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श्रीमद्भागवत कथा सुनने उमड़े श्रद्धालु

भास्कर न्यूज| नाला/बिन्दापाथर सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा सह प्रवचन का आयोजन होने से क्षेत्र में भक्तिरस...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 08, 2018, 03:10 AM IST

श्रीमद्भागवत कथा सुनने उमड़े श्रद्धालु
भास्कर न्यूज| नाला/बिन्दापाथर

सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा सह प्रवचन का आयोजन होने से क्षेत्र में भक्तिरस प्रवाहित होने लगा है। नाला विधानसभा क्षेत्र के बिन्दापाथर थाना अन्तर्गत गेड़िया गांव स्थित बाबा कालींजर मंदिर परिसर में कथा के दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इस मौके पर वृन्दावनधाम के प्रख्यात कथा वाचिका पूज्य सुमन किशोरी जी ने भीष्म पितामह की स्तुति एवं शुकदेव मुनी का जन्म से आधारित श्रीमद् भागवत कथा का व्याख्यान करते हुए कहा कि जो भी भक्त इस स्तुति को ह्रदय से सुनेगा और याद करके जीवन में उतारेगा उसके ह्रदय में भगवान श्री कृष्ण सदा विराजमान रहेंगे। उन्होंने कहा कि भीष्म पितामह जी की स्तुति में चार चीजे प्रमुख है। इति, मति, रति एवं गति का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। “इति” भीष्म जी अपनी स्तुति इति शब्द से शुरू करते हैं। जिसका अर्थ होता हैं अंत। मानो भीष्म पितामह जी कहते हैं प्रभु मेरे अब तक की स्तुति पूरी थी या नहीं थी वो तो आप जानो । लेकिन ये मेरी अंतिम स्तुति है। इसके बाद में स्तुति नहीं कर पाउंगा। “मति” भीष्म पितामह जी ने कहा की मेरी एक बेटी हैं। मैं चाहता हूं जिसका विवाह आपके साथ हो। कृष्ण जी कहते हैं- बाबा। मैंने तो सुना था आप आजीवन ब्रह्मचारी रहे हैं। फिर आपकी बेटी कहां से आ गई। इसपर भीष्म जी कहते हैं कि कान्हा मेरी बेटी अाैर कोई नहीं बल्कि मेरी बुद्धि हैं। आप उससे विवाह कर लो। क्योंकि मैं नहीं चाहता की मेरी ये बेटी और किसी के साथ ब्याही जाये। आपके चरणों में मेरी मति बुद्धि समर्पित हैं। “रति” भीष्म जी कहते हैं प्रभु मेरी अगर कहीं रति प्रेम हो तो केवल और केवल आपमें हो। क्योकि केवल आपसे ही प्रेम सार्थक हैं। गति-अंत में भीष्म पितामह जी कहते हैं की प्रभु! मेरी गति भी आप में ही होनी चाहिए। मेरा अंत समय है। इसलिए मैं चाहता हूं कि आपके श्री चरणों में मेरी गति हो जाये। वहीं शुकदेव मुनी का जन्म का व्याख्यान करते हुए सुमन किशोरी जी ने कहा की महर्षि वेद व्यास के अयोनिज पुत्र थे और यह बारह वर्ष तक माता के गर्भ में थे शुक जान बचाने के लिए तीनों लोकों में भागता रहा, भागते-भागते वह व्यास जी के आश्रम में आया और सूक्ष्मरूप बनकर उनकी प|ी के मुख में घुस गया। वह उनके गर्भ में रह गया। ऐसा कहा जाता है कि ये बारह वर्ष तक गर्भ के बाहर ही नहीं निकले। जब भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं आकर इन्हें कहा कि बाहर निकलने पर तुम्हारे ऊपर माया का प्रभाव नहीं पड़ेगा, तभी ये गर्भ से बाहर निकले और व्यासजी के पुत्र कहलाये। इस मर्म स्पर्शी कथा के साथ श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे । गेड़िया सहित बान्दो, फुटावांध, श्रीपुर, निमवेड़ा, जाबरदाहा, निमडंगाल, इन्दीरहीड़, किशोरी, सालकुण्डा, लाकड़ाकुन्दा, मड़ालो, खैरा, पागला, कालाझरिया, जामजोड़िया आदि गेड़िया सर्किल के 44 मौजा सहित पुरे क्षेत्र के लोग शाम चार बजे से ही सेकड़ों की तादात में श्रद्धालु पहुंच कर देर रात कर भागवत कथा का श्रवण किया। इस दौरान कमेटी के सदस्य काफी सक्रिय दिखे।

श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करतीं साध्वी।

बढ़ई समाज की वार्षिक काली पूजा में सैकड़ों की संख्या में जुटे भक्त

भास्कर न्यूज| मिहिजाम

क्षेत्र में बढ़ई समाज के लोगों द्वारा पूजी जा रही 10 महाविद्यालयों की देवी काली के 102 वर्ष हो गए। देवी काली के नाम से प्रसिद्ध काली तल्ला इलाके में स्थित मंदिर में वर्ष 1916 से बढ़ई समाज के लोग यहां पूजा करते और देवी को बकरे की बली प्रदान करते आ रहे है। मान्यता है कि क्षेत्र में बहुत पहले संक्रामक बीमारियों का उत्पात बढ़ने के बाद लोगों ने देवी की उपासना कर लोगांे की रक्षा करने की प्रार्थना की थी। तभी से यहां हर वर्ष देवी की पूजा में क्षेत्र के सैकडों लोग जमा होते है। आम तौर पर यह पूजा बैसाख मास की पहली शनिवार को मनाई जाती है। लेकिन इस बार यह पूजा शनिवार को बैसाख कृष्ण पक्ष अमावस्या पर मनाई गयी। जहां करीब 40 बकरे की बली दी गयी। मान्यता के अनुसार पूजा से पूर्व समाज की महिलाओं ने कालीतल्ला ग्राम रक्षा काली पूजा की तैयारी को लेकर परम्परा अनुसार बढ़ई समाज की महिलाओं ने घर घर से पूजा के लिए अनाज, अगरबत्ती, दूध, दाल आदि सामग्रियों का भीक्षाटन किया। इस दौरान दर्जनों बढ़ई समाज की महिलाओं ने स्नान आदि के बाद नए वस्त्र पहन कर सात गांव में भीक्षाटन किया। जिसकी तैयारी में पूरा बढ़ई समाज लगा था। मंदिर को भी रंग रोगन से सजाया संवारा गया। महिलाओं ने हिलरोड, कुर्मिपाड़ा, कानगोई, मालपाड़ा, राजबाड़ी में भीक्षाटन किया। ग्राम रक्षा काली मंदिर में शनिवार को पूजा का आयोजन किया गया।

काली पूजा में शामिल श्रद्धालुगण।

कालीपूजा का हुआ समापन

नाला|नाला प्रखंड के कुलडंगाल गांव के रक्षा काली मंदिर में शनिवार को हर्षोल्लास के साथ काली माता की पूजा अर्चना की गई। इस चैती कालीपूजा के मौके पर गांव के महिला पुरुष श्रद्धालु काफी संख्या में पहुंचे। पुजारी गोवर्धन झा ने बेलपत्र, लाल जबा आदि फूल फल, नैवेद्य के साथ वैदिक रीति रिवाज से मां की पूजा की। उपस्थित श्रद्धालुओं ने शंखा, सिंदुर, साड़ी के साथ भक्ति भाव से मां की पूजा करते हुए परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना किया। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पंडित तपन कुमार झा ने मां के दरबार में चंडी पाठ किया जिसे सुनने के लिए काफी संख्या में लोग पहुंचे। इस अवसर पर करुणामय कर, पूरण भंडारी, जीतेन्द्र दास, शिवानी भंडारी, ललन झा, लक्ष्मण ठाकुर, बिट्टू गोराई, चिंतामणि पासवान, सुलेखा दास, लव किंकर झा, अजय कुमार दास, श्रावणी दास, बिमल मजुमदार आदि उपस्थित थे।

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