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यहां सरकारी स्कूलों को बंद करा छपवा रहे अपनी किताबें, पढ़ा रहे- च से चाेर, नेहरू चोरों का प्रधानमंत्री था

राष्ट्र विरोधी पत्थलगड़ी करवाने वाले इन बच्चों के लिए जो पढ़ाई करवा रहे हैं, वह डराने वाली है।

Danik Bhaskar | Mar 09, 2018, 05:22 AM IST
हाथों में छड़ी लेकर ब्लैक बोर् हाथों में छड़ी लेकर ब्लैक बोर्

रांची(झारखंड). शासन-प्रशासन के लाख दावों के बावजूद प्रदेश का खूंटी जिला देश और संविधान विरोधी शक्तियों की गिरफ्त में फंसता जा रहा है। अब सरकारी स्कूलों को भी बंद कराया जा रहा है। बच्चों के लिए पेड़ के नीचे ग्रामसभा के लोग अलग से पढ़ाई करा रहे हैं। किताबें भी अलग से ही छपवाई जा रही हैं। बच्चों को जो पढ़ाया जा रही है, वह डराने वाला है। मासूमों के दिल और दिमाग में राष्ट्र और संविधान के लिए जहर भरा जा रहा है। जिन बच्चों को च से चरखा और छ से छतरी पढ़ाया जाता था, उन्हें च से चोर और छ से छलकपट पढ़ाया जा रहा है। टीचर बता रहे हैं- च से चाचा नेहरू, नेहरू चोरों के प्रधानमंत्री थे। व से विदेशी। आदिवासियों को छोड़ बाकी सभी विदेशी हैं।

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सुबह होते ही बच्चे पढ़ने के लिए गांव के पाठशाला पहुंचते हैं। उन्हें पेड़ के नीचे ले जाया जाता है। पत्थलगड़ी (आदिवासियों की एक परंपरा) की आड़ में संविधान विरोधी काम करने वाले लोग टीचर की भूमिका में आते हैं। हाथों में छड़ी लेकर ब्लैक बोर्ड में इन शब्दों को बोल-बोल कर पढ़ाया जा रहा है।

घ- घंटी बजाने वाला ग्रामीण विरोधी है।
ड.- अंग-अंग में रूढ़ी व्यवस्था है।
च- चाचा नेहरू चोरों का प्रधानमंत्री था
छ- छलकपट, ओआईजीएच, लोक छलकपट होते हैं।
ख- खनिज संपदा आदिवासियों का है
ग- ग्राम सभा आदिवासियों का रूढ़ी प्रथा।
अ- आदिवासी
भी- विदेशी
सी- छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम
डी- धरती
अ- अधिग्रहण

अब तक प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया

- जिले के उदबुरू, झिकीलता व भंडरा गांव के बच्चों को सरकारी स्कूल में जाने से ग्राम सभा ने मना कर दिया है। इसके बाद गांव के शिक्षित युवक खुद बच्चों को ग्राम सभा के संचालित एजुकेशन सेंटर में पढ़ा रहे हैं। सरकारी शिक्षा के बहिष्कार को लेकर सरकारी स्कूल के चहारदीवारी पर लिखकर ग्राम सभा ने फरमान जारी किया है।

- जिले के उदबुरू गांव में एक प्राथमिक विद्यालय है। जिसमें 42 बच्चों का नामांकन है। ग्राम सभा ने 15 फरवरी को सरकारी स्कूली शिक्षा का बहिष्कार करने का फरमान जारी किया। उसी दिन से स्कूल का संचालन बंद है। इसकी लिखित सूचना विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जोहन पूर्ति व उपाध्यक्ष कोन्ता मुंडा ने प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी को 20 फरवरी को दे दी है, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया। अब ये कदम बाकी ग्रामसभा के लोग भी उठा रहे हैं।

कहा- नौकरी नहीं तो पढ़ाई क्यों ?

भास्कर ने उदबुरु गांव की ग्राम सभा में पूछा कि सरकारी शिक्षा का बहिष्कार क्यों? यहां के डॉ. जोसेफ पूर्ति ने कहा- गांव में दर्जनभर ग्रैजुएट हैं। 10वीं व 12वीं पास करने वालों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। आजादी के बाद से अबतक गांव के मात्र दो लोगों को ही सरकारी नौकरी मिल पाई है। ऐसी शिक्षा का क्या मतलब, जिसे हासिल करने के बाद रोजगार नहीं मिले। रोजगार के लिए गांव के युवाओं को बाहर जाना पड़ता है। जबकि, देश उनका है, राज्य उनका है। फिर भी भटकना पड़ता है। जमीन के अधिग्रहण और विस्थापन से आदिवासियत मिट रही है। इसलिए ग्राम सभा ने बच्चों को ऐसी शिक्षा देने का निर्णय लिया है, जिससे बच्चे अपनी संस्कृति और अधिकार को जाने।

100% आरक्षण मिलने तक जारी रहेगा बायकॉट

डॉ. जोसेफ पूर्ति का कहना है कि देश में संविधान का सही तरीके से अनुपालन नहीं हो रहा है। सरकार पत्थलगड़ी को गलत बता रही है, जबकि पांचवीं अनुसूची में आदिवासी क्षेत्र को आंशिक वर्जित क्षेत्र बताया गया है। संघ राज्य का कानून चलाया जा रहा है। सरकारी नौकरियों को शतप्रतिशत, आरक्षण आदिवासियों को नहीं देगी, तब तक सरकारी शिक्षा का बहिष्कार जारी रहेगा।

28 गांवों में स्कूल बंंद करने की तैयारी

खूंटी प्रखंड के भंडरा, सिलादोन, मारंगहदा, फूदी, तिलमा, मुरहू प्रखंड के कुंजला, मुरहू, हस्सा, गुटूहातु, कोडाकेल, अड़की प्रखंड के अड़की, सरगेया, कोचांग, बीरबांकी, तोडांग, मदहातु, बोहंडा, कर्रा प्रखंड के घुनसुली, कर्रा, डुमरगाडी, जुरदाग, डेहकेला, बस्तपुर, तोरपा प्रखंड के मरचा, डोडाया और रनिया प्रखंड के साढे, डाहु, तांबा, खरेग में संचालित सरकारी स्कूलों को भी बंद करने की योजना है।