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सब्जी बेच पहुंचे IIT, अब गांव के बच्चों को मुफ्त दे रहे हैं कोचिंग

यह क्लास आईआईटी चेन्नई से पीएचडी कर रहे इसी गांव के युवक झालू गोराई की है।

BhaskarNews | Last Modified - Nov 23, 2017, 07:04 AM IST

  • सब्जी बेच पहुंचे IIT, अब गांव के बच्चों को मुफ्त दे रहे हैं कोचिंग

    बोकारो.बोकारो जिला मुख्यालय से सात किलोमीटर दूर एक गांव है सतनपुर। यहां के कुछ बच्चे शाम होते ही पढ़ाई के लिए एक जगह इकट्ठा होते हैं। कम्प्यूटर में एक शख्स दूसरी ओर से ऑनलाइन होता है और एक-एक कर सबसे पहले बातें करता है, फिर सवाल-जवाब और प्रैक्टिस का सिलसिला शुरू होता है। रोजाना दो घंटे यहां क्लास लगती है। यह क्लास आईआईटी चेन्नई से पीएचडी कर रहे इसी गांव के युवक झालू गोराई की है।

    खुद सब्जी बेचकर आईआईटी तक पहुंचने वाले झालू नहीं चाहते हैं कि उनके जैसा कोई और बच्चा अच्छी शिक्षा के लिए संघर्ष करे। इसलिए पहले छुट्टियों में जब भी घर आते थे तो गांव के बच्चों को इकट्ठा कर पढ़ाते थे। इतना इन बच्चों के लिए पर्याप्त नहीं था। ऐसा सोचकर झालू ने फिर ऑनलाइन पढ़ाई करवाने का फैसला लिया। इसमें गांव के ही शिक्षक विनोद कुमार उपाध्याय समेत पांच को जोड़ा। इस साल मार्च में क्लास शुरू हुई और अब तक 200 बच्चे इससे जुड़ चुके हैं। इन्हें सिलेबस के अलावा प्रतियोगी परीक्षा और कम्प्यूटर-इंटरनेट की तकनीकी जानकारी दी जाती है। झालू ने साझा की अापबीती, उन्हीं की जुबानी में....

    स्कूली पढ़ाई सतनपुर में ही हुई। पिता दुंदीबाद बाजार में सब्जी बेचते थे। मैं भी उनकी मदद करता था। सातवीं कक्षा में था तभी पिता का साया सिर से उठ गया। अब बड़े भाई संजय के साथ सब्जी की दुकान चलाने में मदद करने लगा। इस बीच पढ़ाई भी चलती रही। जैक से छात्रवृति मिली तो उम्मीद बढ़ी। हायर सेकेंडरी में 91 प्रतिशत नंबर आए और सेल की मेरिट लिस्ट में शामिल हुए तो इंजीनियरिंग में चाहत परवान चढ़ी। एआईईईई और ओजेईई में रैंक के आधार पर एडमिशन मिल रहा था। लेकिन आर्थिक तंगी बाधा बन रही थी। एजुकेशन लोन के लिए कई बैंकों के चक्कर लगाए लेकिन मदद नहीं मिली।

    फिर घर बेचकर पढ़ाई करने का मन बनाया तो परिवार के अन्य सदस्यों ने जमीन विवाद शुरू कर दिया। फिर दोस्त मुकेश रंजन के साथ ग्रेजुएशन करने 2009 में हजारीबाग के संत कोलंबस कॉलेज गया। वहां मुलाकात प्रो. राकेश और पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रो. नवजोत सिंह सिद्धू से हुई। उन्होंने मेरा संघर्ष सुन मदद का आश्वासन दिया। इसके बाद पंजाब के बरनाला में आर्यभट्ट कालेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी में एडमिशन मिला। पढ़ाई और रहने समेत अन्य खर्च में भी प्रो. सिद्ध् ने मदद की। इंजीनियरिंग में यूनिवर्सिटी टॉपर रहे। 2014 में पंजाब सरकार से ब्रिलिएंट इंजीनियर्स अवार्ड भी मिला। 2015 में आईआईटी चेन्नई मैकेनिकल डिजाइन में पीएचडी करने आया। यहां के मास्टर ऑफ साइंस बाई रिसर्च सेंटर से पीएचडी कर रहा हूं।

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Web Title: Coaching For The Children Of The Village Giving Free
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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