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ट्रंसफॉर्मर में खराबी के कारण छह माह से बेकार पड़ा है गेड़िया का जलमीनार

भास्कर न्यूज|फतेहपुर/बिन्दापाथर गर्मी के दस्तक के साथ ही प्रखंड क्षेत्र का नदी, तालाब, कुआं सूखने लगा है। ऐसी...

Dainik Bhaskar

Mar 19, 2018, 03:30 AM IST
ट्रंसफॉर्मर में खराबी के कारण छह माह से बेकार पड़ा है गेड़िया का जलमीनार
भास्कर न्यूज|फतेहपुर/बिन्दापाथर

गर्मी के दस्तक के साथ ही प्रखंड क्षेत्र का नदी, तालाब, कुआं सूखने लगा है। ऐसी स्थिति में अब तक लोगों को ग्रामीण जलापूर्ति योजना का लाभ नहीं मिलने से काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। नाला प्रखंड क्षेत्र के गेड़िया गांव स्थित पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा करीब 60 लाख की लागत से जलमीनार का निर्माण किया गया था। कुछ दिनों तक गेड़ियावासियों को इसका लाभ भी मिला। लेकिन छह महीनों से पेयजल आपूर्ति पूर्ण रूप से ठप है। जानकारी के अनुसार बिजली के शाॅट सर्किट और ट्रांसफार्मर में खराबी के कारण बंद पेयजलापूर्ति ठप है। इस ग्रामीण जलापूर्ति योजना का लाभ से क्षेत्र के लोग वंचित है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के बीच सही सामंजस्य नहीं रहने के कारण क्षेत्र के अधिकांश जलापूर्ति योजनाएं बंद है। गेड़िया गांव स्थित पेयजल आपूर्ति के लिए कुछ वर्षों पूर्व ग्रामीण जलापूर्ति योजना पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा जलमीनार निर्माण किया था। जो कुछ महीनों तक पेयजल की आपूर्ति भी की गई। लेकिन पुन: यह पानी टंकी क्षेत्र के लिए शोभा की बस्तु बनी हुई है। इस बारे में वरुण मंडल, बलराम गोस्वामी, संजीत चौधरी, तपन घोष आदि का स्थानीय लोगों एवं समाज सेवियों कहना है कि गेड़िया गांव का कुल आबादी लगभग चार हजार से अधिक है और इस गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए सिर्फ एक ही पानी टंकी है। विगत छह महीने से बिजली टांसफार्मर के जल जाने के कारण कुआं से पानी को टंकी में भरा जाता है। वह यंत्र पूर्ण रूप से ठप है। ग्रामीणों का कहना है कि इस जलापूर्ति योजना को कई बार विभाग स्थानीय जनप्रतिनिधि को अवगत कराया गया है। लोगों का कहना है की विभागीय लापरवाही एवं उदासीनता के कारण यह महत्वाकांक्षी योजना पूर्ण रुप से बंद पड़ा हुआ है। वर्तमान समय में पूर्ण रुप से गर्मी का समय है और पेयजल की किल्लत सभी गांव में है। इस पानी टंकी को पुन: सुचारु रुप से चालू करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। इस पानी टंकी से 10 सार्वजनिक नल एवं 25 होम कनेक्शन दिया गया है। वर्तमान समय पर पूर्ण रुप से बंद पड़ हुआ है। जबकि जिला प्रशासन ने सभी क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विभागीय पदाधिकारी को निर्देश भी दिया है। लेकिन इसके बावजूद भी विभागीय पदाधिकारी इतने लापरवाह है कि पेयजल की सुविधा मुहिया कराने में नाकाम साबित हो रहे है। गेड़िया पानी टंकी को देखकर आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि पेयजल की व्यवस्था क्षेत्र पर किस हिसाब से हो रही है।

बेकार पड़ा जलमीनार और खराब पड़ा ट्रांसफ़ॉर्मर।

पानी टंकी को पुन: चालू करने की मांग उठी

इस पानी टंकी पर डीप बोरिंग, पंप भवन आदि आवश्यक सामग्री उपलब्ध रहने के बावजूद अबतक विभागीय प्रयास से ग्रामीण काफी नाखुश है। इस योजना को पुन: चालू करने के लिए ग्रामीणों में अब मांग जोर पकड़ने लगी है। ग्रामीणों के बताया कि आगामी पांच अप्रैल से गेड़िया स्थित बाबा कालिंजर मंदिर परिसर में श्रीमद् भागवत कथा सह प्रवचन का आयोजन किया जाएगा। जिससे क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु पहुंचेंगे और गर्मी का मौसम होने के नाते पेयजल की आवश्यकता अत्यधिक मात्रा में होगी। जिसके लिए यह जलमीनार का ठीक होना अति आवश्यक है।

भास्कर न्यूज|फतेहपुर/बिन्दापाथर

गर्मी के दस्तक के साथ ही प्रखंड क्षेत्र का नदी, तालाब, कुआं सूखने लगा है। ऐसी स्थिति में अब तक लोगों को ग्रामीण जलापूर्ति योजना का लाभ नहीं मिलने से काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। नाला प्रखंड क्षेत्र के गेड़िया गांव स्थित पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा करीब 60 लाख की लागत से जलमीनार का निर्माण किया गया था। कुछ दिनों तक गेड़ियावासियों को इसका लाभ भी मिला। लेकिन छह महीनों से पेयजल आपूर्ति पूर्ण रूप से ठप है। जानकारी के अनुसार बिजली के शाॅट सर्किट और ट्रांसफार्मर में खराबी के कारण बंद पेयजलापूर्ति ठप है। इस ग्रामीण जलापूर्ति योजना का लाभ से क्षेत्र के लोग वंचित है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के बीच सही सामंजस्य नहीं रहने के कारण क्षेत्र के अधिकांश जलापूर्ति योजनाएं बंद है। गेड़िया गांव स्थित पेयजल आपूर्ति के लिए कुछ वर्षों पूर्व ग्रामीण जलापूर्ति योजना पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा जलमीनार निर्माण किया था। जो कुछ महीनों तक पेयजल की आपूर्ति भी की गई। लेकिन पुन: यह पानी टंकी क्षेत्र के लिए शोभा की बस्तु बनी हुई है। इस बारे में वरुण मंडल, बलराम गोस्वामी, संजीत चौधरी, तपन घोष आदि का स्थानीय लोगों एवं समाज सेवियों कहना है कि गेड़िया गांव का कुल आबादी लगभग चार हजार से अधिक है और इस गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए सिर्फ एक ही पानी टंकी है। विगत छह महीने से बिजली टांसफार्मर के जल जाने के कारण कुआं से पानी को टंकी में भरा जाता है। वह यंत्र पूर्ण रूप से ठप है। ग्रामीणों का कहना है कि इस जलापूर्ति योजना को कई बार विभाग स्थानीय जनप्रतिनिधि को अवगत कराया गया है। लोगों का कहना है की विभागीय लापरवाही एवं उदासीनता के कारण यह महत्वाकांक्षी योजना पूर्ण रुप से बंद पड़ा हुआ है। वर्तमान समय में पूर्ण रुप से गर्मी का समय है और पेयजल की किल्लत सभी गांव में है। इस पानी टंकी को पुन: सुचारु रुप से चालू करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। इस पानी टंकी से 10 सार्वजनिक नल एवं 25 होम कनेक्शन दिया गया है। वर्तमान समय पर पूर्ण रुप से बंद पड़ हुआ है। जबकि जिला प्रशासन ने सभी क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विभागीय पदाधिकारी को निर्देश भी दिया है। लेकिन इसके बावजूद भी विभागीय पदाधिकारी इतने लापरवाह है कि पेयजल की सुविधा मुहिया कराने में नाकाम साबित हो रहे है। गेड़िया पानी टंकी को देखकर आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि पेयजल की व्यवस्था क्षेत्र पर किस हिसाब से हो रही है।

पिपला गांव के छह में से तीन चापाकल खराब

खराब पड़ा चापाकल दिखाते ग्रामीण।

भास्कर न्यूज|फतेहपुर/बिन्दापाथर

गर्मी के आहट के साथ हीं क्षेत्र में पेयजल की किल्लत बढने लगी है, लोग अभी से परेशान हाेने लगे है। नाला प्रखंड के पिपला गांव में गर्मी का प्रभाव अब दिखने लगा है। गांव के छ: में से तीन चापाकल का जलस्तर के नीचे चले जाने से चपाकल खराब हो गया है। जिससे पानी निकलना बंद हो गया है। चापाकल के खराब होने से ग्रामीण परेशान है। इस बारे में ग्रामीण दिलीप गोराई, विश्वनाथ गोराई, जियाराम गोराई, संतोष गोराई आदि ने बताया कि गांव की आबादी लगभग 700 है। जिसमें सरकार की ओर से पेयजल के लिए छ: चापाकल लगाया गया है। लेकिन यह चापाकल इस भीषण गर्मी में दम तोड़ रही है। गांव का तीन चापाकल खराब हो चुका है। चापाकल खराब होने से अब शेष तीन चापाकलों पर भीड़ बढ़ने लगी है। बड़ी आबादी होने की वजह से इन चापाकलों में अहले सुबह से पानी लेने के लिए लोगों का लंबा कतार लग जाता है। भीड़ रहने की वजह से कई बार ग्रामीणों में पानी लेने को लेकर हो-हल्ला भी हो जाता है। ग्रामीणों ने कहा इस चापाकल खराब होने की सूचना विभाग को दिए गया है, लेकिन मरम्मत नहीं हो सका है। ग्रामीणों ने अविलंब इन चापाकलों के मरम्मत कराने की मांग किया है।

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