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जिले के 110 हेक्टेयर में होगी गरमा मूंग की खेती

गरमा मूंग की खेती की तैयारी जिले में आरंभ हो गई है। किसान खेतों की जुताई आरंभ कर दिया है। गरमा मूंग की खेती के लिए 15...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:00 PM IST

गरमा मूंग की खेती की तैयारी जिले में आरंभ हो गई है। किसान खेतों की जुताई आरंभ कर दिया है। गरमा मूंग की खेती के लिए 15 फरवरी से 15 मार्च तक अनुकुल समय है। इस दौरान किसान अपने खेत में मूंग बीज की बुआई कर सकते है। गरमा मूंग का बीज कलस्टर में वितरण किया जाएगा। इसलिए प्रगतिशील किसानों की सूची तैयार की जा रही है। गरमा मूंग की खेती में सिंचाई की आवश्यकता होती है। इसलिए वैसे खेत एवं किसान का चयन किया जा रहा है जहां सिंचाई की समस्या न हो। गरमा मूंग 65 से 70 दिनों का फसल है। इसकी खेती से मिट्‌टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। जिले के 110 हेक्टेयर खेत में गरमा मूंग की खेती की जाएगी जिसमें सभी छह प्रखंड जामताड़ा में 18 हेक्टेयर, नाला 20 हेक्टेयर, कुंडहित 20 हेक्टेयर, फतेहपुर 20 हेक्टेयर, करमाटांड़ 17 हेक्टेयर, नारायणपुर 15 हेक्टेयर में बीज बुआई का टारगेट है। बताया जाता है मूंग की खेती के लिए जामताड़ा जिला की मिट्‌टी काफी अनुकुल है। इसकी खेती जिले में प्रतिवर्ष अच्छी होती है। दलहन खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार को चाहिए कि यहां अधिक से अधिक मात्रा में गरमा मूंग की खेती हो। इसके लिए किसानों को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करें। एक तो किसानो की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी एवं दलहन के क्षेत्र में भी जिला आत्मनिर्भर बन सकेगा।

मूंग की खेती के लिए खेतों की जुताई शुरू, 15 फरवरी से 15 मार्च तक होगी बुआई

मूंग दाल की काफी है डीमांड

बाजार में मूंग दाल की मांग अच्छी रहने के कारण इसे बेचने के लिए किसाना को बाजार तलाशने की जरूरत नहीं होगी। बाजार में हरा मूंग करीब 80 से 90 रूपए किलो है। जामताड़ा जिला में मूंग दाल की मांग की पूर्ति पश्चिम बंगाल की मंडी पूरा करती है। किसान अगर जागरूक होकर मूंग की खेती करें तो अच्छा मुनाफा कमा सकते है।

10 फरवरी तक बीज पहुंचेगा जामताड़ा

गरमा मूंग की खेती समय पर हो सके इसके लिए विभाग द्वारा जिला को 10 फरवरी तक बीज उपलब्ध कराया जाएगा। करीब 30 क्विंटल बीज की आपूर्ति जिला में की जाएगी। बीज उपलब्ध होती ही जिला के किसानों को कलस्टर में बीज वितरण किया जाएगा। प्रगतिशिल किसानों को बीज दिया जाएगा। बीज वैसे किसानों को दिया जाएगा जहां सिंचाई का पर्याप्त साधन मौजूद हो।

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