ग्रामीण कौशल विकास मिशन में फर्जी बहाली के नाम पर युवकों से ठगी, विभाग के अफसर तरीका देख हैरान

4 वर्ष पहले
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धनबाद.  ग्रामीण कौशल विकास मिशन कोलकाता में फर्जी बहाली दिखा कर धनबाद सहित राज्य के हजारों युवकों को ठगा गया। मामला तब सामने आया, जब कुछ युवक बहाली की सच्चाई का पता लगाने के लिए गुरुवार को उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। भास्कर की पहल पर कौशल विकास अधिकारी प्रवीण कुमार ने मामले की जांच की। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय कौशल विकास धनबाद अधिकारियों से जानकारी मांगी। 3 घंटे बाद सच सामने था। बहाली नहीं निकली थी। मामले की जानकारी उपायुक्त ए. दोड्‌डे तक पहुंची। वे भी ठगी के तरीके को देख हैरान हो गए। इस मामले में जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रियरंजन ने फर्जीवाड़ा के तरीकों को बिंदुवार क्रम में समझाया। 

 

कैसे निकाली गई बहाली : फर्स्ट जॉब सर्च नामक वेबसाइट में बहाली संबंधी सूचना दी गई। बताया गया कि 5561 पदों पर बहाली है। जिन पदों पर बहाली बताई गई, उसमें पीआरओ, ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर और मल्टी टास्किंग स्टॉफ का पद शामिल है।

 

कैसे ठगा गया: आवेदकों से स्वयं के दो पते पर आवेदन करने को कहा। दोनों ही पते को आवेदनों के साथ 40-40 रु. के दो पोस्टल स्टांप भेजने को कहा। इस प्रकार उसने एक आवेदक से 80 रु. का पोस्टल स्टांप मंगवाया।

 

कैसे सामने आया सच: जिला प्रशासन के अधिकारियों ने संस्था के वेबसाइट को सर्च किया। फिर मामले को रांची भेजा। रांची ने भी जांच की और बहाली को असत्य पाया।

 

ऐसी कोई सरकारी संस्था ही नहीं : ग्रामीण कौशल विकास मिशन का नाम बदल चुका है। अब इसका नाम दीनदयाल उपाध्याय कौशल विकास मिशन है। 

 

आवेदन मांगने का तरीका: आवेदक से अपने दो स्थायी पते से आवेदन देने को कहा जा रहा है। प्राय: ऐसा नहीं होता है।

 

ऑफिस इंचार्ज के नाम पर आवेदन: आवेदकों से ऑफिस इंचार्ज के नाम पर आवेदन भेजने को कहा गया है। जबकि सचिव के नाम पर आवेदन लिया जाता है।

 

पता संदिग्ध : वेबसाइट में संस्था अपना मुख्यालय केरल बता रही है। जबकि क्षेत्रीय कार्यालय कोलकाता लिखा हुआ है। जो संदिग्ध लग रहा है।

 

कोई संपर्क नंबर नहीं : वेबसाइट में कोई संपर्क नंबर नहीं दिया गया है। ऑफिस का भी संपर्क नंबर नहीं है।

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