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दयामय दया करो हे, तुमी छाड़ा केउ नाय हे...

वर्षो पुरानी परंपरा एवं शंकर भगवान के प्रति प्रगाढ़ आस्था के अनुरूप देवलेश्वरधाम में चड़कमेला उत्सव को लेकर...

Dainik Bhaskar

Apr 13, 2018, 02:35 AM IST
वर्षो पुरानी परंपरा एवं शंकर भगवान के प्रति प्रगाढ़ आस्था के अनुरूप देवलेश्वरधाम में चड़कमेला उत्सव को लेकर पिछले एक सप्ताह से शिवभक्तों में अपार भक्ति और उत्साह भर आया है। बाबाधाम एवं आसपास क्षेत्र में गाजनेर बाबा देवलेश्वर हे, तुमी छाड़ा केउ नाय हे... आदि धार्मिक स्लोगन भी गूंजने से हर भक्त एवं आमजनों में भक्ति का संचार होने लगा है। प्रथा के अनुसार बाबाधाम के निकटस्थ जलाशय भलुसायर में पवित्र स्नान कर पूजारी द्वारा वैदिक रीति रिवाज के साथ सभी शिवभक्त को रक्षासूत्र पहनाया जाता है और इसी के साथ ही वे बाबा की जयकारा लगाते हुए पूजा, उपासना और धार्मिक गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं। गुरुवार की सुबह से क्षेत्र के सैकड़ों शिवभक्तों ने रक्षासूत्र धारण करते हुए बाबाधाम में धार्मिक गतिविधि शुरू किया। निर्धारित नियम के अनुसार वे सभी फलाहार में रहकर बाबा की उपासना में लीन रहते हैं। प्राचीन मान्यता के अनुसार कार्यक्रम के अंतिम दिन यानी 13 अप्रैल तक लगभग तीन हजार से अधिक शिवभक्त देवलेश्वर महादेव के प्रांगण में विभिन्न धार्मिक गतिविधि में अपना अपना योगदान देते हैं। शिवभक्त कांटों पर उछलना, आग लेकर खेलना, नूकीले तार से अंग छेद कर उसमे धागा पिरोंकर नृत्य करना, मन्नत के अनुसार कोड़ा प्रहार आदि हैरत अंगेज करतब देखने के लिए दूर दराज क्षेत्र से श्रद्धालु काफी संख्या में पहुंचते हैं।

देवलेश्वरधाम में भक्त फलाहार अनुष्ठान में पहुंचे हजारों श्रद्धालु

नाला | चैत माह के अंतिम सप्ताह में देवलेश्वरधाम में लगने वाला सप्ताह व्यापी चड़कमेला उत्सव के मौके पर गुरुवार को भक्त फलाहार के मौके पर शिवभक्त काफी खुश दिखे। बाबा के दरबार में शिवभक्त के अलावा चना गुड़ चढ़ाने के लिए क्षेत्रवासी की भीड़ उमड़ी। बुट फलाहार के नाम से प्रसिद्ध इस कार्यक्रम में अपनी अपनी मनोकामना के अनुसार बाबा के दरबार में क्षेत्र के श्रद्धालु चना एवं गुड़ अर्पण करते हैं। इस सामग्री से बाबा को प्रसाद अर्पण करने के उपरांत मंदिर परिसर में पहुंचने वाले शिवभक्त एवं नागरिकों के बीच प्रसाद वितरण किया जाता है। इसबार भी 10 क्विंटल से अधिक चना एवं गुड़ प्रसाद उपलब्ध होने के कारण महिला-पुरुष एवं बच्चे में उत्साह देखा गया। बाबाधाम में प्रचलित प्रथा के अनुसार प्रसाद वितरण के पूर्व भक्त एवं आमजनों के द्वारा मन्नत की जाती है तथा वह पूरा होने पर बाबा के दरबार में चना और गुड़ अर्पण किया जाता है। इस संबंध में मंदिर के पुजारी जीवन झा ने बताया कि वाणेश्वर महादेव को लेकर शिवभक्त गांव गांव में भ्रमण करते हैं। ग्रामीणों द्वारा फूल नैवेद्य के साथ पूजा की जाती है। और वाणेश्वर महादेव के मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद ही भक्तों के बीच प्रसाद वितरण शुरू किया जाता है।

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