन भी दी जाएगी। लेकिन लगभग 70 साल बाद ये सभी वादे रेलवे भूलता जा रहा है और अब तो चिरेका के लोगो से भी तीर-धनुष का निशान हटा दिया गया है। ऐसे ही कई मामलों को लेकर अखिल भारतीय अनुसूचित जाति/जनजाति रेलवे कर्मचारी संगठन के सदस्यों ने रेलवे बोर्ड नई दिल्ली के निदेशक और सदस्यों से मुलाकात की। जिसमें कई अन्य मुद्दों पर भी बात की गई। संगठन की ओर से 26 रेलवे जोन के सदस्यों ने बैठक में हिस्सा लिया। जिसमें चिरेका से सत्यनारायण मंडल और एससी ब्रम्ह शामिल थे। संगठन के जोन सेक्रेटरी इस्टर्न जोन समीर कुमार दास ने बताया कि आदिवासी परंपरा को दर्शाने वाले तीन-धनुष को चिरेका के प्रतीक चिह्न् में फिर से शामिल करने की मांग की गई है। अन्य मांगों में इंडक्शन कोटा के तहत एससी/एसटी कर्मियों को उम्र सीमा मेंं छूट देने, एरिया कमेटी में एससी/एसटी सदस्यों को शामिल करने, सभी स्तर के कर्मियों को मेडिकल ग्राउंड पर निःशुल्क एसी रेलवे पास उपलब्ध कराने, चित्तरंजन रेलवे स्टेशन पर उपासना एक्सप्रेस, कोलकाता-दरभंगा एक्सप्रेस, अकाल तख्त एक्सप्रेस, कुंभ एक्सप्रेस, गरीब रथ एक्सप्रेस, भागलपुर-यशवंतपुर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव करने की मांग की है। चिरेका लौटने पर नेताओं ने बताया कि रेलवे अपनी जिम्मेदारी और वादे भूल रहा है। ऐसा ही रहा तो आदिवासी उग्र आंदोलन करेंगे।

घोटाले की आशंका | डीसी ने समाज कल्याण, योजना विभाग और डाक विभाग के पदािधकारियों को चेताया

8 हजार 36 बेटियों का एनएससी किसके पास, हफ्तेभर में नहीं बताया तो होगा केस

सिटी रिपोर्टर|जामताड़ा

जामताड़ा जिला के लक्ष्मी लाडली याेजना के 8 हजार 36 लाभुकों का एनएससी जिला प्रशासन को नहीं मिल रहा है। योजना के प्रारंभ से लेकर अबतक लाभुक बेटियों को दिए गए एनएससी कहां है इसके बारे में न तो समाज कल्याण विभाग जामताड़ा कोई जानकारी के पास है, न जिला योजना विभाग को और न डाकघर को है। इस मामले को लेकर अब जिला प्रशासन न केवल हरकत में आया है बल्कि सीधी कार्रवाई के मूड है। सोमवार को समाहरणालय सभागार में आयोजित जिला समन्वय समिति की बैठक में उपायुक्त रमेश कुमार दुबे ने स्पष्ट शब्दों में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सह सीडीपीओ जामताड़ा चितरा यादव, जिला योजना पदाधिकारी केएन मिश्र व पूर्व के प्रभारी समाज कल्याण पदाधिकारी प्रतिभा कुजूर से कहा कि एक सप्ताह में स्थिति को स्पष्ट करें। अन्यथा सभी संबंधित के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। कहा कि जब राशि की निकासी हुई है तो विपत्र भी कार्यालय में उपलब्ध होना चाहिए।

डीसी ने कहा कि इस कार्य में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतें। डीसी ने कहा कि वर्ष 2011-12, 2012-13, 2013-14, 2014-15,2015-16 के लाभुक का एनएससी का विपत्र कहां है कार्यालय को उपलब्ध करावें। कहा कि यह मामले सीधे सीधे गबन का बनता है। हर हाल में इसकी जिम्मेदारी निकासी व व्यनन पदाधिकारी की बनती है। डीसी ने कहा कि संविदाकर्मी को डीआरडीए का नाजिर बना दिया गया है। किस परिस्थिति में ऐसा किया गया है यह समझ से पड़े है। ऐसी कर्मी की संविदा रद्द की जाएगी। वहीं दूसरी ओर डीसी ने कहा कि इस संबंध में उनके द्वारा समाज कल्याण के निदेशक मनोज कुमार को पूरी स्थिति की मौखिक जानकारी दी गई है। बिल से राशि की निकासी की गई है तो खर्च भी दिखाया जाना है। मौके पर डीपीओ ने बताया कि 149 लाभुक का छोड़ शेष मिल गया है। डीसी ने कहा कि जितनी राशि निकली है उतना एनएससी मिलना चाहिए। इस संबंध में पोस्टमास्टर जनरल को पत्र लिखने का भी निर्देश डीसी ने दिया। एनएससी क्रय में खर्च का बाउचर नहीं है यह गैर जिम्मेदाराना है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि इसमें घोटाला भी हो सकता है।

जिला समन्वय समिति की बैठक में शामिल उपायुक्त व अन्य पदािधकारी।

4 करोड़ 42 लाख 16 हजार एनएससी की हुई थी खरीदी

जिला योजना व समाज कल्याण विभाग द्वारा कुल 4 करोड़ 42 लाख 16 हजार रुपए का एनएससी क्रय लक्ष्मी लाडली योजना के तहत किया गया था। परंतु किसी भी विभाग के पास इसका हिसाब नहीं है। लक्ष्मी लाडली योजना का शुभारंभ राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2011 में किया गया था। योजना के तहत बेटी को प्रति वर्ष छह हजार रुपया दिया जाना है। प्रारंभ में यह योजना जिला योजना द्वारा दिया गया। बाद में समाज कल्याण विभाग द्वारा लाभुकों को योजना का लाभ दिया गया।

सिटी रिपोर्टर|जामताड़ा

जामताड़ा जिला के लक्ष्मी लाडली याेजना के 8 हजार 36 लाभुकों का एनएससी जिला प्रशासन को नहीं मिल रहा है। योजना के प्रारंभ से लेकर अबतक लाभुक बेटियों को दिए गए एनएससी कहां है इसके बारे में न तो समाज कल्याण विभाग जामताड़ा कोई जानकारी के पास है, न जिला योजना विभाग को और न डाकघर को है। इस मामले को लेकर अब जिला प्रशासन न केवल हरकत में आया है बल्कि सीधी कार्रवाई के मूड है। सोमवार को समाहरणालय सभागार में आयोजित जिला समन्वय समिति की बैठक में उपायुक्त रमेश कुमार दुबे ने स्पष्ट शब्दों में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सह सीडीपीओ जामताड़ा चितरा यादव, जिला योजना पदाधिकारी केएन मिश्र व पूर्व के प्रभारी समाज कल्याण पदाधिकारी प्रतिभा कुजूर से कहा कि एक सप्ताह में स्थिति को स्पष्ट करें। अन्यथा सभी संबंधित के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। कहा कि जब राशि की निकासी हुई है तो विपत्र भी कार्यालय में उपलब्ध होना चाहिए।

डीसी ने कहा कि इस कार्य में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतें। डीसी ने कहा कि वर्ष 2011-12, 2012-13, 2013-14, 2014-15,2015-16 के लाभुक का एनएससी का विपत्र कहां है कार्यालय को उपलब्ध करावें। कहा कि यह मामले सीधे सीधे गबन का बनता है। हर हाल में इसकी जिम्मेदारी निकासी व व्यनन पदाधिकारी की बनती है। डीसी ने कहा कि संविदाकर्मी को डीआरडीए का नाजिर बना दिया गया है। किस परिस्थिति में ऐसा किया गया है यह समझ से पड़े है। ऐसी कर्मी की संविदा रद्द की जाएगी। वहीं दूसरी ओर डीसी ने कहा कि इस संबंध में उनके द्वारा समाज कल्याण के निदेशक मनोज कुमार को पूरी स्थिति की मौखिक जानकारी दी गई है। बिल से राशि की निकासी की गई है तो खर्च भी दिखाया जाना है। मौके पर डीपीओ ने बताया कि 149 लाभुक का छोड़ शेष मिल गया है। डीसी ने कहा कि जितनी राशि निकली है उतना एनएससी मिलना चाहिए। इस संबंध में पोस्टमास्टर जनरल को पत्र लिखने का भी निर्देश डीसी ने दिया। एनएससी क्रय में खर्च का बाउचर नहीं है यह गैर जिम्मेदाराना है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि इसमें घोटाला भी हो सकता है।

किस वर्ष कितने की खरीदी व प्रखंडवार लाभुक

वित्तीय वर्ष राशि लाभुक

20111-12 43,14000 719

2012-13 91,80,000 1519

2013-14 1,30,68,000 2178

2014-15 2,16,54,000 3609

कुल 4,42,16,000 8036

स्रोत : जिला प्रशासन के आंकड़े

प्रखंड लाभुक

जामताड़ा 2275

नाला 1519

नारायणपुर 1466

कुंडहित 1757

फतेहपुर 429

करमाटांड़ 590

कुल 8036

सड़क निर्माण में हो रही गड़बड़ी की रिपोर्ट सौंपे

डीसी ने कहा गव्य विकास विभाग कार्य के प्रति शिथिल है। बिजली विभाग को निर्देश दिया गया कि प्राथमिकता के आधार पर स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में कनेक्शन देना सुनिश्चित करें। आरईओ के ईई से कहा गया कि जिले के वैसे विकास कार्य जो विगत पांच वर्ष से लंबित है के संवेदक का नाम सहित कार्य की सूची उपलब्ध करावें। ताकि संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकें। करमाटांड़ के एक मामले में कहा गया कि विद्यालय भवन में गोदाम बनाने वाले संवेदक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करावें। वहीं सड़क निर्माण में 20 एमएम के बदले 40 एमएम का स्टोन व्यवहार किए जाने के विरुद्ध रोड ताेड़कर जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश बीडीओ को दिया गया। कहा गया कि आदेश का अनुपालन हर हाल में सुनिश्चित करें। इस कार्य में कोताही नहीं बरतें। करमाटांड़ में पूर्व से गोदाम रहने के कारण गोदाम की राशि को सरकार से निर्देश प्राप्त कर जिले के दूसरे प्रखंड में बनाने का निर्देश दिया गया। पर्वत विहार के समक्ष भूमि अतिक्रमण करने के बारे में सीओ को कहा गया कि अतिक्रमणकारी से भूमि को मुक्त करावें तथा अतिक्रमणकारी की जरूरत को देखते हुए आवास योजना का लाभ दिलाने का कार्य करें। सामाजिक सुरक्षा कोषांग के नाजिर का प्रभार अनुमंडल कार्यालय के बैजू झा को देने का निर्देश दिया गया। साथ ही कोषांग के नाजिर के विरुद्ध कार्रवाई को कहा गया है।

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