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स्कूल में चापानल खराब होने से भटकते हैं छात्र

शैक्षिक अंचल गेड़िया स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय कालाझरिया में इन दिनों पेयजल का संकट गहराने लगा है। इस कारण से...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 09, 2018, 03:25 AM IST

स्कूल में चापानल खराब होने से भटकते हैं छात्र
शैक्षिक अंचल गेड़िया स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय कालाझरिया में इन दिनों पेयजल का संकट गहराने लगा है। इस कारण से एमडीएम तैयार करने तथा छात्र छात्राओं को पेयजल के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विद्यालय परिसर में वर्षो पहले गाड़े गए एक अदद चापानल से रूक रूक कर पानी निकलता है तथा जरा तेज गति से हैंडिल चलाने के साथ ही गंदा पानी का निकलना शुरू हो जाता है। इस तरह के रंगीन पानी को देखकर भले ही बड़े बच्चे उसे नहीं पीते है। लेकिन मौका मिलने तथा इस मौसम में प्यास लगते ही विद्यालय के छोटे छोटे बच्चे उस पानी को ही मजबूरन पीते हैं। इस पानी से बीमारी होने तथा अस्वस्थ होने की संभावना भी बढ़ गई है। यहां कि समस्या के बारे में विद्यालय के प्रधान शिक्षक कृष्ण प्रसाद ने बताया कि चापानल मरम्मत के लिए मुखिया और विभागीय अभियंता को लगातार सूचना के साथ साथ अनुरोध किया गया है। इसके बावजूद समस्या यथावत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि थोड़ी दूर में एक अन्य चापानल है लेकिन स्कूल में बच्चों की संख्या 260 होने तथा कक्षा चलने के समय अन्य कमरे से निकलकर छोटे छोटे बच्चे कभी कभी जोर से हैंडिल चलाकर इस पानी को ही पीते हैं। इस विद्यालय में व्याप्त पेयजल समस्या का निदान के लिए शिक्षक एवं उनके अभिभावकों ने विभागीय अधिकारी से अपील किया है।

गर्मी से निजात को तलाबों में लोग लगा रहे डुबकी

भास्कर न्यूज|मिहिजाम/चित्तरंजन

अभी भीषण गर्मी का कहर बाकी है। मई माह प्रवेश करते ही गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। पिछले दो दिनों से कोई बारिश कोई हवा नहीं चलने से तापमान का पारा 40 से 45 डिग्री तक रिकाॅर्ड किया जा रहा है। इस वर्ष की अब तक की सबसे भीषण गर्मी का तापमान रिकाॅर्ड किया गया है। न्यूनतम पारा 25 से 30 डिग्री सेंल्शियस के आस पास दर्ज किया जा रहा है। जो रात के 12-1 बजे के बाद महसूस किया जा रहा है। सुबह सूर्याेदय होते ही सूर्य देवता अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दे रहे है। लोगों के तन बदन से पसीने छूट रहे है जो सूखने का नाम नहीं ले रहेे है। ज्यादातर समय लोग घरों में बिजली के पंखों के नीचे, पेड़ों की छांव, एसी, फ्रीज, ठंडा पेय लेकर बिता रहे है। घंटों लोग नहाने, पानी में डूबे रहने, और हलक तर करने में लगा रहे है। बाजारों में भी ठंडा पेय पदार्थ, सत्तू का जूस, मौसमी का जूस, गन्ने का जूस, कोल्ड ड्रिंक्स, लस्सी आदि पेय पदार्थाें की स्टाॅल पर भीड़ देखी जा रही है। रही सही कसर जब बिजली गुल हो रही है तब लोगों की निकल रही है। लोग न बाहर चैन पा रहे है और न घर में। अन्य जीव जंन्तुओं की भी यही हाल है। आम लोगोें के लिए इस गर्मी मंें पाॅकेट और शरीर दोनों से पसीने छूट रहे है। कहीं लोग जब जाम में फंस रहे है तब तो भगवान को ही याद कर रहे है।

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