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पराली न जलाने वाले किसानों को इंसेंटिव देगी केंद्र सरकार

1. मलचिंग: धान की कटाई के बाद बचे हिस्से को मशीन की मदद से बाहर निकाल कर खेतों में छोड़ दिया जाता है। वह अपने-आप गलकर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 09, 2018, 03:20 AM IST

1. मलचिंग: धान की कटाई के बाद बचे हिस्से को मशीन की मदद से बाहर निकाल कर खेतों में छोड़ दिया जाता है। वह अपने-आप गलकर मिट्‌टी में मिल जाते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और खाद की जरूरत कम पड़ती है।

2. पराली चार: मिट्टी और ईट के बने छोटे से घर में पराली भरकर जलाई जाती है। ऑक्सीजन की कमी के चलते पराली धीरे-धीरे जलती है और कम प्रदूषण फैलाती है। इस दौरान जमा हुई कालिख को मिट्टी में मिलाने से उर्वरा शक्ति बढ़ती है। केमिकल का इस्तेमाल कम करना पड़ता है।

3. पराली से बने पेलेट (ब्लॉक): कोयले से चलने वाले थर्मल पावर प्लांट में पराली से बने पेलेट इस्तेमाल किए जाएंगे। एनटीपीसी ने तो पेलेट की खरीदारी के लिए टेंडर भी निकाल दिया है। पेलेट को कोयले के साथ मिलाकर प्लांट में इस्तेमाल किया जाता है।

पंचायतों को भी 1 लाख का इनाम, यूपी, राजस्थान, पंजाब-हरियाणा योजना में

भास्कर न्यूज | नई दिल्ली

प्रदूषण की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार खेतों में पराली नहीं जलाने वाले किसानों को इंसेंटिव देने की तैयारी कर रही है। जिस पंचायत के एक भी खेत में पराली नहीं जलेगी, उसे भी 1 लाख रु. मिलेगा। इसके लिए क्लीन एयर इम्पैक्ट फंड बनाया जा रहा है। पराली जलाने पर रोक के लिए बजट में आवंटित 1200 करोड़ रु. इसी फंड में इस्तेमाल किए जाएंगे। इंसेंटिव की रकम अभी सरकार के स्तर पर तय की जानी बाकी है। यह योजना जून-जुलाई में खरीफ के सीजन की शुरुआत तक अमल में आ सकती है।

सूत्रों के अनुसार इसमें अकेले पंचायतों के लिए करीब 700 करोड़ रु. रखे जाने का अनुमान है। मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, यूपी और राजस्थान इस योजना में शामिल होंगे। यह योजना कृषि मंत्रालय, नीति आयोग, पर्यावरण मंत्रालय, बिजली मंत्रालय, आईआईटी कानपुर एवं औद्योगिक संगठन सीआईआई ने मिलकर तैयार की है। इसकी नोडल एजेंसी पर्यावरण मंत्रालय होगा। योजना का मकसद पूरे उत्तर भारत में वायु प्रदूषण को नियंत्रित रखना है। पिछले साल नवंबर-दिसंबर में उत्तर भारत में भारी वायु प्रदूषण हुआ था।

इस काम के लिए बजट में 1200 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे

अकेले पंचायतों के लिए 700 करोड़ तक का हो सकता है फंड

योजना जून-जुलाई में खरीफ सीजन से शुरू होगी

जांच बाद सीधे किसानों के खाते में जाएगी इंसेंटिव की रकम

योजना तैयार करने से जुड़े सीआईआई के एक पदाधिकारी ने बताया कि पराली नहीं जलाने पर किसानों को खर्चीले विकल्प अपनाने पड़ेंगे। इसमें उनकी मदद के लिए यह इंसेंटिव दिया जाएगा। आवेदन करने वाले किसानों को इंसेंटिव देने से पहले जांच की जाएगी कि उसने खेत में पराली जलाई है या नहीं। इसके बाद लाभ डीबीटी के जरिये सीधा खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। पराली से बॉयो एथेनॉल और बिजली बनाने के प्लांट लगाने के लिए भी सरकार इंसेंटिव देने की तैयारी में है।

4 राज्यों में सर्वाधिक जलाते हैं

पंजाब, यूपी, हरियाणा-राजस्थान के 24 से अधिक जिलों में पराली जलाई जाती है। पंजाब के 5 जिलों मोगा, पटियाला, लुधियाना, संगरूर-बरनाला में सर्वाधिक पराली जलती है। धान की खेती के रबी फसल की बुवाई जल्दी करने के लिए किसान खेतों में पराली जला देते हैं।

इन तकनीकों से निपटाएगी सरकार

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