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नेता पइसा बांट लेता है, हमलोग बगुला जइसा ताकते रह जाते हैं

सतीश कुमार (गोमिया से लौटकर) गोमिया और सिल्ली विधानसभा के वोटर डेढ़ साल के लिए 28 मई को अपना विधायक चुनेंगे। दोनों...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 15, 2018, 03:20 AM IST

नेता पइसा बांट लेता है, हमलोग बगुला जइसा ताकते रह जाते हैं
सतीश कुमार (गोमिया से लौटकर)

गोमिया और सिल्ली विधानसभा के वोटर डेढ़ साल के लिए 28 मई को अपना विधायक चुनेंगे। दोनों क्षेत्रों में चुनावी तपिश बढ़ती जा रही है। इसका जायजा लेने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने गोमिया विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया। पाया कि यहां के वोटर खासे नाराज हैं। वे कहते हैं चुनाव आता है, नेता लोग आपस में पइसा बांट लेते हैं, हमलोग बगुला जइसा ताकते रह जाते हैं। वोट से पहिले नोट का खूब खेला चल रहा है। हमलोग भी संकल्प लिए हैं, इस बार नोट वाले को नहीं, विकास का काम करने वाले को वोट देंगे। जातीय समीकरण से इतर इस बार विकास मुख्य मुद्दा बना है। सभी प्रत्याशियों की अपनी पकड़ वाले जातिगत वोटों पर तो नजर है ही, लेकिन इसे खुलेआम भुनाने की बजाय वोटरों के बीच वे विकास कार्यों की दुहाई दे रहे हैं।

सिल्ली में जहां आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो और झामुमो की सीमा देवी के बीच सीधा मुकाबला है, वहीं गोमिया में झामुमो की बबिता देवी, आजसू के डॉ. लंबोदर महतो और भाजपा के माधवलाल सिंह के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा।

गोमिया विधानसभा क्षेत्र : जातीय समीकरण से इतर इस बार विकास बना है मुख्य मुद्दा

हिसिम और त्रियोनाला से लाइव

पश्चिम बंगाल बार्डर से सटे ये दोनों गांव पहाड़ की तलहटी में बसे हैं। कभी यहां नक्सलियों का राज था, अब शांति है। हिसिम के विजय करमाली बताते हैं कि नक्सली अक्सर गांव में आ धमकते थे। खाना बनाते का आदेश देते। नहीं मानने वालों के साथ मारपीट करते थे। कई दिन हमें भूखे पेट सोना पड़ा। वे अपना हथियार भी गांव में छिपा कर रखते थे। कई साल पहले मुखिया सुखदेव मुर्मू की हत्या कर दी थी। अब इन समस्याओं से मुक्ति मिल गई है। त्रियोनाला गांव के मुुखिया बलेश्वर बेदिया के घर पर ताला लगा था। पड़ोस वाले घर में बैठी महिलाएं बताती हैं कि नक्सली तो अब नहीं आते, लेकिन मलेरिया और हाथी का प्रकोप अब भी जारी है। गांव वाले उसी को वोट देंगे, जो इससे निजात दिलाने की बात करेगा।

त्रियोनाला गांव में फुर्सत के वक्त चुनाव पर चर्चा करतीं महिलाएं।

कल-कारखाना नहीं, पलायन सबसे बड़ी समस्या

गोमिया विस क्षेत्र में सबसे बड़ा पंचायत माने जाने वाला मंजूरा पागरटांड में महतो, मुसलमान, आदिवासी और दलित की संख्या सबसे ज्यादा है। सबसे बड़ी समस्या पलायन है। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा से भी लोग वंचित हैं। पंचायत में 11 स्कूल हैं, लोगों की निर्भरता खेती पर है। यहां के लोग त्रिकोणीय संघर्ष की बात करते हैं।

पढ़ा लिखा गांव चंडीपुर :चंडीपुर में 70 घर ब्राह्मण के और 300 घर महतो के हैं। तेली, करमाली की भी अच्छी खासी आबादी है, यहां मुस्लिम परिवार नहीं हैं। कई प्रोफेसर, साइंटिस्ट, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी दिए। धनेश्वर झा, प्रभात चंद्र झा कहते है अभी हम प्रत्याशियों को परख रहे हैं।

चौक-चौराहों पर लंबोदर, योगेंद्र और माधो बाबू की चर्चा

गोमिया, पेटरवार और कसमार प्रखंड के चौक-चौराहों पर माधो बाबू, लंबोदर बाबू और योगेंद्र प्रसाद की चर्चा छिड़ जाती है। कोई कहता सबसे पढ़े लिखे तो लंबोदर बाबू ही हैं, कोई कहते हैं माधो बाबू तीन बार विधायक रहे, काम तो ऊ भी किए हैं। योगेंद्र प्रसाद के समर्थकों कहते है कि सत्ता में नहीं रहने पर भी काम तो किए ही हैं।

कोयला, पानी, रेलवे स्टेशन हैं पर कारखाना नहीं :विधानसभा क्षेत्र में कोयला है, पानी है, बिजली का उत्पादन होता है, खाली जमीन है, मजदूर भी हैं, लेकिन फैक्टरियां नहीं लगीं। इस कारण बेरोजगारी और पलायन की समस्या है। रोजगार की तलाश में लोग दूसरे राज्यों में भटक रहे हैं।

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Web Title: नेता पइसा बांट लेता है, हमलोग बगुला जइसा ताकते रह जाते हैं
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