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शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचा रांची, पिता ने कहा-खुशी है कि बेटा देश के काम आया

Dainik Bhaskar

Nov 16, 2017, 04:27 PM IST

शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचा रांची, पिता ने कहा-खुशी है कि बेटा देश के काम आया

रांची एयरपोर्ट पर शहीद की बॉडी रांची एयरपोर्ट पर शहीद की बॉडी

रांची (झारखंड)। असम राइफल्स के शहीद जवान जयप्रकाश उरांव का पार्थिव शरीर गुरुवार को रांची एयरपोर्ट पहुंचा। यहां राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें सलामी दी। शुक्रवार को उनके पार्थिव शरीर को पैतृक निवास चान्हो थाना क्षेत्र के नावाडीह ले जाया जाएगा। वे मणिपुर में चंदेल जिले के साजिक टंपक में बुधवार को उग्रवादियों से एनकाउंटर में शहीद हो गए थे। उन्होंने इस दौरान 4 उग्रवादियों को मार गिराया था। जयप्रकाश ने अपनी पत्नी से वादा किया था कि बेटी के बर्थडे (6 दिसंबर) को वो घर आएंगे। पिता को बेटे पर गर्व...

- जयप्रकाश चार असम राइफल्स में सिपाही थे। पिता सुकरा उरांव ने कहा- खुशी है कि मेरे बेटे ने देश के लिए अच्छा काम किया है।

-एयरपोर्ट पर राज्य सरकार के मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा, विधायक गंगोत्री कुजूर और पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने शहीद को श्रृद्धासुमन अर्पित किया।

-शव का अंतिम संस्कार शुक्रवार को जवान के पैतृक गांव में होगा। होम सेक्रेटरी एसकेजी रहाटे, रांची के डीसी मनोज कुमार, एसएसपी कुलदीप द्विवेदी, सिटी एसपी अमन कुमार समेत सेना के कई ऑफिसर्स और जवान एयरपोर्ट पर मौजूद रहे।

सीने में लगी थी दो गोलियां

-असम राइफल्स के वारंट अफसर देवेंद्र पाल ने बताया कि बटालियन के जवान बुधवार को सर्च ऑपरेशन पर निकले थे। सुबह 5:35 बजे उनकी उग्रवादियों से मुठभेड़ हो गई।
-जयप्रकाश ने चार उग्रवादियों को मार गिराया। इस दौरान उनके सीने में दो गोलियां लग गईं। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। जहां मुठभेड़ हुई, वह इलाका म्यांमार सीमा से सटा है।
-बेटे की शहादत की खबर मिलने के बाद पिता सुकरा उरांव और मां लक्ष्मी उराईन गुमसुम हैं। सुकरा ने कहा-बड़ी मेहनत से बेटे को पढ़ाया था।
-सोचा था कि बुढ़ापे का सहारा बनेगा। जयप्रकाश भी सबका ख्याल रखता था। लेकिन खुशी है कि मेरे बेटे ने देश के लिए अच्छा काम किया है।

छोटी बेटी स्मृति के जन्मदिन पर छह दिसंबर को आने का वादा किया था


-जयप्रकाश की पत्नी संगीता ने कहा- 'एक दिन पहले ही उनसे बात हुई थी। सबकी खैरियत पूछी थी। छह दिसंबर को छोटी बेटी स्मृति कच्छप के जन्मदिन पर आने का वादा किया था।'
-'कहा था कि इस बार बड़ी पार्टी करूंगा और ढेर सारा गिफ्ट दूंगा।' जयप्रकाश चार भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। बड़े भाई विश्वनाथ उरांव और छोटे भाई बसंत रंजीत गांव में खेतीबाड़ी करते हैं।

आगे की स्लाइड्स में देखिए फोटोज...

फोटो: प्रदीप गुप्‍ता/राजीव गोस्वामी।

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रांची एयरपोर्ट पर शहीद की बॉडीरांची एयरपोर्ट पर शहीद की बॉडी
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