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विभाग ने इस बार 12 अन्य ईआरएम स्कीम की स्वीकृति

विभाग ने इस बार 12 अन्य ईआरएम स्कीम की स्वीकृति प्रदान की है। इसमें कुल 227.47 करोड़ की राशि खर्च होगी जिसमें 7,440 हेक्टेयर...

Dainik Bhaskar

Mar 06, 2018, 03:25 AM IST
विभाग ने इस बार 12 अन्य ईआरएम स्कीम की स्वीकृति प्रदान की है। इसमें कुल 227.47 करोड़ की राशि खर्च होगी जिसमें 7,440 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता फिर से बहाल की जाएगी। जिसमें नकटीनाला, बिरहा, फुलवरिया, ऊपरी कररवार, मसरिया, विशनपुर, खतवा, चिंदा, तोरलो, बुचाओपा, गोंडा तथा जामुनिया जलाशय एवं सिंचाई योजना शामिल है। इन योजनाओं को इस वर्ष शुरू करके 2019-20 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

खुशखबरी

गढ़वा और पलामू की सूखी धरती को हरा-भरा करने के लिए सोन पाइप लाइन योजना इस साल होगी शुरू


पॉलिटिकल रिपोर्टर | रांची

झारखंड में सबसे अधिक सुखाड़ क्षेत्र रहने वाले पलामू एवं गढ़वा को इस वर्ष हरा-भरा करने एवं लोगों को पानी मुहैया कराना इस वर्ष का बजट मुख्य लक्ष्य होगा। झारखंड सरकार द्वारा केंद्रीय जल आयोग को भेजा गया डीपीआर को मंजूर हो गया है। केंद्र सरकार ने इसके लिए 1064 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। इस योजना के तहत उपरोक्त क्षेत्र में बांध, वीयर, नहर एवं वितरण प्रणाली का उपयोग नहीं होने के कारण जलसंकट अधिक है। इन जलाशयों में सोन नदी का लिफ्ट किया जाएगा। इससे न केवल कृषि क्षेत्र को हरा भरा किया जाएगा बल्कि पेयजल की उपलब्ध कराया जाएगा। इस क्षेत्र में बार-बार पड़ने वाले सुखाड़ पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा। इस क्षेत्र में सिंचाई के लिए 64.44 एमसीएम एवं पेयजल के लिए 5.57 एमसीएम अतिरिक्त जल कनहर एवं सोन नदियों से पाइप लाइन के द्वारा पानी को लिफ्ट कर इस क्षेत्र के निर्मित जलाशयों, बड़े तालाब एवं अन्य जल निकायों को जल उपलब्ध कराया जाएगा।

झारखंड द्वारा केंद्रीय जल आयोग को भेजा गया डीपीआर मंजूर, केंद्र ने दी 1064 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति

7,440 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता को फिर से बहाल करने की योजना

श्रृखंलाबद्ध चैक डैम से 52,100 हेक्टेयर भूमि सिंचित करने का लक्ष्य

लघु सिंचाई परिक्षेत्र अंतर्गत चालू वित्तीय वर्ष में 941 चेक डैम बनाए जा रहे हैं। जिसमें 233 पूरा कर लिया गया है। चालू वित्तीय वर्ष में 543 अतिरिक्त चेक एवं श्रृखंलाबद्ध चेक डैम बनाए जाने का लक्ष्य है। जिससे कुल 31,737 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का सृजन किया जाएगा। इस वित्तीय वर्ष में अतिरिक्त 398 चेक डैम बना कर अतिरिक्त 20,369 हेक्टेयर क्षेत्रों में सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। इस प्रकार इस वित्तीय वर्ष में कुल 52,100 हेक्टेयर भूमि वित्तीय वर्ष 2018-19 तक सिंचित हो जाएगी।

बुढ़ई जलाशय, कनहर एवं राढू जलाशय योजना भी शुरू होगी

इसके साथ ही साथ बुढ़ई जलाशय, कनहर सिंचाई परियोजना एवं राढू जलाशय योजना का विस्तृत डीपीआर तैयार करके केंद्रीय जल आयोग को भेजा चुका है। इसकी स्वीकृति इस वर्ष प्राप्त हो जाएगी। यह पूरी योजना 1520.87 करोड़ रुपए की है।

बाढ़ क्षेत्र :बाढ़ क्षेत्र में सुरक्षा एवं कटाव को रोकने तथा नदियों के ड्रेजिंग एवं डिसिल्टिंग कार्य किया जाएगा। इसमें कुल इस वित्तीय वर्ष में 26.80 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

ये योजना शामिल

जरमुंडी का कालीपुर एवं विशुनपुर जलाशय योजना, जरमुंडी-सरैयाहाट का भुरभुरी जलाशय योजना सारठ का बिरमाती जलाशय योजना, गिरिडीह का ब्रेतो एवं मध्य उसरी जलाशय योजना, कोडरमा का धनराज जलाशय योजना, सिमडेगा टेटई टांगर का राजबाशा जलाशय योजना, नीमडीह का बामनी जलाशय योजना, डुमरिया का का बाघाबंदी जलाशय योजना, अमरापाड़ा का बंसलोई जलाशय योजना, जरमुंडी का जमुनिया जलाशय योजना, ईचाक का भुसवा जलाशय योजना, बरकट्ठा का बरकट्ठा जलाशय योजना, हजारीबाग का दुलकी जलाशय योजना, घाटशिला का खरसोती जलाशय योजना, गढ़वा का फुलवरिया जलाशय योजना, रांची का सोनाडुब्बी जलाशय योजना, सिमडेगा का पालेमुरा जलाशय योजना, हरापानी जलाशय योजना, जगरनाथपुर का जगन्नाथपुर जलाशय योजना, कोलेबिरा का पाहनटोली जलाशय योजना, डुमरिया का रामीबांध जलाशय योजना, गोविंदपुर का खुदिया जलाशय योजना, मुसाबनी का दारंगा जलाशय योजना आदि योजना शामिल है।

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