--Advertisement--

भाई-बहन के प्यार का पर्व है सोहराय

Dainik Bhaskar

Jan 11, 2018, 06:35 AM IST

Nala News - प्रकृति पर्व सोहराय पर जुटा आदिवासी समाज, नृत्य से महिलाओं ने बांधा समा त्योहार को लेकर ग्रामीण इलाकों में बढ़ी...

भाई-बहन के प्यार का पर्व है सोहराय
प्रकृति पर्व सोहराय पर जुटा आदिवासी समाज, नृत्य से महिलाओं ने बांधा समा

त्योहार को लेकर ग्रामीण इलाकों में बढ़ी चहल-पहल

भास्करन्यूज | नाला

आदिवासीसमाज का प्रमुख बंदना सोहराय पर्व में भाई बहन में असीम प्यार और स्नेह का नजारा देखने को मिलता है इस पर्व के साथ कई प्रकार के प्राचीन गाथा जुड़ी हुई है। आदिकाल में रानी शासित एक राज्य में राजा को संकट से बहन ने ही बचाया था। धर्मगुरु सीतानाथ हांसदा के अनुसार रानी ने राजा से तीन सवाल किया था उसका जवाब नहीं देने पर मृत्युदंड की घोषणा की गई थी।इस दुखद संवाद सुनकर राजा की बहन अपने प्यारे भाई राजा को बचाने जल्द से रही थी। राह चलते थक जाने पर उन्होंने एक पेड़ के नीचे कुछ समय के लिए विश्राम किया। इतने में पेड़ के ऊपर बैठे एक पक्षी अपने भूखे संतान को अगले दिन नर मांस खिलाने का वायदा कर रही थी। यानी रानी के सवाल का जवाब देने में सक्षम नहीं होने पर राजा को मृत्युदंड मिलेगा। इस मौके पर पक्षी ने राजा से पुछे गए सवाल जवाब भी बच्चों को सुनाया। लेकिन पेड़ के नीचे विश्राम कर रही राजा की बहन ने भी जवाब सुनकर दौड़ते दौड़ते भाई के घर पहुंची। उसने सवाल का जवाब देते ही राजा ने चैन की सांस ली। इधर रानी सवाल और व्यवहार से असंतुष्ट राज दरबार के लोगों ने आक्रोश प्रकट किया जिससे रानी को प्राण गंवाना पड़ा। यही वजह है कि सोहराय पर्व के मौके पर एक खुंटा में पुआ पकवन ऊपर रखते हुए उसे तीर से घायल किया जाता है। यह रानी पर प्रहार करने का ही नजारा माना जाता है। भाई का प्राण बचाने के फलस्वरूप आज भी सोहराय पर्व के दौरान बहन की उपस्थिति अनिवार्य माना जाता है। इतना ही नहीं पर्व में हर आदिवासी परिवार में बहनों को विशेष सम्मान भी दिया जाता है।

X
भाई-बहन के प्यार का पर्व है सोहराय
Astrology

Recommended

Click to listen..