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निताई गौर एक बार एसो हे, आई देखी...

वर्षो पुरानी परंपरा के अनुसार नाला प्रखंड एवं आसपास क्षेत्र में बांग्ला नया साल शुरू होते ही एक महीना के लिए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:30 AM IST

निताई गौर एक बार एसो हे, आई देखी...
वर्षो पुरानी परंपरा के अनुसार नाला प्रखंड एवं आसपास क्षेत्र में बांग्ला नया साल शुरू होते ही एक महीना के लिए बैशाखी कीर्तन शुरू हो जाता है। क्षेत्र में इस अनुष्ठान को नगर कीर्तन के नाम से भी जाना जाता है। क्षेत्र के दलाबड़, नीचेपाड़ा, देवली, कुमीरदाहा, कुलडंगाल, अफजलपुर, डाबर, महेशमुंडा समेत सभी छोटे बड़े गांव में बैशाख की पहली तिथि से इस अनुष्ठान का आगाज हो गया है।

शाम ढलते ही गांव गांव में कीर्तन मंडली इस धार्मिक कार्यक्रम के लिए ढोलक, मृदंग, करताल, बांसुरी आदि वाद्ययंत्र के साथ तैयार हो जाते हैं। गांव का मंदिर या एक टोला से प्रारंभ होकर कीर्तन में शामिल लोग संपूर्ण गांव का भ्रमण करते हैं। इस दरम्यान भगवान श्रीकृष्ण और गौरांग महाप्रभु से संबंधित गीत के साथ झुमते हुए हर कोई भाव विभोर हो उठते हैं। निताई-गौर एक बार एसो हे, आई देखी मन मिलिए दूजन हरिनामेर हार गांथी रे आदि प्राचीन गीत गाते हुए कीर्तन मंडली और साथ चल रहे श्रोता भक्त भी झुम उठते हैं। मिली जानकारी के अनुसार इस धार्मिक अनुष्ठान में कीर्तन कलाकार राधाकृष्ण, गौर निताई, शिव पार्वती, जोगाई मधाई आदि वेष में शामिल होते हैं। इस कीर्तन का दर्शन श्रवण के लिए गांव के सभी लोग निकलते हैं तथा भक्तिपूर्ण प्रणाम के साथ गांव समाज की मंगल कामना करते हैं। इस धार्मिक कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल बना हुआ है।

कीर्तन करते कलाकार और उपस्थित श्रद्धालु।

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