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शहीद की अंतिम यात्रा मे उमड़ा जनसैलाब : 28 गोलियाें से दी गई सलामी, आंखें हुई नम

Pradip Kumar | Last Modified - Nov 18, 2017, 10:04 AM IST

बीजूपाड़ा - चान्हो मे स्कूली बच्चों ने सड़क किनारे खड़े हो दी श्रद्धांजलि।
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    बिटिया सृष्टि ने शहीद पिता को चूमकर दी विदाई।

    रांची (झारखंड)।मणिपुर में चार उग्रवादियों को मार गिराने के बाद शहीद हुए असम राइफल्स के जवान जयप्रकाश उरांव की अंतिम यात्रा में शुक्रवार को जनसैलाब उमड़ पड़ा। रांची के चान्हो स्थित नावाडीह गांव के रहने वाले शहीद के अंतिम दर्शन के लिए चान्हो व मांडर सहित अन्य स्थानों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे और अपनी नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई दी। मातमी धुन के साथ लाया गया शव...

    - सैन्य परंपरा के अनुसार उनके घर से कब्रिस्तान तक सेना के मातमी धुन के साथ शव को लाया गया। सरना रीति रिवाज से प्रार्थना व अंतिम संस्कार की रस्म अदायगी के बाद जयप्रकाश के दादा फगुवा उरांव के कब्र के बगल में उन्हें दफनाया गया।

    - इससे पहले सेना के जवानों ने हवा मे 28 गोली दागकर उन्हें अंतिम सलामी दी। शव के गांव पहुंचते ही वहां कोहराम मच गया था।

    - बच्चे, जवान, बूढ़े व महिलाएं सभी की आंखें नम थीं। अपने लाडले के अंतिम दर्शन के लिए लंबी लाईन लगी थी। भीड़ ज्यादा होने के कारण पुलिस को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    - सुबह के सात बजे से ही लोग सड़क के किनारे कतारबद्ध होकर तिरंगे व फूल के साथ अपने लाडले शहीद जयप्रकाश उरांव की अंतिम दर्शन को खड़े थे। तिरंगा की इतनी बिक्री हुई कि बीजूपाड़ा के दुकानों में तिरंगा का स्टॉक समाप्त हो गया।

    पत्नी लिपट जा रही थी शव से, बेटियां पापा को निहारते रहीं

    - शव के गांव पहुंचते ही उनकी पत्नी संगीता, पिताजी सुकरा, मां लक्ष्मी व भाई रंजीत, विश्वनाथ तथा बसंत का रो-रो कर बुरा हाल था। पत्नी बार बार जयप्रकाश के शव से लिपट जा रही थी। वहीं दोनों बेटियां लगातार अपने पापा को निहार रही थी।

    - शुक्रवार को नावाडीह के किसी भी घर मे चूल्हा नहीं जला था। घर के सभी बच्चे, बूढ़े, महिला व पुरुष जयप्रकाश का अंतिम दर्शन को व्याकुल थे।

    - शहीद जयप्रकाश सरहुल मे लगभग 20 दिनों की छुट्टी पर घर आया था। उस समय अपनी पत्नी को लेकर चान्हो के एक जेवर दुकान से कान का जेवर खरीदा था। उसी समय पत्नी मंगलसूत्र खरीदने की जिद कर रही थी।

    - जयप्रकाश ने अपनी पत्नी से वादा किया था कि अगली बार आएगा तो पत्नी के लिए मंगलसूत्र खरीद कर देगा।

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    फोटो : रमीज/नितन।

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    विलाप करती शहीद की पत्नी और परिजन समेत गांव के लोग।
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    शहीद के शव को देखकर गांव की महिलाएं रोने लगीं।
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    सेना के जवानों ने 28 गोलियां दागकर साथी को अंतिम सलामी दी।
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    लोगों ने देश प्रेम के नारे लगाए।
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    जवान का अंतिम संस्कार शुक्रवार को हुआ।
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    गांव पहुंचा शहीद का शव।
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    रास्ते में श्रृद्धांजलि देने के लिए खड़े लोग।
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    रास्ते में श्रृद्धांजलि देने के लिए खड़े लोग।
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    रास्ते में शहीद को श्रृद्धांजलि देने के लिए खड़े लोग।
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    रोती-बिलखती गांव की महिलाएं।
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Web Title: Assam Rifles Constable Last Cremation In Ranchi Jharkhand
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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