Hindi News »Jharkhand »Nala» जहां भगवत कथा होता, वहां आनंद होता है : सुमन

जहां भगवत कथा होता, वहां आनंद होता है : सुमन

भास्कर न्यूज | नाला/बिन्दापाथर नाला विधानसभा क्षेत्र के बिन्दापाथर थाना अन्तर्गत गेड़िया गांव स्थित बाबा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 13, 2018, 02:35 AM IST

जहां भगवत कथा होता, वहां आनंद होता है : सुमन
भास्कर न्यूज | नाला/बिन्दापाथर

नाला विधानसभा क्षेत्र के बिन्दापाथर थाना अन्तर्गत गेड़िया गांव स्थित बाबा कालींजर मंदिर परिसर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया था। गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में ब्रज की फूलों की होली में लोग सराबोर हो गए। मौके पर वृन्दावनधाम के प्रख्यात कथा वाचिका पूज्या सुमन किशोरी जी ने श्रीमद् भागवत कथा विश्राम के अवसर पर भक्त सुदामा चरित्र, यदुवंशी का विनाश, भागवत कथा का सार एवं ब्रज की होली का दर्शन आदि का वर्णन किया। कथा वाचिका किशोरी जी के अमृतवाणी के सागर में हर कोई डूबे नजर आए।

मौके पर कहा की सुदामा जी भगवान श्री कृष्ण के परम मित्र तथा भक्त थे। वे समस्त वेद-पुराणों के ज्ञाता और विद्वान ब्राह्मण थे। श्री कृष्ण से उनकी मित्रता ऋषि संदीपनी के गुरुकुल में हुई। सुदामा जी अपना जीवन यापन ब्राह्मण रीति के अनुसार भिक्षा मांग कर करते थे। वे एक निर्धन ब्राह्मण थे तथा भिक्षा के द्वारा कभी उनके परिवार प|ी तथा बच्चे का पेट भरता तो कभी भूखे ही सोना पड़ता था। परन्तु फिर भी सुदामा इतने में ही संतुष्ट रहते और हरि भजन करते रहते बाद में वे अपनी प|ी के कहने पर सहायता के लिए द्वारिकाधीश श्री कृष्ण के पास गए।

परन्तु संकोचवश उन्होंने अपने मुख से श्री कृष्ण से कुछ नहीं मांगा। परन्तु श्री कृष्ण तो अन्तर्यामी हैं, उन्होंने भी सुदामा को खली हाथ ही विदा कर दिया। जब सुदामा जी अपने नगर पहुंचे तो उन्होंने पाया की उनकी टूटी-फूटी झोपड़ी के स्थान पर सुन्दर महल बना हुआ है तथा उनकी प|ी और बच्चे सुन्दर, सजे-धजे वस्त्रों में सुशोभित हो रहे हैं। इस प्रकार श्री कृष्ण ने सुदामा जी की निर्धनता का हरण किया। कथा वाचिका किशोरी जी ने भागवत कथा का सार का वर्णन करते हुए कहा की श्रीमद् भागवत कथा कलियुग का संजीवनी है। “वेद और उपनिषद् सनातन धर्म नामक वृक्ष की जड़े है और श्रीमद् भागवत उस वृक्ष का अमृत फल है। श्रीमद्भागवत की कथा को महाराज सुकदेव जी ने राजा परीक्षित को अपने मुखारविंद से सुनाया था।

जहां भगवत कथा होती है वहां परमात्मा के सानिध्य का आनंद ही कुछ और होता है। परम आनंद प्राप्त होता है। कथा वाचन के दौरान ब्रज की होली अध्याय के मौके पर ब्रजधरा के होली के सलौने उल्लास के सामने स्वर्ग का आनंद भी फीका लगने लगता है होली ब्रज में अनुराग, उल्लास, हास-परिहास का रमणीय आनंद लेकर अवतरित होती है। रस-रंग का महकता आह्लाद ब्रजभूमि के घर-घर का उत्सव बन जाता है। ब्रज के गली-मोहल्लों, घर-घर में सारे लोगों की मस्ती के कारण मानव निर्मित भेदभाव के पाखंड के सारे लिबास एक झटके में उतर जाते हैं और शेष रह जाता है, प्रेम का दिव्य स्वरूप। श्रीकृष्ण रसिया के सिरमौर आदर्श अराध्य हैं। मौके पर आयोजक मंडली एवं भक्तों द्वारा फूल की बरसा एवं नृत्य कर ब्रज की होली का लुत्फ उठाया गया। वहीं श्रद्धालुओं की लगातार उमड़ते सैलाब में आस्था की अद्भुत मिसाल कायम की है।

इस सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन गेड़िया सर्किल को 44 मौजा बान्दो, फुटावांध, श्रीपुर, निमवेड़ा, जाबरदाहा, निमडंगाल, इन्दुरहीड़, केशोरी, सालकुण्डा, लाकड़ाकुन्दा, मड़ालो, खैरा, पागला, कालाझरिया, जामजोड़िया आदि गावों के ग्रामीणों के द्वारा किया गया था जिस पर कमेटी के लोगो काफी सक्रिय थे। भागवत कथा के मौके पर बाबा कालींजर मंदिर परिसर भव्य मेला का आयोजन किया गया था मेला प्रेमियों ने भी मेला का जमकर आनंद उठाया।

भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण और राधा की झांकी निकालते कलाकार।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Nala

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×