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कृष्ण रासलीला व रुक्मणी विवाह की कथा से भावविभोर हुए श्रद्धालु

भास्कर न्यूज|नाला/बिंदापाथर नाला विधानसभा क्षेत्र के बिन्दापाथर थाना क्षेत्र के बड़वा गांव के राधा गिरिधारी...

Dainik Bhaskar

Apr 10, 2018, 02:40 AM IST
कृष्ण रासलीला व रुक्मणी विवाह की कथा से भावविभोर हुए श्रद्धालु
भास्कर न्यूज|नाला/बिंदापाथर

नाला विधानसभा क्षेत्र के बिन्दापाथर थाना क्षेत्र के बड़वा गांव के राधा गिरिधारी मंदिर परिसर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सह प्रवचन साेमवार काे भी जारी रहा। कथा के अायाेजन काे लेकर क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। सात दिवसीय कार्यक्रम लेकर क्षेत्र में भक्ति का माहौल बना हुआ है। आयोजक तारिणी दास बाबा एवं समस्त गोउर भक्त वृन्द द्वारा यह कार्यक्रम आयोजन किया गया। मौके पर सप्तम दिन कथा विश्राम के अवसर पर वृंदावनधाम के प्रसिद्ध प्रवचक सह कथा वाचक आचार्य गिरीधारी भैया जी महाराज ने श्रीमद् भागवत में श्री कृष्ण भगवान के रासलीला, रुक्मणी विवाह एवं भक्त सुदामा चरित्र आदि पर प्रवचन दिया।

मौके पर श्रीकृष्ण भगवान का रासलीला का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि शरद पूर्णिमा का शास्त्रों में बड़ा महत्त्व बताया गया है। पुराणों के अनुसार एक बार गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों की इस कामना को पूरी करने का वचन दिया। अपने वचन को पूरा करने के लिए भगवान ने रास का आयोजन किया। इसके लिए शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों को मिलने के लिए कहा गया। सभी गोपियां सज-धज कर नियत समय पर यमुना तट पर पहुंच गई। इसके बाद भगवान ने रास आरंभ किया। माना जाता है कि वृंदावन स्थित निधिवन ही वह स्थान है, जहां श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। यहां भगवान ने एक अद्भुत लीला दिखाई। जितनी गोपियां थीं, उतने ही श्रीकृष्ण के प्रतिरूप प्रकट हो गए। सभी गोपियों को उनका कृष्ण मिल गया और दिव्य नृत्य एवं प्रेमानंद शुरू हुआ। माना जाता है कि आज भी शरद पूर्णिमा की रात में भगवान श्रीकृष्ण गोपिकाओं के संग रास रचाते है। इसलिए प्रेम निवेदन के लिए शरद पूर्णिमा का दिन उत्तम माना गया है। शरद पूर्णिमा की रात में चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है, इसलिए चन्द्रमा का सौन्दर्य पूरे वर्ष में इस रात सबसे अधिक निखर कर आता है। तथा रुक्मणी विवाह का वर्णन किया एवं आयोजक मंडली द्वारा झाकीं प्रस्तुत कर भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मणी का विवाह बड़ी ही धूमधाम से मनया। जिससे पूरे परिसर में उपस्थित श्रद्धालु भक्ति से नृत्य किये। एवं भक्त सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए सुदामा जी भगवन श्री कृष्ण के परम मित्र तथा भक्त थे। वे समस्त वेद-पुराणों के ज्ञाता और विद्वान ब्राह्मण थे। श्री कृष्ण से उनकी मित्रता ऋषि संदीपनी के गुरुकुल में हुई। सुदामा जी अपना जीवन यापन ब्राह्मण रीति के अनुसार भिक्षा मांग कर करते थे। वे एक निर्धन ब्राह्मण थे तथा भिक्षा से कभी उनके परिवार प|ी तथा बच्चे का पेट भरता तो कभी भूखे ही सोना पड़ता था। परन्तु फिर भी सुदामा इतने में ही संतुष्ट रहते और हरि भजन करते रहते। बाद में वे अपनी प|ी के कहने पर सहायता के लिए द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण के पास गए। परन्तु संकोचवश उन्होंने अपने मुख से श्रीकृष्ण से कुछ नहीं मांगा। परन्तु श्री कृष्ण तो अन्तर्यामी हैं, उन्होंने भी सुदामा को खाली हाथ ही विदा कर दिया। जब सुदामा जी अपने नगर पहुंचे तो उन्होंने पाया की उनकी टूटी-फूटी झोपडी के स्थान पर सुन्दर महल बना हुआ है तथा उनकी प|ी और बच्चे सुन्दर, सजे-धजे वस्त्रो में सुशोभित हो रहे हैं। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने सुदामा जी की निर्धनता का हरण किया। ततपश्चात सोमवार दोपहर कथा के विश्राम अवसर सभी श्रद्धालु ने खिचड़ी प्रसाद वितरण किया। जिसमें काफी संख्या में लोगों ने उपस्थित हो कर प्रसाद ग्रहण किया। इस सात दिवसीय कार्यक्रम लेकर वड़वा, मंझलाडीह, बाघमारा, ढाड़, चड़कमारा, बाबुडीह, मोहनावॉक, जलांई, मोहजोड़ी, हदलवॉक, नामुजलाई, पिपला, सहित पूरे क्षेत्र में भक्त का माहौल बना हुआ रहा।

बड़का गांव में प्रवचन करते गिरिधारी जी महाराज।

प्रवचन सुनने के लिए जुटे श्रद्धालु।

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